वो खूबसूरत औरत...

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15th January, 2020, Edited by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। हर चेहरे पर हजार चेहरे लगे है और हर चेहरे की हजार कहानी। कभी ध्यान से सुनना, हर कहानी के पीछे एक और कहानी होती है  हर मुस्कुराने वाले चेहरे के पीछे एक रोने वाले इंसान की ना जाने कितनी गहरी कहानी होती है ये कोई नहीं जानता है। ऐसी ही एक कहानी से मुलाकात हुई, शायद यू कहूं तो मोहब्बत से मुलाकात हुई उसकी उम्र यूं ही कोई 30 से 35 साल होगी आज बस में मिली थी वो एक हाथ में टिफिन का डब्बा एक हाथ में लैपटॉप का बैग भागते हुए बस पकड़ा उसने बस में आते के साथ उसकी गहरी सी आंखों में एक अजीब सा संतोष था ऐसा लगा कि जैसे उस औरत को महादेव मिल गए हो, ऐसा लगा जैसे गंगा को अस्सी का पहला स्पर्श मिल गया हो बस में भीड़ नहीं थी, फिर भी लोगो से बचते बचाते फाइनली उसको मेरी बगल वाली सीट मिली वो उस पर बैठ गई। 

बहुत अजीब सी लग रही थी पता नहीं क्यों मैं ना चाहते हुए भी उसकी तरफ लगातार देखे जा रहा था शायद इसे घूरना ही कहते हैं,या फिर लड़की औरत को ताड़ना, मुझे नहीं पता लेकिन जिंदगी में पहली बार किसी को देखते रहने का दिल कर रहा था,पता नहीं क्यों , लेकिन वो मुझे कुछ कहानी जैसी लग रही थी। थोड़ी देर बाद उसने अपने बैग से अपना मोबाइल निकाला मोबाइल निकालते ही उसके चहरे पर एक अजीब सी शिकन थी, अजीब सा डर या किसी अनहोनी घटना का डर उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। वह लगातार उन नंबरों पर कॉल किए जा रही थी लेकिन शायद नंबर नहीं लग रहा था वह बार-बार कभी अपने लैपटॉप को संभालती तो कभी-कभी अपने बालों को वह कभी टिफिन का डब्बा अपने गोद में रखती तो कभी सीट पर लेकिन हर बार वह फोन में वही नंबर बार बार मिलाये जा रही थी, थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा सर!

क्या यह नंबर आप मिला सकते हैं मेरी 9 साल की बेटी के हॉस्टल का नंबर है उसने मुझे कॉल किया था और मैं ट्रैफिक में होने की वजह से उसका फोन नहीं देख पाई उसने पहली बार मुझे इतने सारे मिस कॉल किए हैं मेरी बेटी जरूर किसी प्रॉब्लम में है आप प्लीज इस नंबर पर कॉल कीजिए ना। मैं भी उसके दिए हुए नंबर पर कॉल किये जा रहा था वह भी उन्हीं नंबरों पर कॉल कर रही थी वह एक लैंडलाइन नंबर था शायद किसी हॉस्टल का जो ना जाने कितनी देर से बिजी था मैं हर बार फोन लगाते समय उसकी आंखों में साफ-साफ देख रहा था की एक औरत जब मां बनती है तो वह दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्ते में बंध जाती है जब मां बनती है तब वो एक महबूबा,एक इश्क, एक एहसास की तरह हो जाती है, चुपचाप बे इंतेहा मोहब्बत करती है बेहिसाब केयर करती है बेवक्त खयाल रखती है। इन तमाम खयालों के बीच में मैं भी बार-बार फोन लगाये जा रहा था, और छुप-छुपकर उसकी आंखों में भभुआ में बैठी अपनी मां को देखने की कोशिश कर रहा था, आखिरकार उसकी आंखों में कुछ आंसू की बूंद आ ही गई, मां है ना साहब ,बहुत कमजोर दिल होता है इनका , बहुत जल्द ही रो देती है ।

मैं उससे कुछ कहता इससे पहले वह कहने लगी पता नहीं मेरी बेटी किस हाल में होगी पता नहीं उसको क्या हुआ होगा वह ठीक तो होगी ना क्या आपका कोई जान पहचान गर्ल्स हॉस्टल में है, क्या आप के पास वहा का कोई नंबर है गूगल कीजिए ना कुछ शायद मिल जाए, और मैं उनको देखकर बस सोचे जा रहा था कि हे!! महादेव अगर मैंने जिंदगी में कोई भी अच्छे काम किए हैं तो इनकी बिटिया हमेशा खुश रहे। आधे घंटे की मशक्कत के बाद, एक कॉल आता है

हेल्लो मैडम ,

आप की बेटी फलाना स्कूल में पढ़ती है क्या ? इतना सुनते के साथ औरत की सांसे थम जाती हैं वह बड़ी मुश्किल से उसे बस इतना कहती है हां वह मेरी बेटी है. क्या वह सब ठीक तो है ना ? कहां है वह? क्या मेरी बात उस से हो सकती है? इतना कह के वो रोने लगती है कि सामने से आवाज़ आती है कि लो बेटा आपकी मम्मी को फोन लग गया। लड़की अपनी मां से लड़ती हुई कहती है कि, कहा थी आप?इतने कॉल किए थे आपको ,जानती हैं आज मेरा सलेक्शन स्कूल फुटबॉल टीम में हो गया है। मां कुछ नहीं बोलती है बस रोए जा रही थी कि अचानक से बस कंडक्टर ने आवाज़ लगाया कि केकेबी हाल आ गया जिसको उतरना है जल्दी उतरो, औरत अपने लैपटॉप टिपिन को समेट कर अपने आंखो में आंसू लेकर उतर जाती है, लेकिन अब उसकी आंखो में खुशी के आंसू थे। मै काफी देर तक उस लैंडलाइन नंबर को देखता रहता हूं ,और ना चाहते हुए भी उस औरत से इश्क़ कर बैठता हूं, वो औरत मुझे मेरी मां जैसी लगी मैने उस औरत को खुद की अपनी मां कह दिया और फिर अपनी law and order (माता जी का नाम इसी नाम से सेव किया है ) को फोन लगा कर इश्क़ की बाकी बातें उनसे करनी शुरू कर दी।

इनपुट सोर्स :  अंकित, भभूआ, विहार।