वायु प्रदुषण बढ़ा रहा हैं सी.ओ.पी.डी मरीजों की संख्या, ऐसे मिल सकता है राहत !

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19th November, 2019, Edited by Focus24 team

हेल्थ डेस्क। विश्व सी.ओ.पी.डी दिवस (20 नवम्बर 2019) के उपलक्ष में मंगलवार को ब्रेथ ईजी कांफ्रेंस हाल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ टी.बी, एलर्जी, श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ एस. के पाठक ने बताया कि "विश्व सीओपीडी दिवस - क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में सीओपीडी देखभाल में सुधार करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह विश्वभर में स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और सीओपीडी रोगी समूहों के सहयोग से क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (गोल्ड) के लिए वैश्विक पहल द्वारा आयोजित किया जाता हैI उन्होने कहा कि "सीओपीडी को लगातार श्वसन लक्षण और श्वसन प्रवाह सीमा द्वारा पहचाना जाता है। यह आमतौर पर घातक कणों या गैसों के महत्वपूर्ण संपर्क द्वारा वायुमार्ग और कूपिकीय असामान्यताओं के कारण होता है। डॉ. पाठक ने सीओपीडी ज़ोखिम के कारक को स्पष्टता से समझाया जिसमे - तंबाकू के सक्रिय धुएं (धूम्रपान) के साथ-साथ तंबाकू के निष्क्रिय धुएं (निष्क्रिय धूम्रपान) से संपर्क में आना, घर के अंदर (आउटडोर) और घर के बाहर (इनडोर) प्रदूषण जैसे कि वायु प्रदूषण, जैव ईंधन और ताप (हीटिंग) से संपर्क में आना, व्यावसायिक धूल और रसायनों से संपर्क में आनाI

–"धूम्रपान करने वाले अस्थमा के रोगियों को सीओपीडी से पीड़ित होने का ज़ोखिम अधिक होता है। आयु- व्यक्ति में सीओपीडी के लक्षण समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होते है, आमतौर पर इसके लक्षण 35 से 40 वर्ष की अवस्था में दिखाई देते है।" डॉ. पाठक ने आगे बताया –"दुनिया भर में सीओपीडी से करीब 21 करोड़ लोग प्रभावित हैं और यह मृत्यु का चौथा कारण बनी हुई है I दुनियाभर में सीओपीडी से जितनी मृत्यु होती है, उसमें से एक चौथाई हिस्सा भारत का है. साल 2016 में सीओपीडी के 2 करोड़ 22 लाख रोगी थेI यह बीमारी समय के साथ गंभीर होती जाती है और कई बार यह जानलेवा तक हो सकती हैI

सीओपीडी ग्रस्त लोगों में सांस की नलियों में ब्लॉकेज होने या कम लचीले होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और यह उनमें बहुत आम समस्या है। ठंड के समय में सीओपीडी के मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में उन्हें पौष्टिक एवं ऊर्जा से भरपूर ऐसे आहार की जरूरत होती है, जो बायोएक्टिव कंपोनेंट से भरपूर हों और जिनमें एंटी-बायोटिक, एंटी-इंफ्लामेटरी एवं एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण हों, हालांकि, उन्हें अधिक कैलोरी नहीं दे सकतेI नमक की जगह पर हर्ब्स का प्रयोग करें, जैसे- काली मिर्च, पुदीना इत्यादि. सोडियम के साथ पोटैशियम को बैलेंस रखना जरूरी हैI

पोटैशियम के लिए टमाटर, केला, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि ले सकते हैं I सी.ओ.पी.डी मरीजों को चीनी से परहेज करना चाहिए और कार्बोहाइड्रेट को अपने आहार में शामिल करना चाहिए, जैसे- साबूत अनाज, छिलके वाली दाल, ओट्स, साग आदि I सीओपीडी में संतुलित आहार जरूरी हैं व साथ में हेल्दी फैट को भी शामिल करना चाहिए I डॉ. पाठक ने आगे बताया कि –" पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन - शिक्षा और व्यायाम का एक कार्यक्रम है जो सी.ओ.पी.डी मरीजों के सांस लेने की समस्या को प्रबंधित करने, आपकी सहनशक्ति (ऊर्जा) को बढ़ाने और सांस की कमी को कम करने में मदद करता है। डॉ. पाठक बताते हैं कि – "आज वायु प्रदूषण दुनिया की एक बड़ी  समस्या में से एक है। कई बीमारियों का कारण वायु प्रदूषण है। दमा, सीओपीडी, एलर्जी और फेफड़े की अन्य बीमारियों का मुख्य कारण वायु प्रदूषण ही हैं । विश्व स्वास्थ्य संगठन (वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) के अनुसार विश्व के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत के हैं। इनमें अपना बनारस - कानपुर और गाज़ियाबाद के बाद तीसरे सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट में है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ 20 लाख मौतें पर्यावरण प्रदूषण के कारण हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर 10 व्यक्तियों में से 9 व्यक्ति प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं। लगभग 42 लाख लोग वायु प्रदूषण की वजह से मौत के शिकार हुए और 38 लाख लोगों की मौत कुकिंग और प्रदूषित ईंधन के कारण हुई। भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 12 लाख मौतें होती हैं। यदि व्यापक रोकथाम न हुई तो यह आंकड़ा सन् 2050 तक 36 लाख मौतों को पार कर जाएगा।" डॉ. एस.के पाठक द्वारा किये गए एक शोध में ये पता चला कि, वाराणसी की खुली हवा में 2-3 घंटो चलने पर फेफड़ो की कार्य क्षमता में 10-15 प्रतिशत तक का गिरावट हो जाता हैं, जिसको वापस सही होने में काफी दिन लग जाते हैं I