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फीचर्स डेस्क। “माँ, देखो न! जीतू ने फिर से गुलाब का फूल तोड़ लिया, आप उसे मना क्यों नहीं करतीं” “अरे बेटी, वो भगवान् को ही तो चढ़ाता है न...फिर घर में भी कितनी सुगंध बनी रहती है”! “मगर माँ, जब चमेली और मोगरे में ढेर सारे फूल लगे हैं तो गुलाब के फूल क्यों तोड़ना..? उसमें तो फूल बहुत कम आते हैं Read more...

फीचर्स डेस्क.  कुछ किस्मत के खेल रहे यह की उनकी किस्मत में मिलना नहीं लिखा था ..लड़का और लड़की दोनों यह बात समझ चुके थे ...लड़का शादी कर चुका था ..लड़की अब भी जिन्दगी की उलझनों में उलझी थी सब कुछ पीछे छूट चुका था ...नहीं छूटा था तो बस लड़के का बिना नागा लड़की को रोज सुबह शुभप्रभात का मैसेज करना ... पर लड़की बिल्कुल जरूरी नहीं था की उस शुभप् Read more...

फीचर्स डेस्क। अरे छाया! तुम यहाँ? “हाँ ज्योति, मेरा विवाह इसी शहर में हुआ है लेकिन तुम...? “मेरा भी, छाया...”, ज्योति हँसकर बोली। बचपन की सहेलियाँ छाया और ज्योति इस समय शहर के माल में अपने-अपने पति के साथ खरीदारी करने आई हुई Read more...

फीचर्स डेस्क। फ़ारुख खालिक जी को आज ही उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति पत्र मिला। उन्होंने प्रयागराज के कटरा में रहने वाले बड़े भाईजान साज़िद को फोन करके बताया। वहाँ पर रहने के लिए कमरा खोजने के विषय में आगाह भी कर दिया। भाईजान ने कहा," क्या ज़रूरत है! मेरे ग़रीबखाने में ही रह जाना ।" "नहीं Read more...

फीचर्स डेस्क। स्वाह ,स्वाह,स्वाह की ध्वनि प्रतिध्वनि उसकी कुटिया से से आती हुई बाहर के माहौल को भक्तिमय कर रही हो ऐसा तो नहीं था क्यूँ की वो जगह भक्ति के लिए उपयुक्त नहीं थी वो जीवन के अटल  सत्य को दर्शाने वाला स्थान था। शमशान के भीतर थी उसकी कुटिया और वो थी “शमशान की सन्यासनी” पूरे माहौल में चमड़ी के ज Read more...

फीचर्स डेस्क।  विदुषी का आज ऑफिस का पहला दिन था। सुबह से ना जाने कितने कपडे निकाल चुकी थी, कभी बाल खोल रही थी कभी बांध रही थी,  गरिमा दी ज़रा देख के दीजिये ना कपड़ों के साथ की मैचिंग ज्वेलरी, मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है क्या पहनूं आज। उफ़ छुटकी तू भी न बड़ा परेशान करती है,  ऑफिस ही तो जाना है क Read more...

फीचर्स डेस्क। हाँ आज फिर ह्रदय ने उसे फिर बेपरवाह हो याद किया है। वो चौदह साल की उम्र , नयी भावनाओं का अवतरण और ऐसे में अचानक उसका सामने आ जाना। नीली जीन्स और सफ़ेद शर्ट में  और प्रथम दृष्टया मैं नाविका के कमरे में उसे देख अवाक थी पर वो इन सब से अनिभिज्ञकिसी बात पर अपनी नविका को डांटने में लगा था। संजीवनी चुप थी पर उस Read more...

फीचर्स डेस्क। तुम सच मे बहुत क्यूट हो..मासूमियत चेहरे पर साफ साफ दिखती है। आज भी ऐसे लड़के होते हैं इस पर विश्वास करना बहुत कठिन है। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ ये हो क्या रहा है ? बस जो हो रहा है उसे मैं होते रहना देना चाहता था। पता है सौरभ- जब तुम्हें पहली बार देखा था तो एक अजब सा अपनापन लगा। अभी तक मेरे मुंह से Read more...

