अगर आप प्रेगेनेंट हैं तो बिल्कुल न पिए प्लास्टिक की बोतल में पानी, पढ़ें क्यों ?

प्रेग्नेंसी के दौरान खराब क्वालिटी की बोतलें या बीपीए युक्त प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीना अजन्में की सेहत के लिए काफी खतरनाक है......

अगर आप प्रेगेनेंट हैं तो बिल्कुल न पिए प्लास्टिक की बोतल में पानी, पढ़ें क्यों ?

फीचर्स डेस्क। अकसर हम लोग सफर में होते हैं तो बाहर से प्लास्टिक की बोतल वाला पानी का यूज कर लेते हैं, लेकिन अगर आप प्रेगेनेंट हैं तो कोशिश कीजिये की ना लें। दरअसल रिपोर्ट्स कहते हैं कि प्रेगेनेंसी पीरियड में बोतल का पानी पीना सेहत के लिए हानिकारक होता है। इसी से जुड़े एक शोध में ये बात सामने आई कि प्रेग्नेंसी के दौरान खराब क्वालिटी की बोतलें या बीपीए युक्त प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीना अजन्में की सेहत के लिए काफी खतरनाक है। बता दें कि प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से गर्भ में पल रहे शिशु को आगे के जीवन में पेट से संबंधित कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

जिवाणुओं का संतुलन बिगाड़ देते हैं

आपको बता दें कि प्लास्टिक में पाए जाने वाले बीपीए रसायन पेट में मौजूद अच्छे और बुरे जिवाणुओं का संतुलन बिगाड़ देते हैं। इससे लिवर का भी काफी नुकसान होता है। ऐसा अमेरिका के शोधकर्ताओं का कहना है।

खतरनाक रसायनों के संपर्क में आ जाता है शिशु

शोध में ये बात सामने आई है कि अगर आप प्लास्टिक की बोतल का पानी पीती हैं तो पेट में पल रहा शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है।

दूध प्लास्टिक की बोतल में ना दें

कई बार सस्ते के चलते फ़ीमेल्स अपने न्यू ब्रोन बेबी को प्लास्टिक की बोतल में दूध पीने को दे देती हैं, जबकि ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए।

बीपीए रसायन को सोख लेता है

आपको बता दें कि BPA प्लास्टिदक के कई कंटेनरों और बोतलों में पाया जाता है। खासतौर सस्ते और खराब क्वालिटी वाले बोतलों में इसका मिलना आम है। शोध में दावा किया गया है कि ऐसे ऐसे प्लास्टिंक के बर्तनों में रखा गया खाना आसानी से बीपीए रसायन को सोख लेता है।

क्या कहता है शोध

कनाडा के कैलगरी यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता Deborah Kurrasch के अनुसार, "1,000 से ज्यादा जानवरों और 100 मानव महामारियों पर किये शोध में बीपीए के संपर्क और हेल्थ, पर असर के बीच संबंध पाया गया है।" दरअसल, कई मानव रिसर्च ने बीपीए के संपर्क और व्यवहारिक समस्याओं को संबंधित पाया है, इसलिए सुझाव देते हैं कि बीपीए ब्रेन के विकास को स्थायी रूप से बदल देता है जो कि तंत्रिका के कामकाज पर स्थायी प्रभाव का कारण बनता है।