छठ महापर्व:  कह देब त लाग जाइ भक्क से...

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26th October, 2019, Edited by Shikha singh

फीचर्स डेस्क। हं, त ! छठ में अब दिने केतना बचा है, पनरहो दिन त नही है।टिकटवा हुआ कि नही??, आ छोड़ो मरदे टिकटवा नही भी हुआ है त का हुआ, तुमको त आदत हइए है। टिकट वेटिंग हो चाहे कन्फर्म...आ चाहे बिना हिले डुले जेनरल डिबवा में अखबारों बिछा के बैठना हो। छठ में त जरुरे जाना है।आ जाना भी चाहिए आखिर इहे तो एगो परब है जोन में तुम्हारा "बिहारी दिल" अभियो धड़कता है, न ही तो जाने कहिए तोहार जेहन से बरहम बाबा या बन्नी दाई जइसन केतना ग्राम देवता आ कुल देवता लोग बिला गया।

सच्चों कहते हैं, हांका पार लीजिये आ पूछ लीजिये ई नवका जनेरेसनवा से की उसका ग्राम आ कुल देवता कौन है, सरकार 100 में से 90 लोग नही बता पायेगा। काहे की जे है से उनका ब्रांडिंग नही हुआ है न, विदेशी बाजार में।उ सब त गाँव आ घर के एगो कोना में बैठने के लिए हैं खाली। जहाँ बबुआ जी कहियो कहियो जाएंगे तो लाजे लिहाजे मुड़ी ग़ार गोड़ लग लेंगे।

बिहार के छठ का ब्रांडिंग हो गया है देश विदेश में लोग इसको जान गया है, आ जानते है "ब्लिसफुल्ल बिहार" वाला पर्यटन विभाग भी इसको खूब भन्जा रहा है। काहे की इहे त वक्त है जब देशी विदेशी सब मुद्रा आता रहा है, नही तो बिहार का पलायन तो जग जाहिर है।कहियो सोचे हैं पलायन के नाम पर कुछो नही करे वाला सरकार, ई छठ के नाम पे हेतना वेटिंग वाला होर्डिंग काहे लगाता है जगहे जगह।

छठ का एके चीज है जो हमको खूब बढ़िया लगता है उ है उसका साफ सफाई । सरकार से लेके आम आदमी तक सब के सब स्वच्छता का अंबेसडर बन जाता है। भले साल भर बजबजाये नदी- नाहर, ओकर घाट- मोहान लेकिन का फरक पड़ता है महाराज।काहे की हमरे लिए हमरी नदी खाली नदी थोरवे है जिसको रोज रोज साफ करियेगा, इ त पुजने वाली देवी है, आ इनके पुजाइ त तबे न होगा जब इनकर परब आएगा,त जब जब छठ तब तब सफाई, न त का जरूरत भाई।बाकी साल भर त फ्री का सुलभ शौचालय है उ सब, जाइये खूब खुला हवा मे हगिये मुतिये। बस छठ के समय बन जाइये, ललका चुनरिया वाला गमछी के मुरेठा बन्हले घाट अगोरे वाला।न त जी हम त उ हैं जो अपना घरे का भी कचड़ा रोडे पर फेंके, ई त खाली छठ के छव दिन परवैतिन घूमती है एह से गलियां बहरना भी बड़ी जरूरी है।

आपको मालूम है कि छठ शुरू करने वाले कृष्ण पौत्र साम्ब महाराज बिहार मे भी सूर्य मंदिर बनाये थे जहाँ आज तक माई आजी लोग छठ करते आयी है।पर जानते हैं कोणार्क का उ सूर्य मंदिर जादे फेमस है जहाँ कहियो न तो सूर्य महाराज न छठी मइया पुजाइ हैं।ओहपे सोने पे सुहागा ई है कि वहाँ बने संग्रहालय के संकलन में दुनिया भर के सूर्य मन्दिर में से एको बिहार का सूर्य मंदिर नही है।विश्वाश न हो तो नीचे वाला फोटू सब देखिये,वही से लिये थे।हमरा जइसन केतना बिहारी गये होंगे हुआ आ अपना एको मंदिर न पाके मुँह लटकाए होंगे।काहे की दुनिया के लिए छठ माने तो बिहारे न होता है जी।

अब छोड़िए केतना कहे, हमहू चले शारदा सिन्हा जी के सुने! काहे की छठ के इहे कुछ दिन न ओकरा बाद त खाली भोजपुरी गीत के नाम पे खाली छोटू छलिया आ खेसाडी लाल जइसन लोग ही बजेगा न।आ बाकी त जे है से हइए है।

कंटेन्ट सोर्स : विजया एस कुमार, आरा, विहार।