पूरे देश को संकट में डालने वाला तबलीगी जमात आखिर है क्या ?

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31st March, 2020, Edited by अमरीश मनीष शुक्ला 

नई दिल्ली। भारत समेत पूरी दुनिया की मीडिया में इस समय एक ही नाम गूंज रहा है तबलीगी जमात और मरकज । यह दोनों शब्द क्या है? इनके माइने क्या हैं ? यह क्या करते हैं और इनका मकशद क्या है ? यही सवाल इस समय सबके जेहन में है। क्योंकि पूरी दुनिया में कोरोना की दहशत, पाबंदियों और दिल्ली में धारा 144 लगने के बावजूद भी इस कार्यक्रम का होना लोगों को अचरज में डाल रहा है। फिलहाल इस मुस्लिम धार्मिक संगठन ने नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा दी है और देश के कई राज्यों के लाखों लोगों की जान को संकट में डाल दिया है। इतना ही नहीं दिल्ली के निजामुद्दीन के जिस इलाके में तबलीगी जमात का हेडक्वार्टर है, वहां कयी दिनों तक हजारों लोग जुटे रहे। यहां वीजा कानूनों की धज्जयिां उडाई गयी। सैकेड़ों विदेशी नागरिकों को छिपाकर रखा गया। 

विदेशियों को छिपाकर रखा 

पुलिस ने बताया कि यहां जो भी विदेशी नागरिक आया था और मरकज में पहंचा, उन सभी के पास टूरिस्ट वीजा ही था। लेकिन, वह यहां आकर धार्मिक कार्यों को अंजाम देने में जुटे थे। आश्चर्य की बात है कि इन विदेशयों में सऊदी अरब,इंडोनेशिया,मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के नागरिक आये थे और इनके यहां के हालात पूरी दुनिया से छिपे नहीं है। इनके यहां भी कड़े नियम लागू किये गये हैं । लेकिन, उसके बावजूद भी यह न सिर्फ यहां आये, बल्कि पूर्ण संभावना है कि संक्रमण की गुंजाइश भी ऐसे ही आई होगी। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में कोराना वायरस से होने वाली मौत व संक्रमित होने वाले लोगों की काफी संख्या का संबंध इस कार्यक्रम में शामिल हुये लोगों से है। फिलहाल आइये इस तबलीगी जमात के बारे में जानते हैं, जो पूरी दुनिया के संकट के समय अपना अलग ही एजेंडा चला रहे हैं। 

कब हुई थी स्थापना 

रिकार्ड के अनुसार 1926 में तबलीगी जमात की स्थापना की गयी । यह हरियाणा का नूंह जिला इलाका था, जहां पहली बार इसकी संकल्पना हुई और एक गांव में इसकी स्थापना धार्मिक संस्था के तौर पर की गयी। कालांतर में यह इतनी तेजी के साथ प्रसिद्ध हुई कि पूरी दुनिया में इस संस्था ने अपनी पैठ बना ली और मैजूदा समय में 213 देश इस जमात से जुडे हुये हैं। इस समय इस संस्था का हेडक्वार्टर भारत में ही है। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में बंगले वाली मस्जिद को इसका हेडक्वार्टर बनाया गया है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह हेक्वार्टर निजामुद्दीन औलिया की दरगाह और गालिब एकैडमी के पास ही स्थित है।

कितने सदस्य हैं

तबलीगी जमात की स्थापना के बाद इसके विस्तार का क्रम कभी नहीं रूका। इस्लामिक देशों में इसके फैलावा का जबरजस्त हिसाब है, लेकिन लगभग पूरी दुनिया में इस जमात की मौजूदगी है और लगभग 15 करोड़ लोग इसके सदस्य हैं। यह मूलत: इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए काम करते हैं। इस जमात में पाकिस्तानी क्रिकेटर सईद अनवर जैसा बड़ा नाम भी शामिल है। 

क्यों हुई थी स्थापना 

तबलीगी जमात की स्थापना आखिर क्यों हुई और आखिर ऐसी कौन सी जरूरत आन पड़ी थी ? अगर हम इस प्रश्न पर विचार करें और उत्तर जाना चाहते तो हमें इतिहास के पुराने पन्ने पलटने पडेंगे। जब भारत में मुगल शासन था तो उस समय यहां के हिंदू धर्म मानने वाले धर्मलंबियों को इस्लाम कबूल कराने का क्रम शुरू किया गया था और यह इतना अधिक संख्या में हुआ कि अ​नगिनत है । कितने हिंदू इस्लाम को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया इसका भी अनगिनत ही रिकार्ड है। लेकिन, भारत में एक विकट समस्या थी। कि हिंदुओं ने इस्लाम तो कबूल कर लिया था, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो मुसलमान बनने के बावजूद भी हिंदू रीति-रिवाजों को मानते थे। जब मुगल काल का सिक्का कमजोर पडने लगा और यूरोपीय कंपनियों का आगमन शुरू हुआ तो धीरे धीरे वक्त बदला। अंग्रेजों की पकड़ भारत पर मजबूत हो गयी तो इसी बीच आर्य समाज ने शुद्धिकरण आंदोलन शुरू किया और फिर से लोगों को हिंदू बनाने की कोशिशें शुरू की गयी। इस दौरान शुद्धिकरण करना उनका बहुत आसान था जो हिंदू रिवाजों को अब भी मान रहे थे। इसी दरमियान मुस्लिम धर्म गुरुओं को यह एहसास हुआ कि बदलाव और विस्तार की जरूरत हमें भी है। तब इस्लाम की शिक्षा-दीक्षा के विस्तार पर जोर देने पर मुस्लिम गुरूओं ने विचार विमर्श शुरू किया और फिर मौलाना इलियास कांधलवी की अगुवाई में तबलीगी जमात के नाम से इस धार्मिक संगठन की नींव पड़ी।

