Special Story: लुप्त वस्तुओं व प्रथाओं का संगम है सोहम हेरिटेज एण्ड आर्ट सेंटर

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23rd November, 2019, Edited by Neeraj tripathi

फीचर्स डेस्क। सभ्यताओं का संगम हो या ऐतिहासिक बेशकीमती मुद्राएं। हर दौर की यादें हों या फिर इतिहास को प्रमाणित करते साक्ष्य। संग्रहालय में स्वर्णिम इतिहास से लेकर वर्तमान तक का सफर करने का मौका मिलता है। एक तरफ जहां मौजूद वर्षो पुरानी मूर्तियों और कलाकृतियों को लोग मोबाइल एप देखना पसंद कर रहें हैं, वहीं उत्तराखंड के मंसूरी में स्थित सोहम हेरिटेज एण्ड आर्ट सेंटर पूरे उत्तराखंड राज्य में एकमात्र ऐसा संग्रहालय जो हिमालय की जीवंत परम्पराओं, आदिकालीन संस्कृति एवं जीवन शैली को विभिन्न कलात्मक रूपों भव्यता के साथ दर्शाता है ।

कैसे हुई सोहम हेरिटेज की शुरुआत

हिमालय का आकर्षण, आध्यात्मिक अभिरुचि और पूर्वजों का श्री केदारनाथ धाम से जुड़ाव समीर शुक्ल व उनकी पत्नी कविता शुक्ला को 1996 में हिमालय के इस भू-भाग में ले कर आया। विस्तृत किंतु फैली सांस्कृतिक धरोहर को एक तार मे पिरोने के शुद्ध संकल्प के साथ उनकी यह यात्रा शुरू हुई। पिछले 24 सालों में  विभिन्न धार्मिक स्थलों, गांवों और घाटियो मे भ्रमण करते, प्रचलित अथवा लुप्त प्राय वस्तुओं व प्रथाओं का अध्ययन करते और उन्हें आकार देते हुए सोहम हिमालय म्यूजियम स्थापित हुआ।

क्या-क्या देखें

सोहम हेरिटेज एण्ड आर्ट सेंटर में आप पेंटिंग/ फोटोग्राफ/ आर्टीफैक्ट और प्राकृतिक संपदा से सज्जित सेक्शन और स्क्रैप आर्ट व मूर्तियों से सज्जित देख सकते हैं।

व्यक्तिगत संस्थान का हर कोना कुछ कहता है .....

आपको बता दें कि यह कोई एनजीओ न होकर यह एक शुद्ध रूप से व्यक्तिगत संस्थान है। आज देश विदेश से तमाम पर्यटक और छात्रों भ्रमण तथा शैक्षिक ज्ञान हेतु इस म्यूजियम में आते हैं। मसूरी के लोकप्रिय केंद्र के रूप में प्रख्यात सोहम हिमालयन म्यूजियम उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर अग्रसर है जिसे आप देख सकते हैं। इसे और हाईटेक किया जा रहा है।

इनपुट सोर्स : समीर शुक्ल, मंसूरी, उत्तराखंड।