पार्ट 2 : सारी रात सरिता करवटें बदलती रही वो बाँहों के...

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फीचर्स डेस्क। सारी रात सरिता करवटें बदलती रही वो बाँहों के कसाव को भूल ही नहीं पा रही थी । अचानक से जुदाई का सोच रोने लगी । अब खोने का डर सताने लगा । सारी रात आँखों में कटी जब तारे छुपने लगे तो कुछ देरें को आँख लगी वो सो गई ।
उधर कमल भी सारी रात सो न पाया । उसके सीने में सुलगते रहे अरमान , वो आलिंगन वो बदन का कसाव बेचैन कर रहा था । करवटें बदलता रहा सारी रात ।
माँ - कमल बेटा हाथ मुहँ धो कर चाय पी ले , लगता है सारी रात पढ़ा है क्या ? आँखें लाल हो रही हैं ।
कमल - हाँ माँ नींद नहीं आई ।
माँ - ठीक पहले बाबू जी से मिल ले वो दूकान जाने वाले हैं नौ बज रहा है ।
कमल - प्रणाम बाबू जी । जीते रहो बेटा । बेटा बी ए की परीक्षा ख़त्म हो तो मेरे साथ दूकान पर बैठ कुछ सीख लेगा अब तुझे ही व्यापार आगे बढ़ाना है ।
जी बाबूजी ।
कमल तैयार हो कॉलेज जाने लगता है माँ मैं कॉलेज के बाद दोस्त के घर जाऊँगा तो थोड़ा लेट हो जाऊँगा आप खाना खा लेना ।
कमल सीधा बीना के घर जा पहुँचा बोला सरिता मेरा संदेशा दे देना कि दोपहर तीन बजे कम्पनीबाग में बरगद के पेड़ के नीचे मिले । वहाँ से चला जाता है ।
बीना सरिता के घर चल देती है संदेसा पा सरिता परेशान हो जाती है । अरे इतने लोग होगें वहाँ कोई देख लेगा ।
बीना- देख लोग तो सुबह शाम होते हैं दोपहर में कोई नहीं होता और मेरे घर रोज़ रोज़ मिलोगे तों मेरी माँ को शक पड़ जाएगा ।
सरिता- ठीक पर जाऊँगी कैसे ? माँ को क्या बोलूँ ?
बीना - कह दे बीना के साथ बाज़ार जा रहीं हूँ हिस्ट्री कि बुक ख़रीदने । मुझे ख़रीदना है यार तू ले जाना अगले दिन मुझे वापस दे देना ।
बीना तैयार हो ढाई बजे सरिता के घर पहुँच जाती है ऑन्टी सरिता ने बुलाया है कह रही थी बुक ख़रीदने मेरे साथ चल ।
माँ आवाज़ लगाती है - सरिता बीना आई है । हाँ माँ साठ रूपय दे दो किताब ख़रीदना है ।
रिक्शा कर दोनों कम्पनी बाग चल देती हैं ।
वहाँ पहले से कमल मौजूद था ।
उसे गेट पर उतार बीना किताब ख़रीदने बाज़ार चली जाती है ।
आँख मिलते ही दो बेचैन दिल धड़क उठे जल्दी जल्दी बरगद की तरफ़ बढ़ने लगे । चारों ओर देखा कोई नहीं है तो हाथों हाथ ले दिल की दास्ताँ बयॉं करने लगे । साथ जीने मरने के क़समें वादे । सरिता पलकें झुकायें कहे जा रही थी , देखो परीक्षा है अब हम एक महिने बाद मिलेंगें । आप पूरी मेहनत से पढ़कर अच्छे नम्बरों से पास हो जाईये ।
कमल ने कुछ न सुना उसकी निगाह व ध्यान तो सरिता के धड़कते उरोजों पर था । अचानक से हाथों को चूमते

क्रमश :