'पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म'

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए। " ये जनरल टिकट Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

दर्पन ही नहीं सब कहते मैं अप्सरा ख़ूबसूरत हूँ दादी नानी बहने सखियॉं सब मिल नजर उतारें यौवन ने दी दस्तक नार नवेली तके सब दिनरात गजाला निगाहें गजब शबाब ये अदाएँ जैसे ग़ज़ल यौवन का खिंचाव सहमी बाला बनी मैं रूपगर्विता मैं अप्सरा दिल न किसी को दूँ देख दर्पण शरमाऊँ मैं चाँदनी शीतल मंद पवन सी त Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

चलो नींद से अठखेलियाँ करें हम तुम ख़ामोशियाँ तोड़ें बीते हुए कल को सहेजते हैं फिर से शब्दों को बीजते हैं ग़म ए अतीत को भुलाते हैं ज़ख़्मों की तुरपन करते हैं जीवन गीत दोहराते हैं जीने का फिर करीना सीखते हैं अंतर्मन की आँखों से फिर सपनों का खेत जोतते हैं शब्दों के घने जंगल में इक दूजे को Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। मोती चुगने गयी रे हंसिनी मानसरोवर तीर… बचपन में सुना ये गीत उस समय याद आ गया , जब लंदन के हाइड पार्क की एक झील में हंसों को किलोल करते देखा । अद्भुत नज़ारा था मेरे लिए । लंदन में भले ही ये एक नुमाइश का पक्षी हो , किंतु मेरे लिए माँ सरस्वती का वाहन था । अब तक चित्रों में देखा था , पढ़ा भी था , आज साक्षात दर्शन पा लिए ।  Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

मणिकर्णिका की ज्वाला अब भी सीने में धधकती है!  पापा आपके बिना  ये आँखें भी ना सिसकती हैं!  अपनी पीड़ा किससे कहूँ कौन समझ अब पाएगा!  उँगली पकड़कर कौन मुझे किसी दुविधा से पार लगाएगा!  रूठना किसी से भूल गई अब  खुद से ही रूठी रहती हूँ!  Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। आज पितृ दिवस है,हमारे जन्मदाता,हमारे पिता के प्रति आभार व्यक्त करने का एक नियत दिवस। ये सच है कि मात-पिता का ऋण कभी नही चुकाया जा सकता।पर जब एक जन्मदाता अपने कलेजे के टुकड़े को,अपनी पारी,अपनी लाडो,अपनी गुड़िया को किसी दूसरे के घर भेजता है।तो उस लाडो को एक और पिता मिल जाता है...उसके ससुर जी के रूप में और आज पितृ दिवस पर मैं अपने उस पिता Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh