पीआर पसंद नहीं आया योगी को, खराब काम के चलते हटाई गई दिल्ली की कंपनी

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28th June, 2020, Edited by Focus24 team

नई दिल्ली। जहां एक और केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच पीआर कंपनियों के जरिए प्रचार की होड़ लगी रहती है, वही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली की एक कंपनी को प्रशासन से हरी झंडी मिल जाने के बाद भी लोक भवन से चलता कर दिया।  बताया जाता है कि योगी को पीआर कंपनियों के माध्यम से प्रचार - प्रसार पसंद नहीं है। वैसे सरकारी फंड की बर्बादी के रूप में देखते हैं। दिल्ली की एक कंपनी पिछले 1 साल से उत्तर प्रदेश सरकार के लिए प्रचार - प्रसार का काम कर रही थी। शासन और प्रशासन दोनों ही उसके काम से परेशान थे। कंपनी से तकरीबन एक साल का करार था, जिसे शासन और प्रशासन बीच में ही खत्म कर देना चाहते थे किंतु अनेक कारणों से पीआर कंपनी बनी रही। 

हाल ही में पीआर के लिए फिर से टेंडर निकाला गया, और आश्चर्यजनक रूप से दिल्ली की ही इस कंपनी को फिर से काम मिल गया, जिसकी काफी चर्चा रही। साल भर तक शिकायत और नोटिस झेल रही कंपनी को फिर से काम मिल जाना किसी के गले नहीं उतरा। नए सिरे से काम शुरू करने के लिए कागजी प्रक्रिया जारी की थी कि मुख्यमंत्री ने पीआर की फाइल के सामने लाल झंडा लगा दिया। 

दिल्ली तक में सराहना

मुख्यमंत्री के इस कदम की राज्य के प्रशासनिक गलियारों से लेकर दिल्ली तक चर्चा है। कोविड-19 महामारी से उपजे आर्थिक संकट के बीच भी शासन - प्रशासन और मंत्रियों का मीडिया में प्रचार के लिए प्राइवेट कंपनियों का सहारा लेना जारी है, और ऐसे में योगी आदित्यनाथ द्वारा पीआर को साफ मना करने की सराहना की जा रही है। कहा जा रहा है कि योगी ने पीआर पर खर्च का ट्रेंड तोड़ा है। 

केंद्र सरकार से जुड़ा काम आसानी से मिलता है इस कम्पनी को

जनवरी २०१९ से इस कम्पनी ने उत्तरप्रदेश में सेवाएं शुरू की थी। उत्तर प्रदेश सरकार और पीआर कंपनी के बीच ढाई करोड़ रुपए से अधिक की डील हुई थी। इस पीआर कंपनी के केंद्र शासन के अधिकारियों से अच्छे संबंध बताए जाते हैं जिनकी बदौलत उसे केंद्र सरकार के महकमों का काम मिलता रहता है। कंपनी केंद्र सरकार के कुछ मंत्रालयों- विभागों तो गुपचुप तरीके से काम करती है लेकिन पुष्ट जानकारी के अनुसार गुजरात प्रदेश सरकार का प्रचार भी  इसके ही पास है। 

बड़ा होता है प्रचार का खेल

पीआर कंपनियां शासन - प्रशासन को मीडिया में रसूख बनाने का प्रलोभन देकर तगड़े पैसे कमाती हैं। कागजों में प्रशासन के नाम पर प्रचार का काम दिखाया जाता है पर सच यह है कि सरकारी फंड से नेताओं और मंत्रियों का व्यक्तिगत प्रचार होता है। केंद्र सरकार के कई बड़े मंत्री पीआर की सेवाओं के जरिए मीडिया में अपना काम अच्छा दिखाने की कोशिश करते हैं।

इनपुट सोर्स : सूत्र के हवाले से