पार्ट:-1 कमल के इंसानियत देख सरिता अपने को रोक नहीं पाई फिर ....  

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फीचर्स डेस्क। सरिता रोज़ कि तरह सखियों के साथ साइकिल से स्कूल जा रही थी,अचानक ही सामने से कुछ लड़के भी साइकिल पर आते हैं और लड़कियों पर छींटाकशी करने लगते हैं । एक लड़का सबको रोकता है यार जाने दो शरारत न करो , दूसरा लड़का पूछता है इनमें तुम्हारी बहन भी है क्या ? 

दो दिन यही सिलसिला जारी रहा पर वो लड़का नहीं था उनमें । तीसरे दिन पुलिस का डंडा देख सब भाग गये और उसी समय वही लड़का आया और बोला अब आप लोगों को डरने कि कोई बात नहीं । 

लडकियॉं समझ गई कि इसीने मदद की है । सरिता ने पूछा आपका नाम ? 

कमल 

सरिता - कमल जी हमसब आपके आभारी है । 

कमल - ये तो इंसानियत है । 

बातचीत का सिलसिला जारी रहा और दोनों एक दूसरे कि तरफ़ आकर्षित हुए । ये आकर्षण कब प्यार में बदल गया पता ही न चला । अब छुप छुप के मिलना मिलाने का सिलसिला जारी रहा । साथ जीने मरने कि क़समें व एक-दूसरे को जीवन साथी बनाने सपने देखने लगे । 

कहते हैं न प्यार छुपाये नहीं छुपता आख़िर घर वालों को पता चल ही गया । 

सरिता पर सख़्ती व नाराज़गी का दौर शुरू । 

उधर कमल के घर वाले भी तैयार नहीं । 

सरिता कॉलेज भी जाती तो भाई कि निगरानी में । किसी अंजाने डर से सरिता काँप उठती घर में सबने बातचीत भी कम कर दी । 

आज माँ ने कहा बेटा सरिता ज़रा अच्छे से तैयार होना कोई मेहमान आने वाले हैं । 

सरिता को समझते देर न लगी बोली माँ वो गुलाबी सूट पहन लूँ ? 

माँ- हाँ वो तुझपे बहुत जँचता है । माँ वो पड़ोस में मेरी सहेली बीना ले गई थी मैं लेकर आती हूँ । 

माँ- ठीक है जल्दी आना । 

सरिता बीना के घर पहुँच कर बोली सुन बीना मुझे तो लगता हैं माँ-बाबूजी मेरे रिश्ते के लिये किसी को आज बुलाया है । रोते हुए बोली अगर मुझे पसंद कर लिया तो कमल का क्या होगा । 

बीना - रो मत सखी तू एक ख़त लिख कर मुझे दें मैं कमल तक पहुँचा दूँगी । 

सरिता ख़त लिख व सूट ले कर वापस घर लौट आई । 

शाम को मेहमान पधारे सरिता ने सूट तो पहना पर रोनी सूरत लिये चाय की ट्रे पकड़े सामने आई । 

होनी बलवान होती है सरिता को पसंद कर लिया गया । 

मेहमान सरिता के हाथ में पॉच गिन्नी रख रोका कर चले गये । 

कमरे में जा सरिता माँ के गले मिल फूट फूट कर रोने लगी माँ मुझे शादी नहीं करनी । माँ - देख सरिता एक न एक दिन सभी लड़कियों का व्याह होता है । 

सरिता माँ मैं पढ़ना चाहती हूँ । 

माँ - अगर पढ़ना ही था तो ये सब करम ही क्यूँ करके बैठी ? 

