सामुद्रिक शास्त्र : गंध से जानें स्त्री के स्वभाव, पढ़ें 7 तरह के गंध से महिला के स्वभाव और चरित्र  

सामुद्रिक शास्त्र : गंध से जानें स्त्री के स्वभाव, पढ़ें 7 तरह के गंध से महिला के स्वभाव और चरित्र   

फीचर्स डेस्क। हर स्त्री के शरीर से किसी न किसी प्रकार की गंध अवश्य आती है। जिस प्रकार किसी व्यक्ति की हाथ की रेखाएं देखकर उसके स्वभाव, चरित्र व भूत, भविष्य, वर्तमान के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। उसी प्रकार किसी भी मनुष्य के शरीर और चेहरे की बनावट एवं शरीर पर प्राकृतिक रूप से बने चिह्न और चाल-ढाल से भी उसके स्वभाव की कई गुप्त बातें आसानी से जानी जा सकती हैं। इसी विद्या को सामुद्रिक शास्त्र अथवा शरीर लक्षण विज्ञान कहा जाता है।

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार हर स्त्री-पुरुष के शरीर से किसी न किसी प्रकार की गंध अवश्य आती है। पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में शरीर की गंध सूंघने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए वे इस गंध से पुरुषों की अपेक्षा अधिक प्रभावित होती हैं।

समुद्र शास्त्र के अनुसार ये गंध 7 प्रकार की होती है- कर्पूरी, कस्तूरी, पुष्पी, पुदीनार्की, ईथरी, तीव्र व पूति गंध। समुद्र शास्त्र के अनुसार वर वर्णिन्यापि न शुभा गत गंधा कर्णिकार कलिकेव- अर्थात गंधहीन स्त्री चाहे सुंदर भी हो, तो भी कनेर की कली के समान बेकार होती है।

कर्पूरी, कस्तूरी व पुष्पी गंध से युक्त नारी सौभाग्यवती व उच्च चरित्र की होती है।

पुदीनार्की, ईथरी व तीव्र गंध वाली नारी चंचल, निर्लज्ज, दंभी, क्रोधी एवं भोगी होती है। उसे मध्यम ही मानना चाहिए। सभी से हीन कड़वी (पूर्ति) दुर्गंध वाली स्त्री रूपवान होने पर भी निम्न चरित्र एवं उग्र स्वभाव की होती है।

इनपुट सोर्स : ज्योतिषाचार्य विनोद सोनी भोपाल।