fathers day special: पितृ स्मृति : न अवसाद तोड़ सकता है मुझे..

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24th June, 2020, Edited by Shikha singh

न अवसाद तोड़ सकता है मुझे...

न झंझावात मोड़ सकता है मुझे..

क्योंकि अंकित है मेरे मस्तक पर, 

मेरे पिता का आशीष, 

उनकी उँगलियों के स्पर्श के रूप में..

जैसे अंकित हैं गिलहरी की

पीठ पर,

श्री राम की उंगलियां..

अनंत काल से अनंत काल तक.. 

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2-

मेरे ह्रदय में है स्पंदन,

क्योंकि ह्रदय की गहराइयों

में जीवित है मेरे 

पिता का श्वसन..

और अगर ईश्वर मूल्य ले 

उनको वापस करने का कुछ, 

तो चुका दूंगी सहर्ष

अपने अंतिम उच्वासों 

और निःश्वासों से..

इनपुट : दिव्या मिश्रा राय