प्रेरणादयी बेटियां : दादी ने कहा मैं तेरी सरकारी गाड़ी से चलूंगी दफ्तर और अब एसडीएम बन गयी मीनाक्षी

Slider 1
Slider 1
Slider 1
« »
12th October, 2019, Edited by manish shukla

 

इलाहाबाद / प्रयागराज : पीसीएस 2017 की परीक्षा में ओवरआल तीसरी रैंक हासिल करने वाली मिनाक्षी पाण्डेय की कहानी बेहद ही प्रेरणादायी है। कभी ना हार मानने वाली मीनाक्षी के लिये उनकी दादी बेहद ही प्रेराणादायी रही। जो उनसे जिद पाले हुये थी कि एक दिन तेरी सरकारी गाड़ी से ही तेरे दफ्तर जाउंगी। लेकिन, जब दादी इस दुनिया में नहीं रही तो मिनाक्षी ने दादी के सपने को पूरा करने का ऐसा संकल्प किया कि आज वह एसडीएम बन गयी हैं। मिनाक्षी कहती हैं कि उनकी दादी तो आज जिंदा नहीं हैं, लेकिन उनके सपने आज भी जिंदा हैं और उस सपने को मैं पूरा कर सकी, यह मेरे लिये दादी को श्रद्धांजलि है।

तहसीलदार से बनी एसडीएम
प्रयागराज जिले में बतौर तहसीलदार तैनात मिनाक्षी का जन्म प्रतापगढ के लालगंज के तेजगढ़ कमौरा गांव में हुआ। बाद में इनका परिवार शहर के सदर बाजार में बेल्हा देवी रोड पर रहने लगा।  पिता राजनारायण पांडेय मंडी पर्यवेक्षक मिर्जापुर के पद से रिटायर हैं। मिनाक्षी चार भाई बहनों से सबसे बड़ी बेटी हैं और बडी होने के कारण उन पर सबसे अधिक जिम्मेदारी और उम्मीदें थी। मिनाक्षी को उनकी दादी विमला पांडेय हमेशा अफसर बनने के लिये प्रेरित करती थी। मिनाक्षी  की प्राथमिक शिक्षा अजीतनगर के सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। इसके बाद  इंटर जीजीआईसी से पास किया, जबकि स्नातक शहर के एमडीपीजी कालेज से किया और अंग्रेजी साहित्य से परास्नातक इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया। इसके बाद वह सिविल की तैयारी के लिये दिल्ली चली गयी। 2016 पीसीएस में मिनाक्षी का चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ तो वह ट्रेनिंग कर प्रयागराज में तैनात हुई हैं। वहीं, अब मीनाक्षी ने प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर एसडीएम की पोस्ट हासिल की है। मीनाक्षी का यह पांचवा प्रयास था। मिनाक्षी अपनी दादी को याद करते हुये बताती हैं कि उनकी दादी हमेशा कहती थी कि एक दिन वह उसकी सरकारी गाड़ी से उनके दफ्तर जायेंगी, आज दादी तो नहीं हैं, लेकिन उनका आशिर्वाद मेरे साथ था और यह मेरी ताकत का हिस्सा है।  

क्या कहती हैं मिनाक्षी
मिनाक्षी कहती हैं कि अगर आपने अपना लक्ष्य तय कर लिया है कि आपको क्या करना है, तो बस जरूरत है उस लक्ष्य को पाने के लिये प्रयास करने की। यह निश्चित है कि अगर आपने पूरी ईमानदारी से लक्ष्य के प्रति मेहनत की तो किस्मत कभी आपके आड़े नहीं आयेगी। क्योंकि बहुत से लोगों की उम्मीदें, माता पिता के सपने, उनका आशिर्वाद सब आपके साथ होता है। मिनाक्षी युवाओं को संदेश देते हुये कहती है कि हर दिन आपका एक रूटीन होना चाहिये कि पढ़ाई करनी है। बहुत अधिक पढने की बजाय जितना पढे वह अच्छी तरह से आत्मसात करके पढें, विजय निश्चित होगी।