आओ पधारो अयोध्या में श्रीराम...

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26th October, 2019, Edited by manish shukla

अमरीश मनीश शुक्ल
सरयू का घाट स्वर्ण अमृत में बदल चुका है।   दीपों की अखंड ज्योति हिंदू हृदय का जयघोष कर रही हैं। शंखनाद सैकडों योजन की करतल ध्वनि से धरती से अधर्म का विनाश करती प्रतीत हो रही है। धरती से आकाश तक मानों देवता, नाग मुनि, किन्नर, यक्ष, अप्सराएं अपने विभिन्न स्वरूपों में प्रकट होकर अयोध्या का स्वरूप बदल रहे हैं। आकाश में तारों से अधिक तारे सरयू के घाट पर टिमटिमा रहे हैं, मानों स्वर्ग पुन: धरती पर आ गया हो, मानों राम राज आने का शोर धरती के एक छोर से सुनाई पड़ रहा हो। जीव जंतुओं का शोर एक आध्यत्मिक उर्जा में परिवर्तित होकर मोक्ष की कामना के साथ ​दीपकों में विलीन हो रहा है। मंदिर की घंटे घड़ियाल की लयबद्ध ध्वनियां पृथ्वी के कष्टों का हरण कर रही हैं। अयोध्या के जिस दिव्य स्वरूप, जिस अलौकिक क्षण और आध्यत्मिक विशेषता की कल्पना कभी ऋषि-मुनि करते होंगे, आज वह एक बार फिर से जागृत होती नजर आ रही हैं।  सनातन संस्कृति के ध्वज वाहक मर्यादा पुरूषोत्तम रूम के 14 वर्ष के वनवास के बाद जिस हर्ष की अनुभूति से व्याकुल अयोध्या वासियों ने पूरे नगर को दीपों से प्रज्ज्वलति कर दिया था। कदाचित वही घडियां इतिहास में जैसे फिर दोहराई जा रही हैं।  आज भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य दीपोत्सव के अवसर जो विहंगम दृश्य दिखा उसकी कल्पना हर सनातनीधर्मी अवश्य करता रहा है। आज भगवान श्रीराम की अयोध्या दीपोत्सव से जगमगा रही है। इस दिव्य क्षण की कल्पना कभी ऋषि-मुनि करते होंगे और आज उसका प्रत्यक्ष दर्शन पूरी दुनिया कर रही है। घोर कलियुग की ओर बढ़ रही पृथ्वी पर प्रभु की यह लीला भी बखान करने से अधिक समझने योग्य है । दुनिया के हर सनातन धर्मावलम्बी के लिए अयोध्या उनकी पहचान है। दीपोत्सव का कार्यक्रम उसी पवित्र स्थल और उनकी मर्यादा की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा नजर आ रहा है।अयोध्या नगरी का कोना कोना श्रीराम के जाप और उनके आगमन को ऐसा बेचैन दिख रहा है, मानों हनुमान राम राम करके विचचिलत होते उन्हें ढूढ रहे हैं, मानों अहिरावण का वध करने के लिये वह दौड़े चले जा रहे हैं और राम की ध्वनि उनके मुख से गूंज रही है। मानो भैया भरत का अकाट्य प्रेम आज सागर सा होकर उछाले मार रहा है, मानों सरयू आज अपनी ममतत्व की छांव को पूरी दुनिया में दीपों की रोशनी से प्रज्जवलित कर देना चाहती हो। मैं तो स्वयं व्याकुल हूं अधीर हों, आओ श्रीराम अयोध्या में पधारों, आपके इंतजार में अब ये आंखें तरस रही हैं। 14 वर्षों का वनवास अब आखिरी क्षणों में व्याकुलता की पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है। अयोध्या का बच्चा बच्चा मां कौशल्ला सा टकटकी लगाये, तुम्हारी राह तक रहा है,  पूरी अयोध्या जगमगा रही है और "जय श्री राम" के उद्घोषों से गुंजित है अब पधारो राम अब पधारो.....