नाग पंचमी,काल सर्प दोष के निवारण का है विशेष दिन

2 अगस्त को नाग पंचमी का त्यौहार आ रहा है। इस दिन काल सर्प दोष का निवारण किया जाता है। नाग देवता की पूजा से सुख समृद्धि और संतान योग प्राप्त होता है। इस वर्ष शिव योग में होगी नाग देवता की पूजा। कालसर्प दोष के निवारण का क्या उपाय है बता रहे हैं एस्ट्रोलॉजर विमल जैन....

नाग पंचमी,काल सर्प दोष के निवारण का है विशेष दिन

फीचर्स डेस्क। भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में सावन मास के विशिष्ट अतिथियों की खास महिमा है। सावन मास का विशेष पर्व है नाग पंचमी जो कि श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विधि-विधान पूर्वक मनाने की पौराणिक परंपरा है। इस दिन भगवान शिव के दरबार की पूजा आराधना के साथ ही नाग देवता की पूजा अर्चना श्रद्धा आस्था और भक्ति भाव के साथ करने की धार्मिक मान्यता है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता माने गए हैं नाग लोक की देवी मां मनसा देवी हैं। आज के दिन मनसा देवी की पूजा विशेष लाभकारी रहती है। शास्त्रों में निसंतान को संतान की प्राप्ति भी मनसा देवी की पूजा से बतलाई गई है।

कब मनाया जाएगा नाग पंचमी का पर्व

विमल जैन ने बताया है कि नागपंचमी का पावन पर्व मंगलवार 2 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार 1 अगस्त को अर्धरात्रि के बाद 5:14 पर लगेगी जो कि मंगलवार 2 अगस्त को अर्धरात्रि के बाद 5:29 तक रहेगी। इस बार शिव योग का अनुपम संयोग बन रहा है। शिवयोग सोमवार 1 अगस्त को रात्रि 7:03 पर लगेगा जो कि मंगलवार 2 अगस्त को सांय 6:37 तक रहेगा इस योग में नाग देवता की पूजा अर्चना विशेष फलदाई होगी ।अपने धार्मिक व परंपरा के अनुसार नाग पंचमी पर घर परिवार में लोग नाग देवता की पूजा के लिए प्रवेश द्वार के दोनों ओर नाग देवता का चित्र चिपकाकर या लाल चंदन ,काले रंग अथवा गोबर से नाग देवता बनाकर विधि विधान पूर्वक दूध अर्पित करते हैं जिससे परिवार में सर्पदंश का भय नहीं रहता। नाग देवता की पूजा करने पर सुख समृद्धि बढ़ती है साथ ही खुशहाली मिलती है।

ज्योतिष के अनुसार कालसर्प योग

जन्म कुंडली में उपस्थित कालसर्प योग जनमानस के पटल पर छाया हुआ है। कालसर्प दोष का निवारण नाग पंचमी के दिन विशेष फलदाई माना गया है। व्यक्ति कालसर्प दोष का नाम सुनते ही मानसिक तौर पर भयभीत हो जाते हैं। कालसर्प दोष पर प्रकाश डालते हुए प्रख्यात एस्ट्रोलॉजर विमल जैन ने बताया कि जन्म कुंडली में 7 ग्रह सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि जब राहु केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं तो जन्म कुंडली में पूर्ण कालसर्प योग बनता है जबकि ग्रहों के अंश के अनुसार यदि कोई एक ग्रह राहु केतु की परिधि से बाहर हो तो आंशिक कालसर्प योग बनता है। राहु का नक्षत्र भरणी है इसका देवता काल माना गया है जबकि केतु का नक्षत्र अश्लेषा है और इसका देवता सर्प माना गया है।

काल सर्प दोष के निवारण का उपाय

एस्ट्रोलॉजर विमल जैन ने बताया कि सावन मास में नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग का निवारण विधि विधान पूर्वक करके इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। काल सर्प योग जहां विभिन्न प्रकार के लाभ का अवसर प्रदान करता है वहीं पर ग्रह दशा के अनुसार कई प्रकार की परेशानियों से भी गुजरना पड़ता है जबकि शुभ ग्रहों की महादशा में व्यक्ति बुलंदियों तक भी पहुंचता है। अशुभ ग्रहों की महादशा में अथक प्रयास के बावजूद उसके सपने चकनाचूर हो जाते हैं। जन्म कुंडली के अनुसार कालसर्प योग स्पष्ट होने पर उसकी शांति तत्काल योग्य विद्वान से करवानी चाहिए। जिस जातक की कुंडली में कालसर्प योग हो उसे किसी भी दशा में नाग को मारना या प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। कालसर्प योग का निवारण भगवान शिव के प्रतिष्ठित मंदिर में विधि विधान के अनुसार योग्य विद्वान से करवाना विशेष फलदाई रहता है। कालसर्प दोष के निवारण का सामान्य उपाय है चांदी या तांबे के बने नाग नागिन के जोड़े को शिवलिंग पर चढ़ा कर पूजा करने के उपरांत नाग नागिन के जोड़े को बहते हुए शुद्ध जल नदी अथवा गंगा जी में प्रवाहित कर देना चाहिए। नित्य प्रतिदिन श्रीनाग स्रोत का पाठ करना चाहिए। नाग पंचमी के दिन व्रत रखना चाहिए। इस दिन गरीबों को यथाशक्ति भोजन आदि देना चाहिए साथ ही काले कुत्ते को आटा और गुड़ मिश्रित रोटी खिलाने चाहिए। सोना चांदी या पंच धातुओं से निर्मित सर्पाकार अंगूठी दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहननी चाहिए।

नाग देवता और शिवजी की आप पर कृपा बरसे।