आजादी के गुमनाम शहीदों का लिखा जायेगा इतिहास: शाह

आजादी के गुमनाम शहीदों का लिखा जायेगा इतिहास: शाह

जबलपुर। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि देश में ऐसे कई बलिदानी है, जिन्हें इतिहास में स्थान नहीं मिला। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत हम ऐसे अमर शहीदों के इतिहास को पुनर्जीवित करेंगे। शाह अमृत महोत्सव के अंतर्गत राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर जनजातीय नायकों के पुण्य स्मरण का यहां गैरीसन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि अमर शहीद शंकर शाह तथा रधुनाथ शाह जैसे वीरों के बदौलत ही हम आजादी की सांस ले रहे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तय किया है कि हम ऐसे वीरों को नमन करेंगे, जिन्हे इतिहास में स्थान नहीं मिला है। गुमनाम शहीदों का इतिहास फिर लिखा जायेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 1857 से 1947 तक जितने भी गुमनाम वीर है, उनके नाम को हम पुनर्जीवित करेंगे। जितने बलिदान हमारे जनजातीय महानायकों ने दिये उतने शायद ही किसी ने किये है। बिरसा मुंडा तथा रानी दुर्गावती को कौन भूल सकता है। इस अवसर पर उन्होने कहा कि प्रत्येक आदिवासी ब्लॉक में एक एकलव्य स्कूल स्थापित किया जायेगा। जनजातिय वर्ग के लिए अगामी 5 साल में 51 हजार करोड रूपये खर्ज किये जायेगे। जनजातिय नेताओं के बलिदान को याद रखने के लिए 200 करोड रूपये की लागत से संग्रहालयों का निर्माण किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि यह संग्राहलय छत्तीसगढ, तेलंगाना, मणिपुर, मिजोरम और मध्यप्रदेश में बनाये जाएंगे। वर्ष 2013-14 में कांग्रेस शासनकाल में आदिवासी जनजाति का बजट बजट 4200 करोड रूपये थे। मोदी सरकार ने इस बजट को बढाकर 7900 करोड रूपये किया है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि जबलपुर के आदिवासियों पर उन्होने अध्ययन किया है। इसके लिए जब जबलपुर स्थित पिसनहारी की मढिया में 16 दिन तक रूके थे। इस दौरान उन्होंने गुमनाम आदिवासी स्वंतत्रता सेनानियों के संबंध में जानकारी एकत्र की थी। उन्होने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा जनजातियों के वोटों का बंटवारा किया है। मोदी सरकार ने 49 उत्पाद के समर्थन मूल्य घोषित कर दिये है और समर्थन मूल्य पर उन्हें खरीदा जा रहा है।