का गुरु चलब का लंका!

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फीचर्स डेस्क। अजीब सा शहर है हां यकीन मानिए मैं बनारस की ही बात कर रही हूं, मस्त मलंग फक्कड़ सा अजीब सा शहर, जहां गाली भी पान की तरह प्यार से परोस कर दी जाती है और साथ में ये भी पूछा जाता है कि अरे गुरु चूना वाला पान ही खैयब ना, कि कत्था मिला दिही।

 अल्हड़पन लिए ये शहर शाम को जवान होता या ये कहे कि शाम को ही इसका दिन निकलता है 

एक तरफ महादेव की भक्ति ने पूरे शहर को हर हर महादेव से जोड़ रखा है तो दूसरी तरफ छठी क्लास से लेकर पीएचडी करने वाले स्टूडेंट लोगो ने इस शहर को चाय ब्रेड टोस्ट पर बांध दिया है लेकिन शहर कभी बंध नहीं पाता है थोड़ा अजीब सा है..... जहां ट्रैफिक होने पर लोग गाड़ी का हॉर्न नहीं बजाते हैं पड़ोस वाले मोटरसाइकिल वाले से बीएमडब्ल्यू वाला पूछता है भैया खैनी रखले हवू का हो, मोटरसाइकिल वाला पास खड़े रिक्शेवाले से कहता है अरे गुरु तनी खैनी बनवा ना, रिक्शावाला अपना गंदा हाथ गमछा में पूछते हुए आराम से इत्मीनान से खैनी बनाते हुए मोटरसाइकिल बीएमडब्ल्यू वाले के सामने खैनी परोस देता है और वह दोनों मुस्कुराते हुए रिक्शा वाले से पूछते हैं का!!! गुरु इतना जाम कहां लगा है बे।

किसी को जल्दी नहीं है यहां पर गलती से किसी चाय वाले से आप ने पूछ लिया कि बोल दिया कि भैया थोड़ा जल्दी चाय बना दो तो चाय वाला गुर्रा के कहेगा अरे गुरु जी बनारस है महादेव की नगरी यहां सब कुछ आराम से होता है जल्दी है तो आगे का दुकान पर चले जाइए यहां पर दुकानदार भी दुकान तभी खोलता है जब उसे पैसे की जरूरत होती है 2 महीने कमा लिया तो 8 महीने आराम करते हैं फिर बाकी के 2 महीने कमाने के लिए दुकान खोल लेते हैं, कभी किसी पान वाले की तारीफ में यह कह दो कि भैया गज्बे का पान लगाए हो बे तो पानवाला अपना प्रॉफिट की लंका लगाते हुए आपको ₹10 के पान में ₹15 का मसाला मिलाकर खिलाएगा और कहेगा अरे गुरु वह तो कुछ तो नहीं था"" इ खाइए मिजाज हरिहर ना हों तो कहिएगा।।।

बाहर से आने वाले लोगों को ऐसा लगता है कि बनारस बस 80 से शुरू होकर राजघाट पुल पर खत्म हो जाता है असल में बनारस शुरू होता है काशी की गलियों में जहां कचौड़ी गली के नाम पर फेमस गली में कचौड़ी की दुकान नहीं होती है जहां मार्कण्डेय मार्ग पर मां काली की मूर्ति होती है जहां पर लंका पर किसी की लंका नहीं लगाई जाती है बल्कि चाय पी कर अर्थव्यवस्था से लेकर अमेरिका के आर्थिक नीति पर ऐसे बात किया जाता है , ऐसे लोगों को समझा जाता है जैसे कि लंका पहुंच जाइए और आपके सारे प्रॉब्लम का सोलूशन एक चाय की चुस्की के साथ हो जाएगा ऐसे में डर लगता है कि कहीं ट्रंप चाचा भी फोन करके  ना पूछें लेे "का गुरु चलब का लंका"

इनपुट सोर्स : अंकित, भभूआ, विहार।