... तो इस लिए शुरू हुई कार्तिक मास में तुलसी की शादी कराने की परंपरा !

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6th November, 2019, Edited by Pratima Jaiswal

फीचर्स डेस्क। देवउठनी एकादशी शुक्रवार को है। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम और तुलसी के विवाह कराया जाता। शालिग्राम शिला को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में ब्रह्मवैवर्त पुराण की एक कथा को माने तो तुलसी ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया था। इसलिए भगवान विष्णु को शालिग्राम बनना पड़ा और इस रूप में उन्होने तुलसी से विवाह किया। इसलिए इनका विवाह करवाने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।

भगवान शालिग्राम से जुड़ी खास बातें

जहां भगवान शालिग्राम की पूजा होती है, वहां विष्णुजी के साथ महालक्ष्मी भी निवास करती हैं। इसे स्वयंभू माना जाता है यानी इनकी प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।

कोई भी व्यक्ति इन्हें घर या मंदिर में स्थापित करके पूजा कर सकता है। शालिग्राम अलग-अलग रूपों में मिलते हैं। कुछ अंडाकार होते हैं तो कुछ में एक छेद होता है। इस पत्थर में शंख, चक्र, गदा या पद्म से निशान बने होते हैं।

भगवान् शालिग्राम की पूजा तुलसी के बिना पूरी नहीं होती है और तुलसी अर्पित करने पर वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। शालिग्राम और भगवती स्वरूपा तुलसी का विवाह करने से सारे अभाव, कलह, पाप, दुःख और रोग दूर हो जाते हैं।

तुलसी शालिग्राम विवाह करवाने से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो कन्यादान करने से मिलता है। पूजा में शालिग्राम को स्नान कराकर चंदन लगाएं और तुलसी अर्पित करें। भोग लगाएं। यह उपाय तन, मन और धन सभी परेशानियां दूर कर सकता है।