सरिता- माँ मैंने कुछ नहीं किया बस हम एक दूसरे को पसंद करते हैं , हमारे विचार मिलते हैं और जीवन साथ गुजारना चाहते हैं । 

माँ- देख सरिता तेरे बाबूजी न मानेगें । खुद ही सोच इतना अच्छा इंजीनियर लड़का मल्टिनेशनल कम्पनी में जॉब तू ज़िंदगी भर सुखी रहेगी । 

सरिता- पर माँ मैं कमल से प्यार करती हूँ । 

माँ- मैंने पता किया था वो तो अभी पढ़ रहा है बी ए फ़ाइनल में है । 

सरिता- माँ मैं भी तो बी ए द्वितीय वर्ष में हूँ । 

माँ- यही तो लड़के लड़की में फ़र्क़ है तू सत्रह की पूरी हो गई अब अट्ठारह वर्ष में व्याह तो होता ही है । मैं तो पंद्रह में ही ब्याह गई थी । 

इधर ख़त पा कर कमल का बुरा हाल बीना से बोला अपनी सहेली से कहो कैसे भी हो ये विवाह न करें मैं उसके बिना जी नहीं पाऊँगा । 

बीना - आपके घर वाले राज़ी हैं ? 

कमल - जी पर अभी नहीं , माँ बाबूजी कहते हैं पहले पढ़ाई पूरी कर लो फिर कर देंगे । ये बात सरिता को बताई थी मैंने 

बीना - तो अब क्या सोचा ? 

कमल - देखो बीना सरिता को १८ वर्ष होने में ६ महिने हैं तब तक कुछ सोचते हैं । 

ख़त ले बीना घर आ गई । 

अगले दिन बीना सरिता के घर पहुँच ऑन्टी सरिता घर पर है ? हाँ हाँ बेटा ऊपर अपने कमरे में है । 

कमरे में पहुँच बीना कमल का ख़त देती है । सरिता पढ़कर कहती है- बीना कमल मुझसे मिलना चाहता है , मैं घर से अकेली निकल ही नहीं सकती । मेरे ऊपर पहरा है जहां भी जाऊँ भाई साथ होता है । 

बीना - तू चिंता मत कर मैं कल तुझे व कमल को अपने घर चाय पर बुलाती हूँ । 

नीचे आकर ऑन्टी कल मेरा जन्मदिन है सरिता को ४ बजे चाय ☕️ पर मेरे घर आना है ।

ठीक है बेटा भेज दूँगी । 

कमल को भी बीना बुला लेती हैं । 

अगले दिन कमल टाइम से पहले ही पहुँच जाता है । 

सरिता गिफ़्ट ले पहुँचती है । बीना उसे कमरे में जाने का इशारा करती है । 

उसे देखते ही कमल अर्धविक्षिप्त सा अपना आपा खो के सरिता से लिपट जाता है । सरिता भी अश्रुपूरित नैनों से उसके बाहुपाश में समा जाती है । आलिंगन बध्य होते ही कमल सरिता के अधरों पर अपने तपते अधरों का पहला चुम्बन देता है । दोनों-तरफ़ बराबर कि तडप उसी क्षण सरिता अंजाने डर से काँप उठती है और बड़ी फुर्ती से  अलग हटती है । 

आँसू के सैलाब से सरिता का वक्षस्थल गीला हो चुका था । आँचल से मुख पोंछ बार बार कह रही थी कमल हमारा क्या होगा ? 

कमल - अभी ६ महिने हैं हम कोई न कोई रास्ता निकालेंगे । दोनों कुछ शांत होते हैं उसी समय बीना दरवाज़े पर दस्तक दे चाय ☕️ ले आती है । 

बीना - अरे तुम दोनों रो रहे हो देखो रोने से हल न निकलेगा । 

सरिता- हम क्या करें कहाँ जाये हमारे पास न पैसे न घर 

कमल - दुनिया बड़ी ज़ालिम दो प्यार भरे दिलों को मिलने न देगी । 

सरिता- अब मुझे जाना होगा माँ राह देख रही होगी । 

दोनों फिर मिलने का वादा कर अपने अपने घर चले जाते हैं । 

क्रमश: 

इनपुट : शबनम महरोत्रा, कानपुर सिटी।