कालभैरव अष्टमी: भगवान भैरव जी का प्राकट्य महोत्सव कल, व्रत रखने से होता है ये लाभ

श्री काल भैरव अष्टमी 27 नवंबर को है। काल भैरव की आराधना से सुख समृद्धि, खुशहाली मिलती है। श्री काल भैरव का व्रत अत्यंत चमत्कारिक है इसे करने से रोग, शोक, संताप और कर्ज से मुक्ति मिलती है....

कालभैरव अष्टमी: भगवान भैरव जी का प्राकट्य महोत्सव कल, व्रत रखने से होता है ये लाभ

फीचर्स डेस्क। हिंदी धर्म शास्त्रों में मार्गशीर्ष माह का प्रमुख पर्व है श्री काल भैरव अष्टमी। भारतीय संस्कृति में विशिष्ट माह की विशिष्ट अतिथि तिथियों पर देवी देवताओं का प्राकट्य दिवस श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाए जाने की धार्मिक परंपरा है इस बार यह पर्व 27 नवंबर शनिवार को हर्ष उमंग के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 26 नवंबर शुक्रवार को अर्धरात्रि के बाद 5:00 बज कर 43 मिनट पर लगेगी जो कि 27 नवंबर शनिवार को अर्धरात्रि के बाद 6:01 तक रहेगी। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन देवाधी देव महादेव जी काल भैरव के रूप में अवतरित हुए थे।इसलिए काल भैरव को साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। भगवान शिव के 2 स्वरूप हैं पहला स्वरूप भक्तों को अभय प्रदान करने वाले विश्वेश्वर के रूप में और दूसरा दंड देने वाले श्री काल भैरव के रूप में जो समस्त दुष्टों का संहार करते हैं। भगवान विश्वेश्वर का रूप अत्यंत सौम्य और शांति का प्रतीक है जबकि श्री भैरव जी का रूप अत्यंत रौद्र और प्रचंड है।

पूजन विधि

ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृतियों से निवृत्त होकर आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना के बाद श्री काल भैरव जी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भैरव जी को पंचोपचार द्वारा पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके साथ ही श्री काल भैरव जी को उड़द की दाल से बने बड़े , इमरती और अन्य मिष्ठान अर्पित करने चाहिए। श्री भैरव जी की प्रसन्नता के लिए ओम श्री भैरवाय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए । विमल जैन जी के अनुसार श्री काल भैरव जी अकाल मृत्यु के भय का निवारण करते हैं और रोग शोक संताप का भी शमन करते हैं। जिन्हें जन्मकुंडली में ग्रह जनित दोष शनि और राहु की महादशा अंतर्दशा चल रही हो अथवा जिन्हें जीवन में राजकीय कष्ट विरोधी या शत्रुओं से कष्ट न्यायालय संबंधी विवाद और संकट व मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा हो उन्हें भैरव अष्टमी तिथि के दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए और विधि पूर्वक पूजा अर्चना करनी चाहिए। श्रद्धालु भक्त भैरव जी की प्रसन्नता के लिए रात्रि जागरण करते है इससे अलौकिक आत्मिक शांति मिलती है साथ ही उन्हें समस्त पापों से मुक्ति भी मिलती है । भैरव जी की महिमा में श्री भैरव चालीसा श्री भैरव स्त्रोत का पाठ और भैरव जी से संबंधित मंत्र का जाप विशेष लाभकारी रहता है। जिन्हें अपने जीवन में शारीरिक मानसिक कष्ट हो या कर्ज की अधिकता से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो उन्हें भैरव जी का पूजन करना चाहिए।

क्या करें क्या न करें

आर्थिक पक्ष में कर्ज निवृत्ति के लिए श्री भैरव जी के मंत्र का जाप करना चाहिए, मंत्र इस प्रकार है ओम एम क्लीम हीम भम भैरवाय मम ऋण विमोचनाय महा महाधनप्रदाय क्लीम स्वाहा। इस मंत्र का 11,21, 31,51 या उससे अधिक संख्या में जप करना लाभकारी रहता है। जप नित्य रूप से करना चाहिए। व्रत कर्ता को दिन के समय शयन नहीं करना चाहिए। अपनी दिनचर्या को नियमित संयमित रखते हुए व्रत करके लाभान्वित होना चाहिए। काल भैरव का वाहन स्वान की पूजा करके उसे मिष्ठान खिलाया जाता है या दूध भी पिला सकते हैं। पर्व विशेष पर ब्राह्मण सन्यासी और गरीबों की सेवा वह सहायता करने से जीवन में खुशहाली मिलती है। श्री काल भैरव जी की श्रद्धा आस्था और भक्ति भाव के साथ आराधना करने से जीवन में सुख सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है।

इनपुट सोर्स: ज्योतिषविद विमल जैन, वाराणसी सिटी।