भारतेन्दु का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक: प्रो० हरेराम त्रिपाठी  

भारतेन्दु का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक: प्रो० हरेराम त्रिपाठी   
भारतेन्दु का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक: प्रो० हरेराम त्रिपाठी   
भारतेन्दु का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक: प्रो० हरेराम त्रिपाठी   

वाराणसी सिटी। खड़ी बोली हिन्दी के जनक भारतेन्दु बाबू हरिश्चंद्र की जयंती के उपलक्ष्य में हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतेन्दु जयन्ती व राष्ट्रीय पुरातन छात्र समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर "भारतेन्दु जी की राष्ट्रवादी दृष्टि" विषयक एकदिवसीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर हरे राम त्रिपाठी, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने कहा कि महज़ 35 वर्ष की अवस्था में महाविद्यालय के निर्माण के साथ साथ हिंदी गद्य साहित्य में अपने बहुमूल्य योगदान से भारतेन्दु जी युगपुरुष बन गए। अपने गद्य-काव्य और कविता के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखा। युवा पीढ़ी से आह्वान करते हुए प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि आज उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से युवा पीढ़ी को न सिर्फ राष्ट्रवाद बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान की भावना को भी सीखने की जरूरत है। भारतेन्दु बाबू की दूरदृष्टि आज भी प्रासंगिक है, सीखने योग्य है।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता प्रोफेसर सदानन्द शाही, हिंदी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने बाबू हरिश्चंद्र को 'राष्ट्रनायक' की संज्ञा देते हुए कहा कि यह भारतेन्दु जी की कृतियों की ही देन है कि आज हिंदी विश्व की श्रेष्ठतम संपर्क भाषा बनने की तरफ अग्रसर है। भारतेन्दु जी के राष्ट्रचिंतन को रेखांकित करते हुए प्रो० शाही ने कहा कि 'अंधेर नगरी' के माध्यम से बितानी हुकूमत की आलोचना और देशवासियों को कूट सन्देश संप्रेषित करने का जो दुरूह कार्य उन्होंने किया वो आज के चिंतकों और रचनाकारों के लिए एक नज़ीर है।

हरिश्चंद्र महाविद्यालय के पुरातन छात्र, वरिष्ठ अधिवक्ता व हरिश्चंद्र पुरातन छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री श्रीनाथ त्रिपाठी ने महाविद्यालय द्वारा आयोजित भारतेन्दु जयन्ती के अनवरत आयोजन संकल्प की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्थापक के प्रति आदर का ऐसा प्रमाण मिलना अमूल्य है। बनारस के धनाढ्य घराने में पैदा हुए भारतेन्दु बाबू का लगाव व समर्पण हर उस आम आदमी से था जिसमें राष्ट्र व राष्ट्रभाषा से जुड़ाव था। इस अवसर पर पुरातन छात्र एसोसिएशन की तरफ से स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

अतिथियों का स्वागत करते हुए हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अनिल प्रताप सिंह ने कहा कि संस्थापक भारतेन्दु बाबू की जयंती में दरअसल राष्ट्रीय एकता का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि निजभाषा की उन्नति की वकालत करने वाले बाबू हरिश्चंद्र भारत के एकमात्र ऐसे जन नायक हैं जिन्होंने गद्य रचना के साथ हिंदी साहित्य को तो समृद्ध किया ही उसके साथ साथ अंग्रेजी हुकूमत को भी आईना दिखाया। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ० प्रभाकर सिंह ने अतिथियों को सम्मानित करते हुए भारतेन्दु बाबू के व्यक्तित्व से युवा पीढी को जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से भारतेन्दु जी की वंशज सुश्री दीपाली चौधरी जी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ०अशोक कुमार सिंह व वरिष्ठतम प्राध्यापक डॉ० पंकज सिंह, महाविद्यालय के प्रबंधक श्री बिमल कुमार जैन ने भी भारतेन्दु जयन्ती पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर महाविद्यालय के पुरातन छात्रों को अंगवस्त्रम व मोमेंटो देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. अतुल कुमार तिवारी, डॉ०पी०के०पांडेय, डॉ. उदयन मिश्र, डॉ० बृजेश कुमार जायसवाल, डॉ० जगदीश सिंह, डॉ० देवाशीष सिंह, डॉ० विश्वनाथ, डॉ० विजय कुमार राय, डॉ० अशोक कुमार सिंह, डॉ० संगीता श्रीवास्तव, डॉ० वीरेंद्र कुमार निर्मल, डॉ० अनिल कुमार, डॉ. बृजेश जायसवाल, डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. राम आशीष, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ शिवानन्द यादव, डॉ० सीमा सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्रायें व महाविद्यालय के कर्मचारीगण मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ० ऋचा सिंह व डॉ० राम आशीष सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ० प्रभाकर सिंह ने किया।