नेह भरी पाती भाई के नाम

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5th August, 2020, Edited by Shikha singh

प्रिय अनुज ,

शत शत् आर्शीवाद

फीचर्स डेस्क।  टेक्नोलॉजी के दौर में चिट्ठी । यही सोच रहे हो न अनुज,,,

"अब कोई चिट्ठियां नहीं लिखता , हरकारे नहीं आते ।

बाबुल का संदेशा लेकर , पवन के झौंके नहीं आते ।"

मम्मी ने हमेशा रिश्तों और त्यौहारों को प्राथमिकता देना सिखाया। इसलिए रिमझिम फुहारों में सावन की कोथली लेकर तुम्हें भेजती रही ।ससुराल में जेठानियां ठिठोली करती_कोथली लेकर आ गया तेरा बाला सा बीर । और तुम चुलबुले कान्हा से मुस्कुरा देते । एक हथेली में पीहर का चांद दूसरी में प्रियतम का दिल । चांद वाली हथेली पर तुम अपना नाम ढूंढते । तीज गुजरते गुजरते राखी की आहट और मायके का आंगन फिर बचपन से गुलज़ार हो जाता । भाल पर तिलक , कलाई पर रक्षासूत्र और तुम्हारी लंबी उम्र की दुआएं । और हां हम बहनों का वो समधुर गीत_भैया मेरे , राखी के बंधन को निभाना.......

इस बार हालात जुदा है , न तुम आ पाए और न ही मेरा आना हो पाएगा।  हृदय में टीस औंर नयनों में नीर है पर तुम्हारी कलाई और दिल दोनों सूने न रहे । रिश्तों की चाशनी जुबां पर घुली रहे इसलिए तो राखी के साथ भेज रही हूं तुम्हें नेह भरी पाती। 

ना..ना...हंसना नहीं । 

देह से दूर हूं , दिल से नहीं । शायद ये पहला रक्षा बंधन है जब हम साथ नहीं ।पर स्नेह लिपटी राखी समय से भेज रही हूं । हम बहन भाई सुख दुख की राहों में एक दूसरे के पूरक बन , रिश्तों को जीवंत करते रहे । यही तो है त्योहारों के मायने । 

मां बाबा के लाडले हम बहनों के दुलारे भाई तुम सदैव स्वस्थ व मस्त रहो । कान्हा जी से यही प्रार्थना हैं। देखना जल्दी ही हम सब फिर साथ साथ वही बचपन , वहीं मस्तियां और रौनकें चेहरे देखेंगे______