अब ठेकों और भर्तियों में जातिवाद और धनबल समाप्त करके सिर्फ पात्रों को नौकरियां दी जा रही : मौर्य

अब ठेकों और भर्तियों में जातिवाद और धनबल समाप्त करके सिर्फ पात्रों को नौकरियां दी जा रही : मौर्य

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि किसानो के तथाकथित नेता राकेश टिकैत किसान आंदोलन नहीं बल्कि चुनाव आंदोलन चला रहे हैं। मौर्य ने गुरूवार को कहा कि किसानों के नाम पर जो आंदोलन बीते कई महीने से पश्चिम में चलाया जा रहा है वह किसानों के हितो के लिए नहीं बल्कि अपने हितों के लिए चलाया जा रहा है। तीन कृषि कानून से किसानो को कोई समस्या नहीं है लेकिन इसकी आड़ में श्री टिकैत और उनकी हितैषी पार्टियां सरकार को बेवजह घेरने का काम कर रही है जबकि उन्हे अच्छी तरह पता है कि अब उनकी दाल नहीं गलने वाली और उनकी साजिश का भंडाफोड़ हो चुका है।

भारतीय जनता पार्टी (भााजपा) सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुये उन्होने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश में गुण्डाराज खत्म कर दिया। अब ठेकों और भर्तियों में जातिवाद और धनबल समाप्त करके सिर्फ पात्रों को नौकरियां दी जा रही हैं। सरकार ने मेद्यावी खिलाड़ियों और छात्रों के नाम सड़के देकर उनके नाम को रोशन किया है। उनकी सरकार ने सपा की तरह किसी भी समाज के साथ बेवफाई नहीं की है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अपने मुख्यमंत्रित्व काल में जिस तरह से उन्होंने अन्य लोगों का गलाघोट कर अपने समाज को तव्वजों देकर नौकरियां दिलावाई है उसकी मिसा नहीं है। समाजवाद के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले अखिलेश यादव ने अन्य समाज को तव्वजों नहीं दी। उन्होंने रोजा इफ्तार एक सम्प्रदाय के लोगों को जिस तरह से रिझाने का फर्जी प्रयास किया है उससे अब लोग होशियार हो गये है। यही कारण है कि अब असउददीन आवैशी जैसे लोग यहां आकर अपने सम्प्रदाय विशेष की बात जोर शोर से उठाकर अखिलेश की नींद हराम कर रहे है।

उपमुख्यमंत्री ने 2022 के चुनाव के सम्बंध में कहा कि इस चुनाव में एक बार फिर भाजपा अच्छा प्रदर्शन दोहराते हुए 300 सीटें लेकर प्रदेश में सरकार बनायेगी। इस चुनाव में बहुत सी पार्टियों का वजूद खत्म हो जायेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बहादुर मुख्यमंत्री की संज्ञा देते हुए कहा कि उन्होने आंतक के पर्याय बने अंसारी बंधुओं, मध्य में आतीक अहमद, पश्चिम में चल रहे अपहरण उद्योग को समाप्त कर दिया। कानपुर के बिकरू में विकास दूबे के नाम लिए बिना कहा कि उन्होेंने अपने पूरे जीवन काल में बाहा्रणों की जमीन हड़पने और उनकी हत्या करने के अलावा किस ब्राह्रण छात्र या गरीब की मदद करके मुफलिशी की जिंदगी से उबारा। आज कुछ सियासी पार्टियां ब्राह्रण वाद की बात करके उन्हें बरगला रही हैं।