गोला गुरु का गणित : आशुतोष राणा 

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4th January, 2020, Edited by manish shukla

फीचर्स डेस्क। गोला और भोला बहुत अच्छे मतलब एकदम पक्के दोस्त थे, उनके बीच की आत्मीयता को समझने के लिए आप ये कह सकते हैं की They are brother from other mother.  गोला स्कूल टीचर थे, संविदा वाले नही ‘स्थाई’। किंतु स्थाई नौकरी के बाद भी वे स्कूल में ‘अस्थाई रूप’ से पाए जाते कभी-कभार घूमते हुए स्कूल पहुँच जाते। गोला गणित के गुरु थे, गणित सिखाने से लेकर गणित बिठाने और जमाने में मास्टर थे। 

दूसरी तरफ़ भोला थे, वे व्यापारी होने के साथ-साथ गाँव की राजनीति में सबसे बड़ा नाम थे।  जहाँ गोला स्वास्थ्य को लेकर सजग थे वहीं भोला सम्पत्ति को लेकर चौकन्ने। किंतु गोला गुरु का भोला के प्रति इतना प्रेम था कि चाहे कुछ भी हो जाए गोला प्रतिदिन सुबह भोला को ज़बरदस्ती योगाभ्यास करवाते और उसी दौरान जीवन के कुछ गूढ़तम रहस्यों पर से पर्दा भी उठा देते, आज सुबह गोला जब भोला को कपाल भाती की क्रिया करवा रहे थे तो भोला बोले- गुरु कपाल में शांति नही है, इसलिए कसरत भाती नही है और आप कपाल भाती करवा रहे हैं ? 

गोला ने पूछा- का हो गया ? 

भोला- ऐकानामी ( इकॉनमी ) की हालत भोत ख़राब है।

गोला- कौन की ऐकानामी ख़राब है, तुमाई ( तुम्हारी ) की देश की ? 

भोला- देश की। असल में चुनाव भी आजकल बहुत महँगे हो गए, उससे भी हालत ख़राब होती है। 

गोला- कौन की हालत, तुमाई की देश की ? 
भोला- हमाइ। उसखों सुधरना चाहिए। 

गोला- किसखों सुधरना चाहिए, तुम्हे या देश खों ? 
भोला- ऐकानामी खों। 

गोला- किसकी ऐकानामी ? तुमाई या देश की ? 
भोला- हमाइ। 

गोला गुरु ने कपाल भाती पर विराम लगाया और अनुलोम विलोम करते हुए बोले- उसमें कोई बड़ी बात नही है। 

भोला- अरे कैसे बड़ी बात नही है ? ये तुम्हारी बंधी बंधाई नौकरी तो है नही की चाहे स्कूल जाओ या ना जाओ तनख़्वाह घर पहुँच ही जाती है.. ये व्यापार है गुरु।

गोला- गणित का सामान्य नियम अप्लाई करो ऐकानामी पट्ट से ठीक हो जाएगी। 
भोला- कौन सा नियम ? 

गोला बोले- 
का करके पुनि भाग कर, 
फिर गुण लेऊ सुजान। 
ता पीछे धन ऋण करो, 
भिन्न रीति यह जान॥ 

भोला- हम समझे नही गुरु, इस नियम को आप ज़रा विस्तार से समझाइए.. 

गोला- सबसे पहले इस सूत्र में तुम ‘का’ की जगह ‘खा’ करो .. तो क्या हो जाएगा ? खा करके पुनी भाग कर। पुनी का अर्थ है ‘फिर’ और भाग मतलब ‘भागना’ .. 
तो इस पूरी लाइन का मतलब हुआ कि तुम क़र्ज़ा लो, उसे खा जाओ फिर भाग जाओ। 
अब दूसरी पंक्ति- फिर गुण लेऊ सुजान। जिसका मतलब है- क़र्ज़ा खा कर भागने वाले आदमी को दुनिया गुणी और सुजान, मतलब चतुर मानती है। तो प्रयास करके तुम इसका प्रचार करो की तुमने क़र्ज़ा लिया था, तुमको लोग क़र्ज़ा देते हैं ये बात तुमको दुनिया में एक बड़े और महत्वपूर्ण व्यक्ति का रुतबा दिलाएगी। 
अब तीसरी लाइन में बड़ी महत्वपूर्ण बात कही गई है- ता पीछे धन ऋण करो। मतलब ? 

भोला- आप खोल रहे हो तो पूरी आप ही खोलो। 

गोला- मतलब सिर्फ़ इतने पर ही मत रुको इसे बाद भी तुम और धन का ऋण लो। 
भिन्न रीति यह जान- ये ऐकानामी सुधारने की भिन्न रीति है। तो इस सूत्र का पालन करने से तुम्हारी ख़ुद की ऐकानामी सुधर जाएगी और तुम्हारी सुधरी तो देश की अपने आप सुधर जाएगी, क्योंकि व्यक्ति ही देश के इकाई होता है। 

इसलिए तुम अपने बच्चों को गणित सिखाओ या ना सिखाओ लेकिन इस मंत्र को घुट्टी में घोंट के पिला दो। याद रखो भोला, क़र्ज़ा लेने की चीज़ है देने की नही। भोला, अब हम एक कल्याणकारी श्लोक बोलेंगे तुम उसको हमारे साथ दोहराओ। 

उधार ही उद्धार है, उधार से व्यापार है। 
उधार में सब शक्तियाँ, उधार बेड़ापार है॥ 

उधार की ही रेल है, उधार से ही मेल है। 
उधार ले और पेल दे, उधार तो एक खेल है॥ 

उधार सबसे है बड़ा, उधार सब पर है चढ़ा। 
उधार की ही ज़िंदगी, उधार पर तू है खड़ा॥ 

उधार को स्वीकार कर, और फिर हुंकार भर। 
उधार की सब रोटियाँ, खा के तू डकार भर॥ 

लेखक
आशुतोष राणा 
जानेमाने फिल्म अभिनेता, लेखक, आध्यात्मिक ​चिंतक है। 
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