Ganesh Chaturthi 2021: क्या आप भी करने जा रही है गणपति स्थापना, ध्यान रखें इन वास्तु टिप्स का

गणेश चतुर्थी पर वास्तु अनुसार करें गणेश स्थापना। मिलेगी रिद्धि,सिद्धि और होगा लक्ष्मी का वास।

Ganesh Chaturthi 2021: क्या आप भी करने जा रही है गणपति स्थापना, ध्यान रखें इन वास्तु टिप्स का

 फीचर्स डेस्क। हर साल भाद्र पद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश जी का दस दिवसीय त्यौहार हो जाता है शुरू। इस साल 10 सितंबर को पूरी दुनिया गणेश चतुर्थी का त्यौहार माना रही है। जगह जगह पंडाल सकते है। गणेश जी का अद्भुत श्रृंगार किया जाता है। गणेश जी का आह्वाहन किया जाता है। पूरा देश डूब जाता है गणपति की आराधना और भक्ति में। कई तरह के पकवान भी खिलाए जाते है। और कई लोग तो बप्पा की मूर्ति को घर में स्थापित भी करते है। पूरे जोश गाजे बाजे के साथ किया जाता है गणपति का स्वागत। पर क्या आपको वाकई पता है कि गणपति स्थापना कैसे की जाती है? अगर नहीं तो जानिए इस आर्टिकल में।

हमारी एक्सपर्ट कहती है कि हम जैसे अपने घर आए मेहमान का स्वागत करते है वैसे ही जब हमारे घर गणपति विराजते है तो उनका स्वागत होना चाहिए अदभुत। अगर आप सही तरीके से गणेश जी का स्वागत करेंगी तो यकीनन आपके घर होगा सुख समृद्धि का वास। और चारों तरफ होगी एक सकारात्मक ऊर्जा।

सजावट का है अहम रोल

जब भी हम गणपति को अपने घर में विराजित करते है तो उस स्थान को बहुत सजा देते है। जो कि अच्छी बात है। पर हमेशा इस बात का ध्यान रखें की गणेश जी के स्थान की सजावट के लिए हमेशा असली फूलों का ही प्रयोग हो। चाहे आप एक फूल ही गणेश जी को अर्पित करें पर वो असली होना चाहिए। प्लास्टिक या कागज के फूल देखने में सुंदर हो सकते है पर उनसे नेगेटिव एनर्जी निकलती है। आप केले के पत्ते या अशोक के पत्तों से भी पंडाल को सजा सकती है। क्योंकि केले और अशोक के पत्ते शुभ माने जाते है। केले में ब्रहस्पति भगवान का वास होता है और अशोक के पत्ते सभी वास्तु दोषों को दूर करते है।

ऐसी हो भगवान की प्रतिमा

आजकल मार्केट में तरह तरह की प्रतिमाएं मिल रही है। कई लोग इको फ्रेंडली के चक्कर में गत्ते, लुगदी क्ले इन सब की प्रतिमाएं भी ला रहे है।और तो और एडिबल मूर्तियां भी मार्केट में मिल रही है जो चॉकलेट, मूंग दाल इनसे बनी है। पर हमारी एक्सपर्ट कहती है कि पूजा में सदैव मिट्टी की ही मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। और अगर तालाब के किनारे की मिट्टी हो तो बेस्ट। मिट्टी की प्रतिमा से घर में सुख शांति आती है। प्रतिमा या मूर्ति हमेशा पूरी होनी चाहिए । खंडित मूर्ति की कभी भी पूजा नहीं करनी चाहिए। आप खड़ी या बैठी कोई भी मूर्ति ला सकते है घर पर । लेकिन ध्यान रहें कि गणेश जी का वाहन मूषक जरूर हो उनकी मूर्ति में। तभी मूर्ति पूर्ण मानी जाती है। गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त दिन में १२ बजकर १७ मिनट अभिजीत मुहूर्त में प्रारम्भ होगा।

दिशा बोध होना है महत्व पूर्ण

अब जब आपने पंडाल भी सजा लिया और मूर्ति भी घर ले आए। तो जरूरी है दिशा का ज्ञान होना। नॉर्थ ईस्ट दिशा पूजा पाठ के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अगर इस दिशा में आप मूर्ति न रख पाए तो ईस्ट दिशा जो कि उगते सूरज की दिशा है वो भी शुभ दिशा है। इस दिशा में आप मूर्ति की स्थापना कर सकती है। अगर आप इन दिशाओं में भी पूजा न कर सके तो उस स्थिति में नॉर्थ दिशा का चयन कर सकती है। पर साउथ दिशा कभी न चुने। साउथ दिशा में पितरों का वास होता है। इस दिशा में पूजा पाठ वर्जित होता है। अगर इनमे से किसी दिशा में मूर्ति स्थापित न हो पाए तो आप नॉर्थ वेस्ट दिशा में प्रतिमा स्थापित करें पर साउथ में कभी भी नहीं।

 पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें

  1. पूजा करते समय हमेशा अपना चेहरा नॉर्थ ईस्ट की तरफ ही रखें

  2. जब भी पूजा करे तब हमेशा स्वच्छ कपड़े पहने। और नहा कर ही पूजा के स्थान में जाएं।

  3. पूजा में रोज ताजे फूलों का ही प्रयोग करें। बासी फूल कभी भी गणपति को न चढ़ाएं

  4. गणपति को मोदक, बूंदी के लड्डू या मूंग दाल के लड्डू ही भोग लगाए। 

  5. गणपति को पूजा में कभी भी तुलसी न चढ़ाए। गणेश जी को दूर्वा चढानी चाहिए।

  6. गणेश जी की आरती पहले चरणों से शुरू करे फिर नाभी स्थल की आरती करें । अंत में चेहरे की आरती करें।

  7. साफ सफाई का विशेष ध्यान रखे। जहां गणेश जी की प्रतिमा विराजित है वहां अखंड दिया जगाए। अगर अखंड दिया न जलाए तो भी ये ध्यान रखे कि वहां अंधेरा न हो।

  8. गणेश जी की प्रतिमा को विराजित करने के बाद घर को कभी भी अकेला न छोड़े।

 

इन सभी बातों का ध्यान रखकर ही गणेश जी की मूर्ति को करें अपने घर में स्थापित। गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकानाएं । गणपति रिद्धि सिद्धि सहित आपके घर पधारे।

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