हमें नाज़ है इस इश्क़ पर...

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फीचर्स डेस्क। मन की दहलीज़ पर, रख यादों के चराग़ पोस्ट चुपके से वो, मेरा पढ़ती थी और बिना किसी सबूत छोड़ें बाहर निकल जाया करती थी, ऐसी थी मेरी प्रिया। अभी कुछ समय हुआ था इस आभासी (फेसबुक) दुनिया में मिले हुए। पता नहीं नील कि हर पोस्ट उसके दिल में कब और कैसे जगह बनाती गई उसे खुद पता नहीं। अचानक से एक दिन इनबाक्स में हैलो का मैसेज देख नील को बेचनी सी हुई शायद ये हैलो उस टाइम प्रिया ने किया जब नील ऑफ लाइन रहा होगा।

जी, बस इतना सा जवाब था उस हैलो के बदले दूसरे दिन।

प्रिया ने “जी” लिखा तो रात को ही देख ली थी पर रात को एक लेडीज होने का पूरा परिचय दिया और दूसरे दिन सुबह “गुडमॉर्निंग” से नील का वेलकम किया।

हजारों कि संख्या में इस आभासी दुनिया के दोस्तो में ये दोस्त बहुत खास लग रही थी नील को। नील और प्रिया का ये औपचारिक सुबह-शाम एक दूसरे को “विश” करने का सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा। इन दिनों कुछ हो रहा था तो वह किसी सुबह इंतजार के बाद गुडमॉर्निंग का मैसेज न आने का बेताबी।

कई महीने गुजर गए कोई किसी के प्यार में नहीं बस यही दोनों कहते रहे। जबकि दिन में कई बार हैलो, क्या कर रहे हो, नास्ते में क्या लिया था, अब काम बंद करो लांच कर लो बहुत टाइम हो गया। ये बातें 700 किलोमीटर दूर से प्रिया का ख्याल रखने का तरीका बाया कर रहा था।

हाँ, जा रहा हूँ जस्ट !

नील के पास इसके अलावा कोई जवाब नहीं हुआ करता था। अब तो जैसे हर समय दोनों साथ रह रहे हों ऐसा लगने लगा था। शादी-शुदा दोनों थे पर बातें कभी पर्सनल लाइफ कि किया भी नहीं करते थे। शायद नील को पसंद नहीं और प्रिया किसी भी हाल में नील को नाराज नहीं कर सकती थी।

अब बात एक दूसरे के काम को लेकर होने लगी थी। नील जॉब पर था तो प्रिया 2 बच्चों कि देखभाल के साथ एक पति और एक दोस्त (नील) कि जरूरत, मोटीवेशन, और ख्याल रखने मात्र को अपना रूटीन बना लिया था। ऐसा भी नहीं था कि इन बीच कभी नोकझोक नहीं हुई, कई बार हुई पर बड़े प्यार से प्रिया अपने को बड़े होने का परिचय देती और हर बार नील को प्यार से मना लेती.

अब तक दोनों कहा तक आ गए बस यही बात समझ नहीं पा रहे थे। बात गलत है, इस तरह के प्यार में होने का पर अब रुके कौन। एक रात को बड़े प्यार से सुलाया था बिना लोरी के प्रिया ने नील को। पर न जाने कौन सी उस रात को हवा लगी कि सुबह नील अस्पताल जा पहुचा।

कई मैसेज का रिप्लाई न मिलने पर प्रिया ने नील का नंबर डायल कर दिया। हैलो, उधर से अनसुनी सी आवाज आने पर प्रिया डर सा गई थी। तब तक हैलो, सुनिए भैया- एड्मिट हैं अस्पताल में आप बाद में काल करना, इस बात के बाद फोन काट दिया गया। प्रिया खड़ी थी डायनिंग रूम में सामने पड़ी कुर्सी पर बैठी तो होश में पर फोन पर सुनी बात उसको बेहोश करने को काफी थी। प्रिया क्या करें और नील क्यो गया अस्पताल अभी तो शाम को ठीक था। इन्हीं बातों में वह उलझी थी, लगभाग 1 घंटे बाद हेलो, हाँ बोलो। ये आवाज प्रिया के लिए एक तरफ जहां जीने कि उम्मीद को बढ़ाया वही तुम कैसे हो, क्या हुआ तुम्हें, बताए भी नहीं। मन में तो इस तरह के अनगिनत सवाल थे। लेकिन प्रिया के गला उसका साथ नहीं दें रहा था वह सिर्फ रो रहीं थी। लेकिन जल्द अपने को सभाली, अभी कैसे हो आऊ क्या ? ये  पहली बार प्रिया के मुह से नील ने सुना था, अभी तक तो कभी नहीं मिलूगी, हमे प्यार-वार कुछ नहीं हुआ है समझे बस यही सुना था।

अरे, पागल हो क्या घर में क्या बोलोगी और कितनी दूर हो। बस फोन करती रहना। हाँ, प्रिया ने कहते-कहते छिपाने के बाद भी नहीं छिपा सकी और ज़ोर से रो पड़ी। नील ने समझया और फोन काट दिया। हालत ठीक नहीं थी तो डॉक्टर ने रिफर कर दिया। अब नील अपने शहर के अस्पताल में था। इधर प्रिया सब कुछ बंद कर मंदिर और पुजा करने का समय को बढ़ा दी थी। एक दिन, दो दिन और फिर 10 दिन बीत गया नील ठीक होने लगा। एक दिन डॉक्टर ने छोड़ दिया और अब वह अपने घर पर था। बात तो होती थी पर कम। काफी दिन बाद नील ठीक होकर अपने काम पर लौटा तो काफी कुछ बदल चुका था, समटने में टाइम लगा, कुछ लोग खुश थे ठीक होने पर तो कुछ मायूस भी काम अधिक करना पड़ेगा इस बात से।

धीरे-धीरे नील का साथ प्रिया देने लगी अब वह हर पल नील के दिल और दिमाग में होती थी। काम में साथ, बजट और हिसाब में साथ, सुबह नास्ते से लेकर रात को डिनर तक का डाइट फिक्स टाइम पर देना प्रिया ने अपना रूटीन मान ली थी और यह सब वह 700 किलोमीटर दूर से कर रही थी। नील काम कुछ करें पर उसका ध्यान प्रिया हर पल रखने लगी थी।

अब इस सिलसिले को कोई साल भर होने को था। एक तरफ न मिलने कि कसमें थीं तो दूसरी तरफ एक बार सामने से देख लेने कि लालसा भी। कुछ दिनों बाद जब बात हद से बढ़ी तो प्रिया से मिलने नील उसके शहर जा पहुंचा.....

क्रमश : अगली कड़ी में पढे क्या प्रिया मिली नील से और फिर क्या हुआ ....

इनपुट सोर्स : नीरज त्रिपाठी, लखनऊ सिटी।