जूनियर डाक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी, मरीज की मौत

जूनियर डाक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी, मरीज की मौत

कानपुर । गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज से संबद्ध हैलट अस्पताल में जूनियर डाक्टरों द्वारा कार्य बहिष्कार जारी है। अब तो जूनियर रेजीडेन्ट थ्री भी जूनियर रेजिडेन्ट टू का साथ दे रहे हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समय से इलाज न मिलने से एक मरीज की मौत भी हो गई और सड़क हादसे में घायल मरीज इलाज के लिए तड़पता रहा। जूनियर रेजिडेन्ट टू का कहना है कि नीट परीक्षा होने के बाद भी काउंसलिंग नहीं की जा रही है। इससे चयनित जूनियर रेजीडेन्ट वन को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है और यहां पर काम का भार बढ़ता जा रहा है।

काउंसलिंग सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच फंसी हुई है

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातकोत्तर (नीट पीजी) की काउंसलिंग सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच फंसी हुई है। इसके विरोध में हैलट अस्पतालज में जूनियर रेजीडेन्ट (जेआर) पिछले बारह दिनों से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। अब जेआर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल आक्रामक हो गई और जेआर-टू के समर्थन में जेआर-थ्री भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इस वजह से एलएलआर (हैलट) एवं संबद्ध अस्पतालों में रुटीन के आपरेशन टालने पड़ रहे हैं। यहां तक कि अब ओपीडी भी चलने नहीं दी जा रही है।

जिससे सांस लेने में दिक्कत हो रही 55 वर्षीय शिखर की मौत हो गई। बेटा मनीष ने बताया कि समय से इलाज न मिलने से पिता की मौत हुई है। इसी तरह कानपुर देहात के रुरा निवासी 26 वर्षीय चालक अर्जुन सिंह ने बताया कि सड़क हादसे में पैर टूट गया था और यहां पर डाक्टरों ने देखा ही नहीं। बताया कि फतेहपुर में हादसा हुआ था और वहां के डाक्टरों ने कानपुर रेफर किया था और यहां पर इलाज तो दूर स्ट्रेचर तक नहीं मिला।

काम का बढ़ रहा बोझ

इमरजेंसी के बाहर धरने पर बैठे जेआर का कहना था कि जहां एक तरफ कहा जाता है कि देश में डाक्टरों की कमी है, वहीं दूसरी तरफ 40 से 50 हजार डाक्टर अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। उनके पूरे बैच को प्रवेश ही नहीं दिया जा रहा है। डेढ़ साल से बिना जेआर-वन के जूनियर रेजीडेन्ट दिन रात काम कर रहे हैं। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में जेआर चिकित्सकीय सेवाओं का बहिष्कार करने के लिए मजबूर हुए हैं।