महाशिवरात्रि विशेष : पाण्डवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां स्थापित किया था शिवलिंग, अद्भुत है शक्ति

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21st February, 2020, Edited by अमरीश मनीष शुक्ला 

अमरीश मनीश शुक्ल / प्रयागराज । आज महाशिवरात्रि है, आज के दिन शिवालयों में आस्था का सैलाब होता है। हर कोई शिव के दर्शन पूजन कर शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का जतन करता है। आइये आज हम आपको प्रयागराज के एक ऐसे शिव मंदिर का दर्शन कराते हैं, जहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।  यूं तो प्रयागराज क्षेत्र ही तीर्थों का राजा है, लेकिन प्रयागराज परिक्षेत्र में कई ऐसे ऐतिहासिक और पौराणिक देव स्थल मौजूद हैं जिनकी शक्ति कलयुग में आम जनमानस के लिए किसी वरदान से कम नहीं है । ऐसा ही एक दिव्य स्थल प्रयागराज से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर पड़िला महादेव के नाम से मशहूर प्रसिद्ध है । जिसे पांडेश्वर नाथ धाम के नाम से जाना जाता है । इस मंदिर के निर्माण व शिवलिंग स्थापना को लेकर कई किवदंतियां भी प्रचलित है और ऐसी मान्यता है कि अगर लगातार 40 दिन तक पांडेश्वर नाथ धाम में भगवान शिव का दर्शन किया जाए तो दर्शन करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं । फिलहाल सावन शुरू हो जाने के साथ यहां कयी जनपदो से कांवरियों का जल लेकर आने का क्रम भी शुरू हो गया है । कांवरियों की टोल गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराती है।

महाशिवरात्रि के दिन 
महाशिवरात्रि के दिन पाण्डेश्वरनाथ धाम पर लाखों श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन करने के लिये पहुंचते हैं। यह दिन यहां बहुत ही विशेष तरीके से मनाया जाता है। भोर में 2 बजे से ही मंदिर के कपाट खोल दिये जाते हैं और फिर जलाभिषेक का क्रम रात्रि में 11 बजे तक चलता है। मंदिर में प्रवेश करने के लिये चार मार्ग होते हैं, लेकिन हर मार्ग पर हजारों लोगों की लाइन लगी होती है और लंबे समय तक लाइन में लगने के बाद शिव के दर्शन हो पाते हैं। रात्रि में 11 बजे शिव का महाश्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिये आधी रात तक लोगों की भीड़ जुटी रहती है। रात्रि में महाआरती और प्रसाद का वितरण किया जाता है। 

कैसे हुई थी शिवलिंग की स्थापना
जनश्रुति यह है कि वनवास के दौरान जब पांडव वन विचरण कर रहे थे तो वह यहां कुछ समय के लिये रुके थे। तब भगवान कृष्ण ने पाण्डवो को शिवलिंग स्थापित कर प्रतिदिन पूजा पाठ करने को कहा था । भगवान कृष्ण की आज्ञानुसार पांचों भाइयों ने मिलकर यहां शिवलिंग की स्थापना की और पूजा का क्रम शुरू किया। 40 दिनो की अतुल्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पाण्डवो को दर्शन दिया। भगवान शिव ने इस दिव्य स्थल को पाण्डवो के नाम से ही जाने जाने का वरदान दिया। कालांतर में यह शिवलिंग पांडेश्वरनाथ के नाम से प्रचलित हुआ। अब यह शिवधाम पूरे प्रयागराज की महिमा में एक अद्भुत सितारा बनकर चमकता है । द्वापर युग में पांडवों द्वारा स्थापित यह शिवलिंग जब प्रयाग की पंचकोसी परिक्रमा  होती है तब उसमे शामिल होता है और प्रयागराज की पंचकोसी परिक्रमा बगैर पाण्डेश्वरनाथ धाम के अधूरी होती है। लोगो का मानना है कि मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूर्ण होती है।

एक महीने का मेला
इस मंदिर के समीप राधाकृष्ण, बैजू बाबा, पार्वती जी, काल भैरव, बजरंग बली, कालीदास का मंदिर भी स्थित हैं और शिव के दर्शन से पूर्व लोग काल भैरव का दर्शन करते हैं। मलमास (अधिकमास) में पड़िला महादेव में एक महीने का मेला लगता है। साथ ही हर साल पूरे सावन भर भी यहां मेला लगा रहता है । मेले का दायरा लगभग दो किलोमीटर के दायरे में विशालकाय रूप में फैला होता है। सावन के एक माह में लाखों लोग इस दिव्य स्थल के दर्शन के यहां पहुंचते हैं । इसी मंदिर के समीप ऐतिहासिक तालाब भी है । पहले इस तालाब में स्नान के बाद ही दर्शन होता था, लेकिन तालाब की दुर्दशा ने इसका पौराणिक महत्व छीन लिया है।