प्रारब्ध: जैसा करोगे वैसा भरोगे...

एक बेटे की चाह इंसान से क्या क्या नहीं करवा देती। जबकि सच तो ये है कि बेटियां मां के दर्द को समझती है।

प्रारब्ध: जैसा करोगे वैसा भरोगे...

 फीचर्स डेस्क। आंसू झर झर बहे जा रहे थे!!

कल्याणी देवी बहुत परेशान थी। बार-बार यही बोले जा रही थी,

"मेरा बेटा आने वाला है वह बोल कर गया है, कुछ खाने के लिए लेकर आएगा!"

 बस स्टैंड पर सुबह से कल्याणी देवी बैठी हुई थी। जब बहुत देर हो गई हो गई तो उसने पुणे जाने वाली बस के बारे में पूछा। तभी वहां पर तैनात महिला पुलिस को कुछ आशंका सी हुई। उसने जाकर कल्याणी देवी से पूछा,

  "माताजी,आपको कहां जाना है? आप किसका इंतज़ार कर रही हो?"

   "अरे,मेरा बेटा विकास मुझे अपने पास ले जाने के लिए आया है। वह पुणे में रहता है।बस आता ही होगा।"

   मैं इतने बड़े घर में अकेली रहती थी। बेटे ने बोला ,"मां ,अब तुम हमारे साथ ही रहोगी।"

  घर मकान सब बेच दिया। मुझे क्या करना था सब रुपया पैसा विकास को ही दे दिया। विकास के पिताजी के जाने के बाद मैं अकेली ही रहती थी।अब तो जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हूं ।बस बच्चों के साथ आराम से जिंदगी बसर हो जाए,और मुझे क्या चाहिए।

 सीमा जो पुलिस विभाग में पिछले कई वर्षों से कार्यरत थी उसको समझते देर न लगी। आज भी एक स्नेही मां का  बेटा उसको धोखे से उसकी जमा पूंजी लेकर ,बस स्टैंड पर अकेला छोड़कर चला गया है। महानगरों में अक्सर ऐसे केस आते ही रहते हैं जहां बच्चे बुजुर्ग होते माता पिता को अपने साथ रखना नहीं चाहते। उनकी निगाह उनके पैसे पर ही होती है ।

 सीमा ने कल्याणी देवी को पानी पिलाया और समझाने की  भरसक कोशिश की। सीमा ने उनसे विकास के बारे में पूछताछ की ,परंतु कल्याणी देवी को न तो घर का पता था और न ही उसके ऑफिस का। कल्याणी देवी ठहरी एक सीधी ,सरल ,कम पढ़ी-लिखी महिला!!!!

  सीमा बोली,"पास में ही एक नारी निकेतन है मैं आपके रहने की व्यवस्था वहां पर कर देती हूं। वहां बहुत सी महिलाएं रहती हैं जिनको अपनों ने ही बेसहारा कर दिया है। आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।"

 सीमा कल्याणी देवी का हाथ पकड़कर बहुत  स्नेह से लेकर जा रही थीं। कल्याणी देवी की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी ।मन में पश्चाताप की भावना थी।  कल्याणी देवी को मन ही मन वह बात याद आ गई कि इस बेटे की चाह में उसके परिवार वालों  ने  दो बार कन्या भ्रूण हत्या कर  दी थी।सो उसे  उस पाप की सजा तो मिलनी ही थी। आज उसे सीमा एक फरिश्ते की भांति लग रही थी जिसने उसको दर-दर भटकने से बचा लिया।

इनपुट सोर्स: रेखा मित्तल

इमेज सोर्स:गूगल