fathers day special: कौन कहता है नही हो तुम...

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22nd June, 2020, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। आज पितृ दिवस है,हमारे जन्मदाता,हमारे पिता के प्रति आभार व्यक्त करने का एक नियत दिवस। ये सच है कि मात-पिता का ऋण कभी नही चुकाया जा सकता।पर जब एक जन्मदाता अपने कलेजे के टुकड़े को,अपनी पारी,अपनी लाडो,अपनी गुड़िया को किसी दूसरे के घर भेजता है।तो उस लाडो को एक और पिता मिल जाता है...उसके ससुर जी के रूप में और आज पितृ दिवस पर मैं अपने उस पिता के प्रति अपना असीम प्रेम समर्पित कर रही हूँ कविता के माध्यम से...जिन्होंने मुझे जन्म नही दिया,पर पिता से अधिक प्रेम दिया,मेरे सबसे अच्छे मित्र बने।आज लगभग 3 वर्ष हो गए ...वो हमें छोड़ कर चले गए।पर अभी भी ह्रदय में हैं ...आज भी उनकी तस्वीर के सामने बैठ अपना मन हल्का कर लेती हूँ...अपना दुख-सुख बांट लेती हूँ।

उन्हीं को समर्पित मेरे भाव....

कौन कहता है नही हो तुम...

कहने को तो जा चुके हो आप,

दुनिया से दूर

शायद.... 

अनंत-असीम आकाश में,

शायद... 

ब्रह्मांड के हर कण-कण में,

पर कौन कहता है? 

कि नही हो आप...

आप आज भी हो...

मेरी हर दर्द भरी सांस में,

मेरे आहत उच्छ्वास में,

आप ही तो हो.... 

जो मेरे नयनों से

बरबस बरसने लगते हो,  

भावों की बरसात बन कर

आप ही तो हो.... 

जो मेरे लबों की मुस्कान बन,

मेरे मन में

अपनी यादों के मीठे-सुनहरे मौसम बन,  

मेरे तन मन को सुवासित कर जाते हो

कभी-कभी लगता है.... 

मेरे अस्तित्व को 

यूँ ढाँप लेते हो आप

ज्यों, 

बादल घिर आते हैं पर्वतों पर

जहां भी चली जाऊं मैं

हर पथ, हर डगर पर

आप ही संग-संग चलते नज़र आते हो

कभी कभी आपको पा लेती हूँ..

किसी की मुस्कुराहट में,

तो कभी किसी शब्द की गूंज बन कर कानों में,

अपने होने का एहसास कराते हो

हाँ.... 

आपको देख पाती हूँ मैं

जब अपनों के बीच अपनी प्रतिछाया दिखलाते हो आप

किसी की हंसी में,

किसी की छवि में,

किसी के विचारों में 

हाँ....

एक दिन भी ऐसा नही गुज़रता,

जब मन के नील गगन में....

आपकी यादों के पंछी 

फड़फड़ाते न हों,

जब सोच की धरा पर...

आपके असीम प्रेम के घन  बरसते न हों,

हां ...

मुक्त नही हो पाता मेरा अस्तित्व 

हाँ....

मुक्त नही हो पाता मेरा मस्तिष्क..

आपके एहसास से, 

आपकी याद से,

शायद मैं भी..... 

कभी मुक्त नही होना चाहती....

इनपुट: मीनाक्षी मोहन 'मीता'