परछाई !

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फीचर्स डेस्क। मैं पहले भी इस विषय पर लिखना चाह रही थी लेकिन एक हिचक के कारण नहीं लिख पा रही थी, मुझे लग रहा था कि सब मुझे अंधविश्वासी कहेंगे.. लेकिन शुक्रिया इस मंच का जिसने मुझे ये घटना लिखने के लिए प्रेरित किया। कहते है कि बहू और ससुर का क्या रिश्ता और वो भी ऐसे ससुर जिन्हें कि बहू ने देखा तक नहीं था, मेरी शादी के चार पांच साल पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लेकिन विधि की विडंबना देखिये वही ससुर आज मेरी बेटी के रूप में उपस्थित है।  बात मेरी बड़ी बेटी के जन्म से पहले की है। पितृपक्ष शुरू होने वाले थे हमारे यहां जिसके सास या ससुर में से कोई एक भी नहीं होता तो उसे पितृपक्ष में सिर नहीं धोना होता। जिसको कोई समस्या आ जाए तो वो पितृपक्ष की अष्टमी वाले दिन बारह बजे के बाद सिर धों सकता है।

मैने शाम के छह बजे के करीब सिर धों कर नहाया और सोचा कि लाओ महावर ही लगा लेती हूँ, महावर लगाने के लिए मैं घुटने को मोड़ कर बैठी, महावर तो मैने किसी तरह लगा लिया लेकिन उसके बाद जो मेरे पेट में भयंकर दर्द हुआ है कि बता नहीं सकती। मेरा आठवाँ महीना चल रहा था | मेरे पति कि touring जॉब थी वो बाहर गए हुए थे। मैने नीचे जा कर मम्मी को बताया मम्मी बोली बार - बार ऊपर नीचे मत करो चुपचाप भाभी के कमरे में ही लेट जाओ। भैया भाभी कही गए हुए थे।

मैं भाभी के कमरे में दरवाजे की तरफ सिर करके लेट गई। अचानक मुझे लगा कि कोई कमरे के साइड में जो गैलरी है वहाँ से निकला है जिसने की ग्रे कलर का पठानी सूट जैसा कुछ पहना है, मुझे लगा कि ये मेरा वहम है, मेरे इतना सोचते ही वो बंदा उसी दिशा से फिर से निकल कर गया। मैने मम्मी को आवाज दी मम्मी को पूरी बात बताई। पहले तो मम्मी मानने को ही नहीं तैयार हुई पर जब मैंने ज्यादा जोर दिया तब बोली कि हाँ तुम्हारे पापा के पास ग्रे कलर का पठानी सूट तो था बल्कि जिस दिन उनकी मृत्यू हुई थी उन्होंने वही पठानी सूट पहना था।

 बात आई गई हो गई उसी रात में मैं मम्मी के साथ उनके कमरे में ही फोल्डिंग डाल कर सोई।  रात में मैंने सपना देखा कि (मेरे घर के सामने तब एक मेडिकल स्टोर था) मैं मेडिकल स्टोर में खड़ी हूँ पापा मुझे हाथ पकड़ कर अंदर ले आए, एक दम से मेरी नींद खुल गई  और नींद खुलने के बाद बाकायदा मुझे लग रहा था कि कोई मेरी चारपाई में बैठा है। मैं चारपाई के साइड में दीवान में लेटी मम्मी को आवाज देने कि कोशिश करती हूँ लेकिन जैसे मेरा मुंह किसी ने दबा रखा हो, आवाज ही नहीं निकल रही थी, थोड़ी देर बाद मुझे अह्सास हुआ कि कोई मेरी चारपाई से बाकायदा उठा है।  मैने सुबह मम्मी को पूरी बात बताई वो बोली शायद तुम्हारे पापा वापिस आना चाहते है।  आज भी मुझे वो घटना याद आती है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अब इसे क्या कहा जाए एक ससुर की आत्मा जो कि अपनी बहू के गर्भ में आ गई और उसने बहू का मान भी रखा पूरी थैली सहित ही बाहर आए और बाहर आ कर डॉक्टर्स ने थैली को पिन मारकर मेरी बेटी को बाहर निकाला। विज्ञान के इस युग में कोई भी मेरी बात का विश्वाश नहीं करेगा लेकिन कुछ तो है जो कि मुझे इस घटना को सत्य मानने के लिए प्रेरित करता है।

इनपुट सोर्स : हेमा त्रिवेदी, नई दिल्ली।