पापा की गर्ल फ्रेंड

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फीचर्स डेस्क। "चलो खुश तो हैं पापा, तुम ठीक कहती थी अंजू;  कि पापा के लिए एक  मोबाईल ले  लिया जाए,  मगर मुझे लगता था पापा जी सीख ही नहीं पायेंगे पर देखो आजकल  बिजी रहते है और वो रोज ठीक से तैयार भी होते है। एकदम टिपटाप  और सेल्फी लेना भी सीख गये है।"

"हाँ आजकल दादू दाढ़ी  भी रोज बनाते है पहले तो मुझे दाढ़ी चुभा कर के गुदगुदी करते थे।"

यह सुनते ही सब हस पडे।

पापा के नहाने जाते ही मैसेंजर पर बीप की आवाज आयी।

अरे पापा मैसेंजर पर भी हैं। अंजू अपने आप को  मैसेंजर से मैसेज पढने से रोक न सकी  लिखा था, "मनोज आज लाईबेरी पर आ रहे न जरुरी काम है।"

पढते ही अंजू सोच मे पड गयी कहीं पापा जी को कोई लडकी बेवकूफ तो नहीं बना रही।उसने पीछा करने का फैसला कर लिया। 

लाईबेरी में पेपर खोल कर  बैठ गयी 

सामने एक बुजुर्ग सी महिला आकर  बैठ गयी।

उसने टिफिन  भी रखा था।

सामने से मनोज को देख वह उठ खडी हुई।

 "आज भी आप वैसे  के वैसे लग रहे है।"

"मगर तुम जल्दी बूढी हो गयी सरिता।"

"अब आप मुझ में 40 साल पहले बाली सरिता खोजोगे तो कहाँ से मिलेगी?"

दोनो उठकर बाहर चले गये।

अब ये अंटी कौन है अंजू सोचने लगी 

शायद पापा की गर्लफ्रैंड।

उसे खुद पर हंसी आ गयी चलो देर से ही सही माँ के जाने के बाद अब पापा फिर जी रहे हैं।

खुश तो हैं और ये अंटी भी क्योंकि  उसकी सफेद सी साडी सूनी मांग और कलाई उसका भी अकेलापन बयान कर रही थी।

मगर इस राज को राज ही रखना होगा सोचते हुए अंजू मुस्करा उठी।

इनपुट सोर्स : ऋचा यादव, बिलासपुर छत्तीसगढ़।