लॉकडाउन : जब भाई बनकर ससुराल छोड़ने आई पुलिस....

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28th March, 2020, Edited by अमरीश मनीष शुक्ला 

टीवी स्क्रीन पर प्रधानमंत्री के आठ बजे का टेलीकास्ट जैसे ही खत्म हुआ काजल की सांसे तेज हो गयी। घबराहट के चलते उसके दिमाग में सिर्फ इतना ही आया था कि अब क्या होगा? अचानक उसके पेट में दर्द होने लगा। माथे से पसीना और सूखते गले के बीच रौंधे गले से वह फुसफंसायी मां ? अगले क्षण दौडती हुई मां आई, क्या हुआ काजल ?
मां दर्द हो रहा है। मां तेज कदमों से पानी का ग्लास लेकर फिर से वापस लौटी और बेटी को पिलाते हुये बोल — पर डाक्टर ने तो 28 को डेट दी है। मां का हाथ बेटी के गर्भ पर दुलार करता हूं, दर्द को हर रहा था, मानो सारे दर्द का इलाज मां के उन हाथों में ही रहा हो।
काजल — पता नहीं मां, अचानक से घबराहट हुई और दर्द, आप उनको फोन करिये कहिये कल ही आ आये।
मां — मैं कौन सा फोन लगा लेती हूं, तू ही लगा फोन, मैं बोलती हूं।
अगले कुछ क्षणों में फोन तेलंगाना के हैदराबाद जिले में लग चुका था, जहां काजल का पति मनीश पटेल बुखार, जुकाम से पीडित था।
मैं काजल की मां बोल रही हूं, बेटा कब आओगे
प्रणाम मां, मैं दो दिन बाद आउंगा ।
मां— ले अब तू बात कर ले, मै बाहर लाइट जलाकर आती हूं
मनीश ने काजल का हाल चाल पूछा और कुछ देर में काजल का पेट दर्द ठीक हुआ तो उसने कहा कि भैया और पापा नहीं आ पायेंगे, आप अपने पापा को भेज दीजिये, मुझे ससुराल ले चलें, यहां 40 किलोमीटर तक न अस्पताल है, न घर में कोई भी ले जाने वाला
मनीश — हां पापा को मैने बोला है, वो आज ही जाते, पर जा नहीं पाये, पर कल जायेंगे, चलो ठीक है अपना ख्याल रखो
अगली सुबह काजल के ससुर रामलाल बाइक लेकर घर से निकले, लेकिन गांव की पुलिया पर ही पुलिस ने डांट फटकार कर वापस भेजना शुरू कर दिया।
अरे साहब — बहू को लाना है, वहां कोई नहीं है
कुछ नहीं है, तुम जाओ, वहां सब हो जायेगा, हर जगह सुविधा मिलेगी
सड़क पर लोगों को पिटता देखकर रामलाल वापस लौट आये और फिर बेटे को फोन करके पूरी बात बताई। बेटे ने अगले दिन पिता को सुबह 6 बजे ही जाने को कहा। लेकिन, हाय री किस्मत फिर से पुलिस ने रामलाल को पकड़ लिया और कड़े शब्दों में फटकार कर वापस कर दिया।
पुलिस — बाबा लॉकडाउन है, क्यों रिश्तेदारी के चक्कर में पडे हो, जिंदा रहोगे तब तो कहीं जाओगे, जाओं वहां सबकुछ हो जायेगा। सीधा साधा रामलाल, ज्यादा कुछ बोल भी नहीं सका, यह भी नहीं बता पा रहा था कि बहू को मेडिकल इमरजेंसी है और वापस लौट आया।
उधर मनीश की तबीयत अचानक और बिगडती गयी। फैक्ट्री का मालिक भी सबको छोडकर अपने घर में कैद था और मालिक का मोबाइल नंबर भी उसके पास नहीं था। जो पैसे थे, उसने पत्नी के इलाज के लिये गांव भेज दिये थे। उसने तय किया कि वह कल ही घर वापस जायेगा। लेकिन, किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था, अगले ही दिन ट्रेन बंद करने की घोषणा हो गयी।
काजल का फोन पहुंचा तो मनीश ने बताया कि सबकुछ बंद हो गया है, कहीं नहीं निकल सकता। जवाब में काजल ने भी बताया कि पापा और भैया भी नहीं आ पायेंगे। अब मैं क्या करूं। यह बोलते बोलते कागल का गला भर आया था, यहां तो कोई अस्पताल भी नहीं है। रोज दर्द होता है तो दवा तक नहीं मिलती। मैं क्या करूं। काजल बिलख पड़ी थी और आंसू बहकर नीचे आने लगे थे। असहाय सा होकर मनीश भी अपने आंसुओं को छिपाने का नाकाम प्रयास करता रहा। अचानक मां सामने आ गयी तो काजल ने खुद को संभाला। लेकिन, मां से भला क्या छुपता है। आंसू पोछते हुये मां बेटी के पास में ही बैठकर सिर पर दुलार करने लगी। यह ऐसे हालात थे कि ससुराल से कोई काजल को लेने के लिये नहीं आ पा रहा था और किसी भी समय काजल की डिलविरी हो सकती थी।
