बिगड़े रिश्ते....

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4th July, 2020, Edited by Focus24 team

चलो नींद से अठखेलियाँ करें हम तुम ख़ामोशियाँ तोड़ें
बीते हुए कल को सहेजते हैं फिर से शब्दों को बीजते हैं

ग़म ए अतीत को भुलाते हैं ज़ख़्मों की तुरपन करते हैं
जीवन गीत दोहराते हैं जीने का फिर करीना सीखते हैं

अंतर्मन की आँखों से फिर सपनों का खेत जोतते हैं
शब्दों के घने जंगल में इक दूजे को सुनते सुनाते हैं

चलो फिर ख़्वाबों के क़ाफ़िले में इक रात गुज़ारते हैं
बाग़ों में तितलियाँ दबोच दरिया में मछली दौड़ाते हैं

बाँहों के भवंर में डूब जाये सबकुछ भूला के एक हो जाये
पर तेरे दिल में उल्फत नहीं अपनों कि तुझे चाहत ही नहीं

चलो अल्हदा हो जाये सन्नाटे में न तुम तड़पो न मैं तड़पूँ
हम स्वयं से सत्य बोले जहान से दूर चलते हैं अलविदा !!

शबनम मेहरोत्रा, कानपुर सिटी।