फीचर्स डेस्क। तभी मेरा फ़ोन बजा.... "दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्कुरा के चल दिये".... निशा ने पलटकर मुझे एक नज़र देखा और सभी जोर से हँस पड़े, निशा ने भी पलटकर एक नज़र देखा और...... वो भी मुस्कुराई। फोन उठते ही उधर से आवाज़ आयी, सौरभ बोल रहे हो...जी, मैंने उत्तर दिया। मैं इन्द्रबदन शर्मा बोल रहा हूँ, सुबह आपके पापा ने नंबर दिया था, जी अंकल, नमस Read more...

फीचर्स डेस्क। मैं कुछ भी सोंचने या समझने की स्थिति में नहीं था। मेरे पास आकर उन्होंने निशा को देखा और बोले पण्डित जी... निशा उठकर बैठी और बोली तुमलोग आ गये, तभी 2 लड़कों ने आकर उसका चादर समेंटना शुरू किया एक ने उसका बैग उठाया और एक लड़की ने उसे पानी की बोतल देकर बोला - अब चलें मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि ये हो क Read more...

फीचर्स डेस्क। उसकी गोद में सिर रख कर, मैं नींद में डूब रही हूँ, या अनंत में वापस लौट रही हूँ, पता नहीं। पिछले पंद्रह साल, पंद्रह मिनिट में ही बीत गए हैं, लगता है। चार साल बाद लौटा था वह। एक हाथ में ऑर्किड का छोटा सा गुलदस्ता था, बगल में अख़बार में लिपटी पेंटिंग दबाई हुई थी, और दूसरे हाथ में समोसे का डोना था। "ये ऑर्किड्स, और ये Read more...

फीचर्स डेस्क। चौरासी घाट के बारे में जानते हो...फिर निशा ने उसी अन्दाज़ में पूँछा... नहीं, मैंने उत्सुकता के साथ उत्तर दिया। तो फिर चलो तुम्हें घाट चौरासी के दर्शन कराते हैं और रात वहीं रूकने का पूरा जुगाड़... फिर से बड़े अनोखे अन्दाज़ में निशा ने कहा... "जुगाड़" भारत में सबसे अधिक बोला जाने वाले शब्दों में से एक है, हमारे यहां तो शा Read more...

फीचर्स डेस्क। "चलो कपड़े पहनते हैं अब इश्क़ पूरा हुआ" छी.....बस यही रह गया है प्यार-मुहब्बत का पर्याय.... कहते हुये निशा ने किताबों को पास रखी मेज़ पर पटका। मैंने पीछे पलटकर देखा तो यो लगा मानो सुपरफास्ट ट्रेन का बेक़ाबू इन्जन मेरी ओर दौड़ा चला आ रहा है जिसे मैं असहाय की तरह देखने के अतिरिक्त कुछ और नहीं कर सकता था। बस लड़कों को लड़किय Read more...

वाराणसी सिटी। एक ख़्वाब थी तुम या मेरी हक़ीक़त… बस, आई… कुछ दिन ठहरी… और फिर ओझल हो गई… ऐसा लगा जैसे कोई नूर की बूंद तन-मन को भिगोकर चांद की आगोश में खो गई हो… नींद से जब जागा तो ऐसा लगा जैसे कोई शबनम का क़तरा होंठों की दहलीज़ को छूकर, मदहोश करके, मन को प्यासा ही छोड़कर बिखर गया हो… इ Read more...

कानपुर सिटी। फ्लर्टिंग करना बड़ी दिलचस्प चीज है।  वो भी तब और खास हो जाता है जब आप सामने वाले के आंखों-आंखों में फ्लर्ट करने की कोशिश करें।  इसको ऐसे समझ सकते हैं – क्या आपने कभी भी अपने लव (प्यार) को दूर से घूरा है? क्या आपने कभी दूर से ही उसके साथ आंखों से बात करने की कोशिश की? क्या कभी अपने प्यार को तब Read more...

