पढ़ें, ध्वजारोहण और ध्वज फहराने में अंतर क्या है ?

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8th August, 2020, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है जो उस देश के स्वतंत्र देश होने का संकेत होता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को हम भारतवासी ' तिरंगा" के नाम से जानते हैं। 66"ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड "ने ध्वज निर्माण के लिए मानक सेट किया था। उन्होंने उसके निर्माण से जुडी हर छोटी-बड़ी बात जैसे – उसका कपड़ा, धागा, रंग उसका अनुपात सब कुछ नियम के अनुसार व्यवस्थित किया। यहाँ तक कि उसके फहराने से जुडी हुई बातें भी नियम में लिखी गई हैं। हमारा राष्ट्रीय ध्वज एक राष्ट्रीय प्रतीक है जिसका सम्मान हर भारतीय करता है। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुडी कुछ बातें आम आदमी को हमेशा याद रखनी चाहिए।

1- जब ध्वज को ऊपर उठाया जाए तो ध्यान रखें कि केसरिया रंग सबसे उपर हो। कोई भी अन्य झंडा चाहे वह किसी दल का ही क्यों न हो , तथा कोई भी प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज के उपर नहीं होना चाहिए।
2- अगर तिरंगा और अन्य ध्वज फहराए जा रहे हों तो वे हमेशा इसके बायीं ओर पंक्ति में फहराए जाने चाहिए।
3- अगर कोई जुलूस या परेड निकल रही हो तो राष्ट्रीय ध्वज दाहिने ओर होना चाहिए या फिर बाकि सभी ध्वजों की पंक्ति में बीच में होना चाहिए।
4- राष्ट्रीय ध्वज हमेशा मुख्य सरकारी ईमारत व संस्थान जैसे राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट आदि पर हमेशा फहराता रहता है । किन्तु तिरंगा ध्वज किसी भी पर्सनल व्यवसाय या काम के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।
• 5- राष्ट्रीय ध्वज शाम को सूर्यास्त के समय उतार देना चाहिए।
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे "ध्वजारोहण " कहा जाता है क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना  को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में Flag Hoisting (ध्वजारोहण) कहा जाता है।

जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है, संविधान में इसे Flag Unfurling (झंडा फहराना) कहा जाता है। 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं, क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।

जबकि 26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संविधान  प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से ध्वजारोहण किया जाता है। जबकि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है। यह कुछ खास अंतर दोनों पर्व के बीच में है दोनों ही हम राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। अपने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में पूरी जानकारी प्रायः बहुत कम लोगो को है। अक्सर देखा गया है कि 15 अगस्त के दिन भी अनभिज्ञता के कारण ध्वज को रस्सी से बांध कर उसमें फूल भी बांध कर ऊपर ऊपर बांध देते हैं और नीचे से रस्सी खिंच लिया जाता है । ये प्रक्रिया 15 अगस्त को नही होना चाहिए। हमारा सम्मान है राष्ट्रीय ध्वज । अतः उसका पूरा सम्मान करना एक भारतीय का कर्तव्य है

इनपुट सोर्स : डॉ. निरुपमा वर्मा, एटा -उत्तर प्रदेश।