पापा आपके बिना  ये आँखें भी ना सिसकती हैं ! 

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22nd June, 2020, Edited by Focus24 team

मणिकर्णिका की ज्वाला अब भी

सीने में धधकती है! 

पापा आपके बिना 

ये आँखें भी ना सिसकती हैं! 

अपनी पीड़ा किससे कहूँ

कौन समझ अब पाएगा! 

उँगली पकड़कर कौन मुझे

किसी दुविधा से पार लगाएगा! 

रूठना किसी से भूल गई अब 

खुद से ही रूठी रहती हूँ! 

बिन बात के ही खुद से अब 

मैं तो झगड़ा करती हूँ! 

दिल दिमाग में होड़ लगी है 

कभी संभल... बिखर कभी जाती हूँ! 

पापा आपके बिना 

जी भी तो नहीं पाती हूँ! 

बंद पलकों में चेहरा आपका 

ना चाहो तो भी आ जाता है! 

सर पर हाथ फेर गया कोई 

ऐसा मन भरमाता है! 

रोकर अपनी पीड़ा 

कम नहीं करना चाहती हूँ! 

हर पल घुटना चाहती हूँ 

हर पल मरना चाहती हूँ! 

अंत समय में एक बार ही 

बातें आपसे जो कर पाती! 

उद्वेलित मन को शायद 

शांत मैं तब कर पाती! 

पता नहीं क्या कहना था 

पता नहीं क्या सुनना था! 

आपके हाथों में एक बार 

अपनी पुस्तक मुझको रखना था! 

नहीं पूर्ण हुई आशाएं 

बन सकी आपका अभिमान! 

कोरों पर ठहरे हैं आँसू 

अब चाह नहीं मिले कोई सम्मान!

इनपुट : शिल्पी अग्रवाल।