स्पेशल स्टोरी : सोनल शर्मा ने असंभव को संभव कर दिखाया, पढ़ें क्या है इनकी कहानी

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9th January, 2021, Edited by NEHA GOSWAMI

फीचर्स डेस्क। कहते हैं कि दिल मे कुछ कर गुजरने की शिद्दत हो ,हौसला हो,और सच्ची चाहत हो तो नामुमकिन कुछ भी नही है।तब न गरीबी आड़े आती है और न ही जीवन मे आने वाली बाधाएं ।जीवन मे उतार चढ़ाव तो आते ही रहते हैं लेकिन उन उतारचढ़ाव को पार कर के अपनी मंज़िल तक पहुचने वाले को ही असली बाजीगर कहते हैं।और वो बाजीगर कोई और नही हम सभी महिलाओं की प्रेरणा 26 वर्षीय सोनल शर्मा हैं।आइये जानते हैं इनके संघर्ष की कहानी।

26 वर्षीय लड़की के जज्बे को सलाम

कहते हैं कि काबलियत पैसों की मोहोताज नही होती है।और इस बात को सार्थक कर दिखाया है राजस्थान में रहने वाली सोनल शर्मा ने जो कि एक दूध बेचने वाले कि बेटी है।जिसने घर मे गरीबी ,फाइनेंशियल तंगी देखी है।लेकिन कभी ये नही सोचा की यही जीवन मेरी नियति है।सोनल शर्मा ने अपने ही भाग्य से जंग की ।और अपनी काबलियत के बल पर राजस्थान न्यायिक सेवा की परीक्षा पास कर जज बनने जा रही हैं।और ये ओहदा उनने ऐसे ही प्राप्त नही किया ।इन्होंने बहुत मेहनत की और 2017 में मात्र 3 नंबर्स से असफल भी रहीं।दूसरी बार उनने फिर पूरी तैयारी के साथ एग्जाम दिया लेकिन फिर वो मात्र 1 नंबर्स से असफल हो गईं।लेकिन फिर भी इन्होंने हिम्मत नही हारी ।और जीवन ने एक चमत्कारिक मोड़ लिया।एग्जाम का रिजल्ट 2019 में अनाउंस किये गए।1 नंबर कम होने की वजह से उनका नाम वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया।लेकिन उनकी किस्मत तब चमकी जब न्यायिक सेवा में चुने हुए उम्मीदवारों ने भाग नही लिया ।और सरकार ने आर्डर दिए कि वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों की भर्ती को पूरा किया जाए।और उनकी मेहनत और लगन से वो अपनी मंजिल तक पहुँच पाईं।सोनल शर्मा के इस ज़ज्बे को हम महिलाएं सलाम करती हैं।

न्यायिक सेवा में चयनित होना गर्व की बात

सोनल शर्मा का न्यायिक सेवा में चयनित होना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात थी क्योंकि एक गरीब आदमी ने ऐसा सपना ही नही देखा होता कि उसकी बेटी जज की कुर्सी में कभी बैठेगी।जिसने जीवन मे गरीबी और अपमान झेला हो वो ऐसी बात शायद सोच भी नही सकता लेकिन जिनके घर मे सोनल शर्मा जैसी लड़कियाँ पैदा होती हैं वो खुद तो सपने देखती ही हैं और अपने परिवार को भी सपने देखने और उसे पूरा करने का जज्बा रखती हैं।1 नंबर कम होने के बाद भी उनने हार नही मानी और अपनी ही किस्मत से लडीं और जज की कुर्सी में बैठ कर न्याय करने का संकल्प भी लिया।तभी कहते हैं कि जीवन मे पोजिटीवीटी का होना बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट है।