मकसद क्या है  

आज यह धार्मिक संगठन अपनी अलग पहचान के लिये पूरी दुनिया में जाना जाता है। अगर इस संगठन का मकसद हम जानना चाहें तो हमे इसे छोटे शब्दों में समझना होगा। क्योंकि यह बहुत विस्तार वाला है।  मकसद के तौर पर मूल बातों को देखें तो तबलीगी जमात का असल मकसद 'छह उसूल' यानि 'कालिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत और दावत-ओ-तबलीग' है। तबलीगी जमात का मूल मकसद दुनिया भर में इस्लाम यानि अल्लाह की बातों का उसके मूल रूप में प्रचार-प्रसार करना है। 

मरकज क्या है

अब बात करते है। जमात शब्द की। दरअसल जमात का मतलब ये है कि जो लोग भी इस काम में शामिल होते हैं, उनका समूह कहते हैं और इसे उर्दू भाषा में जमात कहते हैं। दुनिया भर में तबलीगी जमात के सेंटर्स हैं, जगह जगह इनकी बैठकें होती हैं। जहां पर यह सेंटर बने हैं या बैठक होती है, उसी स्थान को मरकज कहते हैं। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में जमात का हेडक्वार्टर है बंगले वाली मस्जिद, यह भी एक तरह से मरकज का ही स्वरूप है। 

कब हुई पहली बैठक 

तबलीगी जमात की स्थापना हरियाणा के एक छोटे से गांव में 1926 में हो तो गयी, लेकिन इसका संचालन कैसे करना था, इस पर संशय बना हुआ था। धीरे धीरे पर निर्णय होता रहा, नीतियां बनीं और 15 साल बाद इसका पहला जलसा आयोजित किया गया। इसका पहला जलसा दिल्ली मरकज में ही हुआ था। यह 1926 की घटना थी और उस दरमियान इसमें करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने के दावा किया गया था। हालांकि पहले जलसे के बाद इसका विस्तार दिन दूना और रात चौगनी रफ्तार से आगे बढ़ा और फिर इस धार्मिक आंदोलन ने ऐसी रफ्तार पकड़ी की शायद ही दुनिया का कोई देश इसका सदस्य मौजूदा समय में न हो। 

कैसे काम करते हैं ये लोग 

अब बात करते हैं तबलीगी जमात के काम करने के तरीके ​की। इनकी एक पूरी नीति होती है। इसका सबसे बड़ा जलसा बांग्लादेश में होता है। जबकि इसके अलावा अलग अलग देशों में सालाना जलसा होता है। भारत और पाकिस्तान में भी इस तरह के जलसे होते हैं। तबलीगी जमात के मरकज से ही नियम बनते हैं और फिर ग्रुप बनाकर इसके सदस्य निकलते हैं। ये जमातें कम से कम 3 दिन, 5 दिन, 10 दिन, 40 दिन या 4 महीने के लिए अपने धार्मिक अभियान पर किसी एक स्थान के लिये निकलती हैं। एक तबलीगी जमात में लोगों की संख्या अलग अलग हो सकती है। कभी इसमें कम व ज्यादा लोग होते हैं। लेकिन अमूमन 8 से 10 लोगों का एक ग्रुप इसमें होता है। ये जमात लोगों के बीच जाकर उनसे पास की मस्जिद में जाने के लिए कहते हैं। उन्हे हदीस पढ़ने, नमाज पढ़ने और रोजा रखने को कहते हैं। उन्हें धार्मिक शिक्षा देते हैं। इस जमात में ही दो या कभी तीन सदस्य ऐसे होते हैं, जिन्हें जमात के बाकी सदस्यों के लिए खाना भी बनाना होता है। 

तोड़ा गया कानून 

फिलहाल पूरी दुनिया में पाबंदियां थी। दिल्ली में भी धारा 144 लागू थी। उसके बावजूद कानून की ऐसी की तैसी करते हुये कार्यक्रम का आयोजन किया गया और 2000 से भी अधिक लोगों के यहां एकत्रित होने की खबर सामने आयी है। आश्चर्यजनक ढंग से यहां 250 विदेशी नागरिक भी मौजूद थे, जो उन देशों से आये  थे, जहां कोराना का कहर पूरी तरह से बरप रहा है। इसमें सऊदी अरब, मलेशिया,इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे कोरोना प्रभावित देशों के लोग आये थे और इन देशों में क्या हालात हैं, यह किसी से भी छिपा नहीं है। फिलहाल खबर लिखे जाने तक 24 लोगों में कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हो चुकी है। तेलंगाना लौटे 6 लोग, कश्मीर के एक व्यक्ति व दिल्ली में भी एक मौत हुई है। इसके अलावा अण्डमान में 9 लोग लौटें हैं और वह अलग अलग फ्लाइट से गये हैं और सभी में कोराना पॉजिटिव है और एक सख्श की पत्नी को भी कोराना का संक्रमण हो गया है।