27 मार्च की सुबह काजल को हल्का हल्का पेट में दर्द शुरू हुआ और बढने लगा। फोन पर हर किसी को खबर मिल चुकी थी। लेकिन, जो जहां था वहीं, कैद था। मां कभी गर्म पानी, कभी पोछा, कभी पंखा करती और बेटी को दिलाशा देती और मन ही मन ईश्वर से लड़ रही थी कि आखिर तू यह कौन सा दिन हम गरीबों को दिखा रहा है।
मनीश ने दोस्त को फोन करके कहा लगता है मैं यहीं मर जाउंगा। कोई मदद करने वाला नहीं। वहां, पत्नी को लाने के लिये पुलिस जाने नहीं दे रहीं। यहां से मैं आ सकता नहीं। घर में काजल के पास कोई नहीं है, न आस पास 20 किलोमीटर तक कोई अस्पताल है, न ही कोई पैसे का जुगाड़। अगर, काजल घर नहीं पहुंची तो, कुछ अनहोनी न हो जाये। मनीश अपने आंसू के साथ ही अपने जज्बात बहा रहा था। काजल का माइका बांदा जिले में था और उसकी ससुराल चित्रकूट में थी और दो जिले की सीमा को इस लाकडाउन में पार करना तो चंबल के डकैतों के बस का नहीं था, ये तो भला रामलाल ही था।
रात लगभग 11 बजे किसी तरह खबर डीआईजी चित्रकूट दीपक कुमार तक पहुंच गयी। पता चला कि एक महिला को डिलिवरी होनी है, लेकिन उसके पास कोई नहीं है। वह ससुराल आना चाहती है, लेकिन न कोई वाहन चल रहा है और न ही कोई वहां तक जा सकता है। डीआईजी साहब ने अपने फोन पर उंगलियां घुमाई और कुछ ही देर में पुलिस हरकत में आ चुकी थी। दोनों जिलों में आदेश पहुंच चुका था कि हर हाल में चंद घंटों में काजल अपनी ससुराल में होनी चाहिये। शनिवार को दिन में लगभग 10 बजे फतेहगंज पुलिस काजल के गांव रमजूपुर पहुंच चुकी थी। गांव में पुलिस टीम के दाखिल होते ही पूरे गांव में हड़कंप था, आखिर क्या हो गया है ? लोग घरों से बाहर झांक रहे थे और आखिर तक नजर गडाये थे कि आखिर पुलिस कहां जा रही है।
पुलिस ने दरवजा खटखटाया तो सामने से काजल ही दरवाजे पर आई।
पुलिस को देखकर आमतौर पर कोई चहकता नहीं, लेकिन काजल चहक उठी थी, क्योंकि उसे फोन पर ही सूचना दे दी गयी थी कि उसे पुलिस उसकी ससुराल पहुंचायेगी। उसकी आंखों के कोने आंसू से भरे थे, पर यह खुशी के आंसू थे। चंद मिनटों में वह तैयार होकर अपने ससुराल चल दी थी। उसके कदम जैसै जैसे जमीन पर पड़ रहे थे, हर बार पुलिस के लिये दुवाएं निकल रही थी। देखने वालों के जेहन में पुलिस का यह रूप अविस्मरणीय था, उनके दिल से जय हिंद की गूंज ही सुनाई पड़ रही थी। परिजनों की आंखों कृतज्ञता का जो भाव उभरा लगा कि दुनिया में इससे अनमोल तो कुछ है नहीं। गेट खुला और काजल गाड़ी में बैठ तो आंसुओं के कुछ बूंद गिर पडे, वह हर वर्दी में अपनी सुरक्षा और स्नेह की मूर्ति देख रही थी...फतेहगंज थाने के हेड कांस्टेबल दयाराम जी एक भाई की तरह अब साथ थे और.कुछ घंटे में काजल अपनी ससुराल में थी और आंसुओं के साथ मंद आवाज में अपनी सास से लिपट चुकी थी। हर तरफ आंसुओं का सैलाब था, छोटे बच्चे काजल से लिपट गये थे, यह आंसू खुशी के थे, जो यूपी पुलिस के जरिये आये थे... काजल ससुराल में थी, लेकिन दरवाजे की दरार से बाहर अपने वर्दी वाले भाई को छलकती आंखों के झरोखों से देख रही थी, जो आज उसके पिता भी थे और भाई भी।

फिलहाल लॉक डाउन में बाहर निकलना जरूरी नहीं, जरूरी है पुलिस पर भरोसा जताना। आप भरोसा तो करिये, पुलिस आपके साथ वैसे ही खडी होगी, जैेसे आपके अपने।