पहले तो कभी कभी गम था....

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फीचर्स डेस्क.  कुछ किस्मत के खेल रहे यह की उनकी किस्मत में मिलना नहीं लिखा था ..लड़का और लड़की दोनों यह बात समझ चुके थे ...लड़का शादी कर चुका था ..लड़की अब भी जिन्दगी की उलझनों में उलझी थी सब कुछ पीछे छूट चुका था ...नहीं छूटा था तो बस लड़के का बिना नागा लड़की को रोज सुबह शुभप्रभात का मैसेज करना ...

पर लड़की बिल्कुल जरूरी नहीं था की उस शुभप्रभात का रोज रिप्लाई करे ...शुभप्रभात का रिप्लाई उसके मूड पर होता है अगर वो खुश हुयी तो अक्सर रिप्लाई कर देती थी साथ छोटी मोटी बातें..कभी दुःखी होती परेशान होती तो दो तीन दिन रिप्लाई नहीं करती ...पर कभी कभी परेशान होने पर या सुसाइड करने का मन करे तो सिर्फ उस लड़के को बताती थी ...

जिसके बदले में अक्सर लड़का उसे इधर उधर की बात कर मुद्दे से भटका देता था ...बीच में शायद शून्य था ...शायद सब कुछ था या अब कुछ भी नहीं था और ऐसे ही एक दिन जब लड़के ने लड़की को शुभप्रभात भेजा ..तो लड़की ने भी तुरंत रिप्लाई किया ...और बोली 

" पता है हम गाना सुन रहे सुबह सुबह "

 " बहुत मजे मजे के आ रहै "

 " कौन कौन से सुने"

 " बहुत सारे "

" विवाह का मुझे हक है "

" माधुरी वाला ले चल वहाँ जो मुल्क तेरा है जालिम जमाना दुश्मन मेरा है"

" दिल चाहता है कभी ना बीते चमकीले दिन "

" और मेरा फेविरिट तेरा ना होना जाने क्यों होना भी है "

अरे वही गीत वाला ...याद है ना जब वी मेट 

" सब अच्छे है " 

लड़के ने टाइप किया और साथ यह भी 

हम तो रोज जब अपनी पत्नी को ड्राप करते ...आते समय गाने सुनते ही हुए आते है..

आज अल्ताफ राजा को सुन रहा था..

लड़की के हाथों ने कीबोर्ड पर जुम्बिश की ...

" बढ़िया "

" तुम तो ठहरे परदेशी , साथ क्या निभाओगे "

" है ना "

लड़के ने भी लिखा ...

" हाँ "

" पहले तो कभी कभी गम था ,अब तो हर पल ही तेरी याद सताती है "

लड़की 

" जे वाला सुपर है "

अब दोनों के बीच ब्लैक होल है ....किसी ने किसी से कुछ नहीं कहा ...देखा जाये तो सब कुछ कह दिया ना ...

कंटेंट सोर्स : नेहा अग्रवाल “नेह " लखनऊ सिटी.