लखनऊ। आजकल कब प्यार हुआ और कब ब्रेकअप हो गया समझ पाना मुश्किल हो गया है। प्यार में हैं तो सब अच्छा और ब्रेकअप हुआ तो रिवाल्वर रानी बन गईं मैडम और फिर बौयफ्रैंड की ऐसीतैसी कर दिया। पिछले साल कानपुर की एक युवती ने ऐन शादी के दिन अपने बौयफ्रैंड की शादी के मंडप में रिवाल्वर हाथ में ले जा घुसी और लहराते हुए बोल दिया कि उन दोनो Read more...

दिल क्यों बेचैन है, आंख नम है क्यूं… शायद दिल का कोई टांका उधड़ा है… इलाहाबाद सिटी। यू ही मेरे जेहन में ये पंक्तियां सरगोशी कर उठीं। दरअसल, बॉक्स से डायरियां और कागजों को निकालकर उनमें से कुछ चीजों को बेकार समझकर फेकनें के लिए बैठा था। सन्डे का दिन और एक लंबे अरसे के बाद ऑफि Read more...

कानपुर सिटी। क्रिसमस का फेस्टवल प्रिया अपने किसी क्रिश्चन फ्रेंड को फ़ोन पर विस कर रही थी। अभी उसने फ़ोन रखा भी नहीं था कि सामने उसकी बेस्ट फ्रेंड नीता कुछ गिफ्ट लिए खड़ी हो गई। अब प्रिया ने जल्दी से फ़ोन पर बाय बोला और तेजी से आकर नीता को गले लगा ली। थैंक्स फॉर गिफ्ट बोली लेकिन नीता ने कहा थैंक्स किसी और को बोलो इसपर हैरान होकर प्रिया ने कहा क्यों और Read more...

कानपुर सिटी।  मेरा तुम्हारा रिश्ता  शायद उन बारिश की बूंदों की तरह था, जिनको छूने की ख़्वाहिश में हथेलियां तो गीली हो जाती हैं, पर हाथ हमेशा खाली रह जाते हैं।  जाने अनजाने में तुमसे मेरा रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था, मुझे नहीं पता मैं मेरी लाइफ अच्छी थी या बुरी  तुमने मुझे बदल डाला  लेकिन शायद कुछ सालो के लिए ही।  पता है मैं Read more...

कानपुर  सिटी । आज  आपके पास टाइम नहीं है और जिस दिन टाइम होगा उस दिन शायद मै बहुत दूर जा चुकी होगी । ये शब्द उसके आज 8 साल बाद भी मेरे कानो में गुजते रहते हैं । तुमसे ल़फ़्ज़ों का नहीं, रूह का रिश्ता है मेरा..., मेरी सांसों में बसी रहती हो ख़ुशबू की तरह! Read more...

वाराणसी सिटी। वो वक्त की बेबसी या हालात की मजबूरियां। कुछ पता ही ना चला और ना जाने क्या-क्या हो गया। देखते ही देखते कब वो चार साल बीत गए कुछ पता ही ना चला। आज मुद्दतों बाद तुम्हे देखा तो दिल को लगा जैसे फिर कोई लौट आया हो। यूं आभास हुआ जैसे तुम फिर से मुझे आवाज दे रही हो की आओ अब फिर से हम एक हो चलें। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। आज तुम्हारे मुहल्ले से गुजरते हुए Read more...

भोपाल। आज के लगभग दो दशक पिछे जाकर देखें तो जब लड़कियां पिता के घर से बिदा होकर ससुराल जानें लगती थी तो उनका सारा मेकअप रोने के कारण उतर जाता था। हालांकि समय बदला और दिनों दिन लड़कियों के आंखों से आंसू कम होते गए और ससुराल पहुंचने की बेताबी बढ़ती गई। हालांकि अब भी इस मायने में  अरैंज मैरिज और लव मैरिज दोनों का टेस्ट थोड़ा अब भी अलग-अलग है। यदि Read more...

