माता रानी का चमत्कार: राह दिखाई

घर लौटा तो उसकी रह रह कर याद आती थी, कई बार उसके नम्बर डायल करने चाहे पर हिम्मत नहीं हुई….

माता रानी का चमत्कार: राह दिखाई

फीचर्स डेस्क। दो साल की विशेष ट्रैनिंग के दौरान मुझे उस औरत से प्रेम हो गया था, उसे मुझसे हुआ या नहीं मैं नहीं जानता, पर मुझे ये आभास था कि वो मुझसे मेरी कार्यशैली से प्रभावित थी और शायद आकर्षित भी थी। मोबाइल का जमाना नहीं था, लैंड लाइन ही हुआ करते थे। ये मेरा कुसूर भी था कि मैं शादी शुदा आदमी किसी के प्रेम में न पडूँ तो बेहतर है, पर मन बहुत बेईमान होता है, मैं उसके प्रेम में पड़ गया, उसी दौरान नवरात्रि स्थापना पर मैंने दुर्गा माँ की एक बहुत सुंदर पोट्रेट बनाई थी, और उसे नोटिस बोर्ड पर चस्पा की थी अपनी अच्छी ड्राइंग की ही विशेषता थी कि मैंने नवदुर्गा का मुख उस जैसा बना दिया था, जिसे शायद उसने नोटिस किया और मुझसे कहा कि मैंने उसकी फोटो पर आभूषण लगाकर माँ दुर्गा का रूप दिया है नवरात्र समापन पर मैंने वो पोट्रेट उतार ली और उसकी एक फोटो कॉपी करवाकर मूल पोट्रेट उसे दे दी, मैंने उसका लैंड लाइन नम्बर भी रजिस्टर से कबाड़ लिया।

घर लौटा तो उसकी रह रह कर याद आती थी, कई बार उसके नम्बर डायल करने चाहे पर हिम्मत नहीं हुई, घर पर पत्नी से डर लगने लगा था कि मन की न भाँप ले ,मन में चोर था। कई बार चुपचाप ग्रुप फोटो में उसे देख लिया करता था। बहुत बैचैन रहता था लगता था उस बिन जीना सजा सा लग रहा था, खुद को समझाने का प्रयास कर रहा था पर मन से उसे निकाल न पा रहा था। समय बीत रहा था अगले नवरात्र आ गए थे मैंने घर में हमेशा की तरह माता की चौकी सजाई, उस दिन वो पोट्रेट की फोटो कॉपी भी चौकी पर रख दी, और पक्का मन बना लिया कि कल सुबह ऑफिस जाकर उसे फोन जरूर करूँगा, पूरी रात करवटें बदलता रहा, फोन करूँ न करूं असमंजस में था फोन किया तो क्या कहूँगा, उसकी आवाज सुनते ही कितनी खुशी होगी, वगैरह वगैरह फिर नींद आ गई, तड़के ही जाग खुल गई आँख खुलते ही सबसे पहले माता की चौकी के सामने गया, देखा तो दिल धक्क से रह गया, साइड की अगरबत्ती से वो पोट्रेट पूरी तरह जल चुकी थी, और ऊपर की तरफ लिखा हुआ माता रानी का श्लोक बच गया 

"या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।"

मैंने माता की चौकी को दोनों हाथ जोड़कर मस्तक उनकी चौकी के आगे झुका दिया, माता रानी ने वो पोट्रेट जलाकर मेरी 'राह दिखाई' कर दी थी। मैं शांत मन से पूजा करके ऑफिस गया और डायरी से उसका नम्बर फाड़कर फेंक दिया।

इनपुट सोर्स: संजय नायक"शिल्प"