दूध वाले कि बेटी होने पर आती थी शर्म

सोनल शर्मा के पिता दूध बेच कर अपना घर चलाते थे ।वो भी अपने पिता के साथ दूध बेचने जाया करती थी। उनके पिता को लोग अक्सर बिना किसी बात पर डांटते थे। उनका अपमान करते थे ।ये देख कर सोनल शर्मा को बहुत बुरा लगता था उनको शर्म आती थी ।लेकिन उनके पिता सबकी डांट खा कर और अपमानित हो कर भी हमेशा मुस्कुराते रहते थे। एक बार जब वो अपने पिता के साथ दूध बेच कर आईं तो घर आ कर उनने अपनी माँ से कहा कि अब मै पापा के साथ दूध बेचने नही जाउंगी।उनकी माँ के रीजन पूछने पर उनने कहा कि मुझे शर्म आती है ।पापा को सब बेवजह ही डांटते हैं।लेकिन फिर भी पापा हमेशा मुस्कुराते रहते हैं। मुझसे उनका ये अपमान होते नही देखा जाता।इसलिए मैं अब पापा के साथ नही जाउंगी ।लेकिन वही पिता जो सबकी डांट खाने के बाद भी मुस्कुराते रहते थे उनकी जीवन भर की तपस्या रंग लाई ।और उनके माता पता के त्याग और बलिदान के कारण ही सोनल शर्मा न्यायिक सेवा में पास हो कर जज की कुर्सी में बैठ पाईं।

बाधाएं न रोक पाईं मंजिल तक जाने में

सोनल शर्मा कॉलेज साइकिल से जाया करती थी और कॉलेज की लाइब्रेरी में बुक्स इशू कर के पढ़ा करती थी और घर पर तेल के डिब्बों की टेबल बना कर पढ़ा करती थी। उनकी चप्पलें भी ज्यादातर गाय के गोबर से सनी रहती थी।वो पढ़ाई के साथ साथ घर के कामों में अपनी माँ का हाथ बटाती थी और पिता के साथ भी दूध बेचने जाती थी।पिता के अपमान से उनको बहुत दुख होता था और मन मे निगेटिविटी भी आती थी लेकिन कहते हैं कि किसी चीज को पाने की अगर सच्ची शिद्दत हो तो पूरी कायनात तुमको उससे मिलने में लग जाती है।सारी मुश्किल और बाधाएं पार करने के बाद वो अपनी मंजिल न्यायिक सेवा में उत्तीर्ण हो कर जज  बन पाईं और अपने माता पिता को उस अपमानजनक जीवन से निकाल पाईं।ऐसी बेटियों को हमारा शत शत प्रणाम।

पिता के जीवन की तपस्या को किया साकार  

इनके पिता ख्यालीलाल शर्मा रोज घर घर जा कर दूध बेच करते थे। 3 लड़कियों और 1 लड़के को बड़ी मुश्किल हालातों में परवरिश कर पाते थे। और उनके पिता का मानना था कि उनकी और उनकी बेटी की तन मन से गायों की सेवा का ही ये प्रताप है।उनके पिता का मानना है कि जिस ईमानदारी के साथ वो जीवन भर काम करते रहे उसी ईमानदारी के साथ सोनल भी जज की कुर्सी में बैठ कर लोगों का न्याय करें।सोनल ने कभी भी कोई कोचिंग नही की।क्योकि उनके घर के ऐसे हालात नही थे कि वो कोचिंग कर पाएं। वो घर मे ही पढ़ती थी ।और इसमें साथ दिया उनके परिवार ने और खासकर उनके पिता ने।आज सोनल का कहना है कि मेरे पिता की तपस्या सफल रही।

सोनल हम महिलाओं की प्रेरणा

सोनल हम महिलाओं की प्रेरणा हैं क्योंकि वो एक गरीब परिवार की हो के और एक महिला हो के भी  उनने कभी अपने सपनो को नही छोड़ा न ही अपनी गरीबी को अपनी मंजिल का रोड़ा बन दिया और न ही होने वाली असफलताओं से ये घबराईं ।इन्होंने कभी भी हौसला नही हारा  जिनमे हौसला मजबूत होता है। वही नया इतिहास रचने का दम रखता है।

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