वाराणसी। वक्त का सफर...कदम-कदम पर अपना अक्स छोड़ता चला गया। कभी याद बनकर... तो कभी तुम्हारी शोखियां... कभी रंजिशे... तो कभी तकरार...कभी तुम्हारी तुनकमिजाजी तो कभी मेरी तरफ बढ़ी हुई नजदीकियां। यह सब एक साथ मुझे उन दिनों की याद दिला गईं जो तुम्हारे बाजू में मैंने एक महीनें बिताएं थे। मेरी आंखें बेताब थी तुम्हें देखने को, मेरे ख्वाब पूरे हो रहे थे तुम Read more...

लखनऊ। राज आफिस के लिए निकल ही रहा था कि पत्नी ने कहां आज आफिस से लौटते वक्त मेरे लिए हैंड बैग लेते आना। अगले महीने मायके में शादी थी। शायद सबिता को बैग की जरूरत महसूस हुई। पति ने बहुत ही उदास होकर कहा आज तो मेरे पास पैसे नहीं हैं कई दिन से साइकिल में पैडल लगवाना चाह रहा हूं लेकिन महीने के अंतिम सप्ताह के कारण पैसे किल्लत हर माह की तरह इस बार भी मन Read more...

गाजियाबाद। कॉलेज का पहला दिन मेरा नहीं उसका, वैसे भी 12वीं के बाद कॉलेज में दाखिला लेने के बाद बाजू से लेकर लास्ट बेंच तक पर बैठने वाले सभी साथी नए होते हैं। शायद ही कभी ऐसा इत्तेफाक होता होगा कि एक दो साथी अपने स्कूल के मिल जाते हों। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। मॉडल हिस्ट्री की प्रोफसर आ चुकीं थी। अचानक से दरवाजे से एक आवाज आई में आई कम इन बिल्कुल Read more...

इलाहाबाद। उसकी याद तो अब भी आती है। मुद्दत गुजर गए उससे विछड़े हुए। लेकिन उसके यादों का कारवां आज भी मेरे साथ है। फुर्सत में जब भी बैठती हूं न चाहते हुए उसकी याद आ ही जाती है। तुम बहुत जिद्दी हो कैसे ससुराल में रहोगी। ये उसकी मुंह से निकली लफ्ज घड़ी की सुई की तरह मेरे दिमाग में टन टन करती रहती हैं। अब मैं उसको कहना चाहती हूं कि आकर देखों में कैसे स Read more...

लखनऊ। बिलासपुर रेलवे स्टेशन रात कोई 11 बजें होंगे। छत्तीसगढ़ स्टेट का एक खूबसूरत रेलवे स्टेशन आप कह सकते हैं। यूपी के इलाहाबाद होते हुए लखनऊ तक आना था। रिजर्वेशन था नहीं इसलिए सीट की फ्रिक हो रही थी, उपर से ट्रेन करीब 2 घंटे लेट थी। घर की यादों में खोए, आफिस के दोस्तों को मिस करने का भी शायद यही टाइम था। प्लेटफार्म पर जिस जगह पिछले 3 घंटे से बैठे थ Read more...

नई दिल्ली। हर पल बदलते हैं। दिन बदलते हैं। हफ्ते बदलते हैं इन सब के साथ लो देखते-देखते ही ये साल भी बदल गया। साल 2016 अलविदा कह रहा है और 2017 हैल्लों बोल रहा है। बिते वक्त में क्या कुछ हुआ ये तो हम सब जानते हैं, पर आने वाले बक्त में क्या होगा, ये सिर्फ हमारा काम और हमारी मेहनत ही हमे बता सकती है। हम हर दिन सुबह उठते हैं और सोचते है कि शाम होने से Read more...

नई दिल्ली। मैं नहीं जानती थी कि प्यार क्या होता है। सिर्फ साथ में पढऩे वाली दोस्तों के मुंह से सुनी थी। हां कुछ ऐसी भी दोस्त थी जिन्हें किसी से प्यार था। लेकिन मै इस शब्द से काफी दूर थी। बात आज के 10 वर्ष पहले की है। फरवरी का महीना था। मैं प्रियंका (मौसी की लड़की) की शादी में दिल्ली गई थी। लगभग एक सप्ताह पहले पहुंच चुकी थी। मॉम-डैड शादी दो दिन पहले Read more...