आखिर क्यों माथे पर लगाते है तिलक, जानें रहस्य

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6th February, 2020, Edited by Focus24 team

धर्म डेस्क । सनातन धर्म में माथे पर तिलक का बहुत अधिक महत्व होता है और हर हिंदू अपने जीवन में तिलक जरूर लगाता है। मंदिर में दर्शन करने के दौरान तिलक लगाना हो या धार्मिक संस्कारों के दौरान।  पूजा-पाठ से लेकर विवाह और तमाम तरह के शुभ कार्यो में तिलक लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन, तिलक के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य है, जिसे बहुत कम लोग ही जानते हैं।

कहां लगता है तिलक
तिलक को हमेशा माथे पर ही लगाया जाता है और वह भी माथे के किसी भी ओर इसे नहीं लगाया जाता, बल्कि इसका एक नियम होता है और उसके तहत तिलक हमेशा मस्तिष्क के केंद्र पर लगाया जाता है। आप अक्सर देखते होंगे कि अगर पंडित, पुजारी से लेकर, घर के छोटे बडे हर कोई इसी नियम का पालन करते हैं।


माथे पर होता है आज्ञाचक्र
हमारे शरीर में ऊर्जा के 7 केंद्र माने गये हैं। जिसमें मस्तिष्क के बिल्कुल बीच यानी केंद्र में आज्ञाचक्र होता है। इसे हम गुरूचक्र के नाम से भी जानते हैं। सबसे खास बात यह है कि इसे मानव शरीर का केंद्र माना जाता है और यहीं से एकाग्रता आती है और ज्ञान से परिपूर्ण स्थिति का अनुभव भी यही से होता है। ज्योतिष विज्ञान कहता है कि बृहस्पति सभी देवों का गुरु और बृस्पति ग्रह का केंद्र गुरूचक्र होता है। इसलिये गुरूचक्र पर ही तिलक लगाया जाता है।

उंगलियों का तिलक पर महत्व
तिलक लगाने के लिये उंगलियों का विशेष महत्व होता है और इन नियमों का पालन करने पर आपको अवश्य लाभ होगा। इनमें सर्वाधिक महत्व अनामिका उंगली का होता है। अगर आप अनामिका उंगली से तिलक लगाते हैं तो आप में तेज की वृद्धि होगी और आपको प्रतिष्ठा मिलेगी। वहीं, अंगुष्ठ से तिलक लगाने पर ज्ञान और आभूषण की प्राप्ति होती है। जबकि विजय की प्राप्ति हेतु तर्जनी उंगली से तिलक लगाया जाता है ।

तिलक के रंगों का रहस्य
माथे पर तिलक मनुष्य को उर्जा से भर देता है। लेकिन तिलक का रंग भी अलग अलग रहस्य से भरा होता है और उनका लाभ होता है। यानी किसी के माथे पर कौन से रंग का तिलक है, उसके पीछे एक अलग ही युक्ति और आध्यात्म्कि कारण होता है, जिसका लाभ मानव के संपूर्ण जीवन और भाग्य पर पड़ता है। जैसे सफेद रंग यानि चंदन का तिलक अगर माथे पर लगाया जाये तो यह शीतलदायी होता है और मन मस्तिष्क को शांतचित रखकर आत्मसंतुष्टि का एहसास कराता है। वहीं, लाल रंग के तिलक से मनुष्य को ऊर्जा मिलती है और स्फुर्ति से तिलकधारी भरा होता है। जबकि पीले रंग के तिलक से मन में प्रसन्नता रहती है और जीवन खुशियों से भरा होता है। हालांकि इन सब के बाद एक तिलक काले रंग का होता है, जो काली शक्ति के साधक अथवा शिव भक्त भभूत के तौर पर लगाते हैं इसमें मोहमाया से दूर होने का सूचक समेत रहस्यों से भरा हुआ तिलक होता है। जिसे शब्दों में व्याख्या करना अत्याधिक कठिन है।