fathers day special 2020 :  पिता 

Slider 1
« »
20th June, 2020, Edited by Focus24 team

पिता के स्नेह की आंखों में, 

पल्लवित होती मैं बड़ी हुई! 

पिता के हाथों की हथेली पर, 

कदम चलते, बढ़ते मैं खड़ी हुई! 

पिता के बांहों के आसमान में, 

मैं पंख फैलाते स्वच्छंद, आजाद उड़ी! 

पिता के आशीष के छांव में, 

मैं निडर, निभ्रिक, हमेशा रहीं! 

पिता के मानस हृदय के बने घोंसले में, 

मैं बुरी नजरों से बचती रही! 

पिता ही तो वो है जिनके संरक्षण में, 

हम बेटियां महफूज़ रही! 

पिता ही तो वो है जिनके साथ से, 

हम बेटियां समाज में जी रहीं! 

पिता ही तो वो है जिनके प्यार- सम्मान से, 

हम बेटियां अपना जीवन बचा रही! 

पिता ही तो वो है जिनके दुलार से, 

हम बेटियां हक से पढ़ लिख रहीं! 

उनके सुरक्षा कवच के साये में

हम बेटियां बिना भेदभाव के ,                                    

कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं! 

समाज में हमें भी है जीने का हक, 

इस अधिकार के साथ जी रहीं! 

पिता ही तो वो है जिनके हिम्मत देने से, 

हम बेटियां बेबाक बोल रहीं! 

पिता ही तो वो है जिनके हौसले बढ़ाने से, 

बिंदास हो साइकिल, स्कूटी, मोटरसाइकिल, 

सड़क पर दौड़ा रहीं! 

रचना - एकता प्रकाश  पटना ( अनिसावाद  ) बिहार