निष्ठुर मालिक आसमां बहरा.....

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13th July, 2020, Edited by Focus24 team

हर आहट पर नज़रें उठती हैं,
जैसे कोई करूणामयी गुहार मेरी चौखट तक आती है ,
किसी मासूम बच्चे की किलकारी सी।

दुनिया के मेले में आखिर
रह जाते हैं अकेले
न कोई साथी नजर आता है
न कोई मंज़िल
रह जाती है सिर्फ कशिश
जो मन को कर देती है बहुत उदास।
अकेलेपन में लगता तुम पास हो तुम्हे स्पर्श करने की कोशिश,

निष्ठुर मालिक आसमां बहरा अकुलाता है मन नहीं तुम संग
अलाव की बुझी राख खामोश डगर तुम्हें पुकारे मन मलंग
न हमसफ़र न सुनवाई भयातुर अधमरी मैं न करो तंग

क्षितिज पर अंधेरा छाया है
और तुम गगन में कहीं दूर
जा छुपे हो।
तुम्हारे स्पर्श को काँपती हैं
मेरी अंगुलिया
तुम पास होकर भी हो ,
दूर बहुत दूर।
मैं दूर होकर भी तुम्हारे पास हूँ
तुम्हारी यादों में लिप्त पर मिलने से
मजबूर
इनपुट : शबनम मेहरोत्रा, कानपुर सिटी।