अधूरा प्यार: शायद पहला प्यार पूरा न हो, पर कभी भुलाया नहीं जाता

पहला प्यार वो खूबसूरत अहसास है जो यादों में ही सही हमेशा खिले हुए फूल जैसे जीवन महकाता रहता है। और कई बार जीवन के लक्ष्य को पाने का जरिया भी बन जाता है।

अधूरा प्यार: शायद पहला प्यार पूरा न हो, पर कभी भुलाया नहीं जाता

फीचर्स डेस्क। " ये हैं आईपीएस नैना"
स्टाफ से मेरा परिचय कराया। मेरी जिंदगी का आज बहुत बड़ा दिन था। मेरी मेहनत रंग लाई।
ऑफिस में रिवाल्विंग चेयर पर बैठते ही मैं कहीं ख्यालों में खो गई।
मुझे अपने कॉलेज का पहला दिन अभी भी याद है।

 "अरे, यह स्लिम ट्रिम मैडम कौन है ? "
 "आइए ,आइए !आप अपना नाम बताइए"लड़कों के झुंड में से एक कड़क सी आवाज आई।
 " नैना", मैंने गुस्से एवं डर मिश्रित भाव से बोला।
 "गाना सुनाइए", मैं तो अमित को देखते ही रह गई।
 लंबी कद काठी, सांवला सलोना रंग , गहरी आंखें,घनी पलकें अजीब सी कशिश थी।
  " हां हां !"जल्दी करो नहीं तो डांस भी करना पड़ेगा। "अमित झुंड का सरगना बनते हुए बोला।
  "लड़की बड़ी अंजानी है
  सपना है सच है कहानी है 
 लड़का बड़ा अंजाना है 
 सपना है सच है फसाना है।".....
       किसी तरह पसंदीदा गाना गाकर मैंने अपनी जान छुड़ाई। परंतु मैं कहीं ना कहीं अमित को एक ही नजर में  ही दिल दे बैठी। वहीं से सिलसिला शुरू हुआ। उसे अपनी जिंदगी में  शामिल कर लेने के बाद, कब मैं उससे प्यार कर बैठी कुछ खबर ही नहीं। उसके बाद तो जैसे मेरी दुनिया ही बदल गई।

शायद यही पहला प्यार था!!!
उसके बाद तो मिलने का सिलसिला चलता रहा ।कभी नोट्स ,कभी लाइब्रेरी, कभी कैंटीन घंटों साथ बैठे रहते, पढ़ते भी और भविष्य के सुनहरे सपने बुनते भी।
ऐसे ही हमारा कॉलेज का अंतिम वर्ष भी आ गया। मैं बहुत खुश थी उस दिन, जब अमित मुझसे मिलने आ रहा था। सोच रही थी आज अमित शायद मुझसे प्यार का    इजहार कर देगा। मैंने भी तो कभी कोशिश नहीं की कि उसको यह इज़हार दूं कि हम भी तुमसे इश्क करते हैं। उसने मुझे बस इतना कहा,"मैं अपनी परिवार की     मर्यादाओं  की मजबूत जंजीरों को अपने प्यार के लिए नहीं तोड़ सकता। मुझे अपना एक दोस्त समझना। तुम बहुत प्रतिभाशाली हो, मैं चाहता हूं कि तुम आसमां की   बुलंदियों को छूओ।" हो सके तो मुझे माफ कर देना। इतना कहकर अमित तो वहां से चला गया। मैं घंटा भर वहीं पर बैठी रही। मैं तो जैसे आसमान से धरती पर आ   गिरी। उसके प्यार को भुलाना मेरे लिए आसान नहीं था। अमित की भी  शायद कुछ मजबूरी रही होगी। मैंने खुद से समझौता कर लिया और अपना सारा ध्यान अपनी आईपीएस की  प्रवेश परीक्षा पर लगा दिया। आज इस बात को 2 साल गुजर गए । मेरी डायरी में अमित का दिया हुआ  लाल गुलाब  सूख कर अभी भी बंद हैं। शायद सबकी किस्मत में अपना पहला प्यार पाना लिखा ही नहीं होता। मैं अपनी मंजिल पर  तो पहुंच गई। पर शायद बहुत कुछ अधूरा सा पीछे छोड़ आई हूं।

इनपुट सोर्स: रेखा मित्तल

इमेज सोर्स: गूगल