फोकस साहित्य

भविष्य पर प्रश्न चिन्ह

मैं किताबों का क्रेता नहीं बल्कि अपनी किताबों का विक्रेता बनकर आया हूँ। खबर लगी थी कि शहर में बस आप ही की दुकान ठीक-ठाक चल रही है,...

लघु कथा : जंग जीत ली

जैसे तैसे बच्चों को बड़े भाई ने सुबह किसी दोस्त के घर से खाना मंगा कर खिलाया। अनिता ने सुबह होते होते फैसला ले लिया और जल्दी से अपने...

लघु कथा: दूसरी मां सी

एक दिन अंजू के बड़े भाई से मौसी की कुछ बात पर तकरार हो गयी मै वहाँ मौजूद थी । अचानक बात बहुत बढ गयी उसने मौसी से कह दिया आखिर हो तो...

मानव मन

स्वयं उगाता निज अभ्यारण्य, आजीवन करता फिर विचरण, नेत्र बंद कर ,पथ निर्धारण।  चित्र विचित्र कितना मानव मन।

लघुकथा: अधूरा ज्ञान

अरे यार, क्या बताऊँ, मैं रातभर सोई नही, कल शीशे में देखा, मुँह में छाले के साथ एक सफेद दाग भी था। बस डॉक्टर गूगल के चक्कर मे पड़ गयी,...

अंधेरे का उजला पक्ष

पिछले कुछ वर्षों से जो घटित हो रहा है , उसका प्रभाव हम सब के जीवन पर बहुत गहरा पड़ा है..... अब तो सब छोड़ दिया है आगे की सोच ना.......

Short story:कागज़ के फूल

तेज़ बारिश हो रही थी, अचानक लगा कोई महिला दौड़ रही है, पीछे दो चार युवक भी उसका पीछा कर रहे । तुरंत ब्रेक लगा कर गाड़ी रोकी और महिला...

लघु कथा: आस्था

एड्रियाना काले बूट पहने ,पीली छतरी लिए सफेद स्कार्फ बांधे जा रही है। काली ऊनी ट्यूनिक कहाँ तक ठंड से राहत दे ?सफेद बैग कंधे पर लटक...

एक बेचारी .. काम की मारी  

सबसे अधिक दुखद स्थिति होती है,उस नौकरी पेशा लड़की की जो 8-10घण्टे घर से बाहर रहना चाहती है । घर ग्रहस्थी के कामों से स्त्री को छुटकारा...

संस्मरण: मकर संक्रांति

हर साल की तरह इस साल भी जिस दिन भी सूर्य नारायण मेहरबान हुए उसी दिन काला तिल धो धा कर सूखा लिया।कल दोपहरी की शांति में हल्की धूप सेंकने...

ये बारिश का मौसम, सूनी तीज

उसको अपने ही पति की दुल्हन बना कर अपने घर ले आयी थी। आसपास के सब लोग हैरान रह गए जब उन्होंने ये सब होते हुए देखा और सुना…

संस्मरण:बारिश का मौसम 

नौकरी की मजबूरी थी इसलिए  जाना  पड़ा । यहाँ आए हुए एक हफ्ता ही हुआ था ।क्वार्टर ना मिलने के कारण रोज बस से आना -जाना करती थी। बारिश...

बिन मां की बच्ची

धीरे धीरे मां भी अवसाद का शिकार होने लगी । घर में कोई भी सदस्य मां की मानसिक स्थिति नहीं समझता था । रूपा अब बड़ी हो गयी थी । मां बिलकुल...

ये वादा रहा

कब मिलते मिलाते हमने एक दूसरे से जीवनसाथी बनने का वादा कर लिया, कुछ एहसास ही ना हुआ। अभी एक महीने बाद आलिंद ठीक हो गए तो मिलने गई...

सपनो का ब्याज

सच में पढ़ी लिखी अपने पैरों पर खड़ी बेटियाँ बेटो से किसी मायने में कम नहीं है।एक वो भी समय था जब बेटी के लालन पालन से ज़्यादा फ़िक्र...