समाजसेवा के क्षेत्र में आशा राय को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

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21st January, 2020, Edited by Focus24 team

जयपुर सिटी। समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाली लखनऊ सिटी समाजसेविका आशा राय को भव्या इंटरनेशनल और एन. आर. बी. फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। पिंक सिटी जयपुर में 19 जनवरी को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मैत्री सम्मलेन व विविधता में एकता सम्मान -2020 के दौरान यह पुरस्कार उन्हें प्रदान किया गया। तालियों की गड़गड़ाहट और देश दुनिया की तमाम बड़ी सख्शियत के बीच आशा राय ने मंच से अपनी इस उपलब्धि पर सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि जब तक शरीर में दान करने लायक खून था, मानवता को जीवन स​मर्पित रखा और अब उम्र के हिसाब से रक्त दान तो नहीं कर सकती, लेकिन अपनी मृत्यु के बाद वह देहदान कर अपना पूरा जीवन मानवता को भेंट करना चाहती हैं।  गौरतलब है कि श्रीमती आशा राय लंबे समय से समाजसेवा के कार्य में जुड़ी हुई हैं और 26 बार रक्तदान कर वह चर्चा में आयी थी। आशा राय को उनके सामाजिक कार्यों को देखते हुये ही इस पुरस्कार के लिये चुना गया था। 

सम्मेलन में जुटी दुनियाभर की सख्शियत 

भव्या इंटरनेशनल और एन. आर. बी. फाउंडेशन के बैनर तलेजयपुर में 19 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मैत्री सम्मलेन और विविधता में एकता सम्मान -2020 के आयोजन में शिरकत करने के लिये देश दुनिया की कयी बड़ी सख्शियत ने हिस्सा लिया था। जिसमें साहित्य, कला,समाजसेवा, शिक्षा, फैशन, ज्योतिष, कृषि, नृत्य ,संगीत, मीडिया, पत्रकारिता, मेडिकल, साइंटिस्ट व् अन्य क्षेत्र के चर्चित चेहरे कार्यक्रम का हिस्सा बनने पहुंचे थे। इस दौरान विविधता में एकता राष्ट्रीय पुरस्कार के अलग अलग कैटेगरी में चुने गये लोगों को सम्मानित किया गया और उन्हें समाज के लिये इसी तरह बेहतर कार्य करने के लिये प्रोत्साहित किया गया। मीडिया से बातचीत करते हुये आयोजक मंडल की डा निशा माथुर ने बताया कि जीवन में विशिष्ट कार्य से मानवता की रक्षा कर रहे और समाज को नई दिशा दे रहे इन सख्शियत को सम्मानित करना स्वयं में गौरवान्वित होना है। सभी को बहुत बधाई और शुभकामनाएं। 

26 बार किया रक्त दान 

विविधता में एकता सम्मान -2020 के राष्ट्रीय पुरस्कार को जीतने वाली आशा राय का जीवन बेहद ही साधारण लेकिन उनका व्यक्तित्व बहुत उंचा है। वह समाजसेवा के कार्य में कयी दशकों से जुड़ी हुई हैं और 1982 से पीसीफ़ में कार्य करते हुए वह सामाजिक कार्य में बढ चढ कर हिस्सा लेती रही। वह समाजसेवा के हर क्षेत्र में अपने तन मन धन से कार्य करती रही। यही कारण था कि वृद्धाश्रम से लेकर बालश्रम, दिव्यांगों व ग्रामीण क्षेत्रों में भी वह समाज से जुड़कर उसे नयी दिशा देने में कार्य करती रही। वह रक्तदान के लिये लंबे समय से जागरूकता का भी काम करती रही और स्वयं 26 बार वह रक्तदान कर चुकी हैं। जबकि लगातार वह रक्तदान कैंप का आयोजन करती रहती हैं। हर सप्ताह जरूरतमंदों को भोजन वितरण से लेकर उनके बीच जाना आशा राय की रूटीन का हिस्सा बन चुका है। 
आशा राय बताती हैं कि अब उम्र के हिसाब से वह रक्तदान तो नहीं कर सकती, लेकिन मैने अपनी मृत्यु के बाद देहदान कर दिया है। ताकि मेरे इस शरीर को भी मानवता के उपयोग में लाया जा सके।