'पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म'

by Focus24 team

बीकानेर सिटी। मानव जीवन की वास्तविकता को अपने अंदर समेटे हुए "भगवतीचरण वर्मा" का उपन्यास "तीन वर्ष " 1936 में प्रकाशित हुआ। इस उपन्यास में भगवती बाबू ने आधुनिक समाज का चित्रांकन किया है। इसमें वह संसार चित्रित है जिसमें आज का मनुष्य जीवित है। आधुनिक व्यवस्था ने मनुष्य के अन्दर जो अर्थ- पिपासा भर दी ह Read more...

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by Focus24 team

प्रयागराज सिटी। चुनावों का दौर शुरू है। तमाम पार्टियां अपने को जनता का सबसे बढ़िया हितैषी साबित करने पर अड़ी हैं। इस कारण वे आपस में एक दूसरे के लिए कितने कटु वाक्युद्ध कर जाते हैं भगवान बचाए। जहाँ सत्तर साल बाद सत्ता में आकर जनता में नवीनता का विकास सुख देने के वादे। वहीं दूसरी ओर विगत में हुई लूटपाट और गलतियों के लिए Read more...

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by Focus24 team

प्रकृति हूँ मैं रचती हूँ , रोज सर्जन के नए रूप सहेजती हूँ तुम्हारे श्रंखलित वजूद को अपने मे।   फिर जननी बन दर्द की कोख से जन्म देती हूँ तुझे वक्ष से उत्सर्जित लहू को दुग्ध में उतार मिटाती हूँ क्षुदा तेरी।    भूला देती हूँ अपनी रातों की नींद  और दिन के सारे प्रहर तेरी परवरिश में। &n Read more...

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by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। क्यों रे ! मुहझौंसा कुछ काम-धाम नहीं है सारा दिन बैठा रहता है। चल बहुत काम पङा है ये बर्तन माँझ देना और कपङे धोकर डाल देना,एक औरत कितना खटू? सारा भार मुझ पर डाल कर मर गई कलमुंही। "निताई" हाँ यही नाम था उसका, हे! ईश्वर किसी बालक की माँ ना मरे नही तो बङी दुर्गती होती है उसकी। सौदामिनी... चाची है नि Read more...

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by Focus24 team

माँ कहती घर की आभा तू ,  पापा कहते ज्योति प्रभा तू।  पढ़ लिख के आगे तू बढ़ना ,  उच्च शिखर ऊपर तू चढ़ना।  समय पुराना बीत गया अब ,  रचना तू इतिहास नया सब। डरकर सबसे कभी न रहना ,  अनचाहा तू जुल्म न सहना।  नवल पाठ पढ़ना है तुझको ,  नया सपन ग Read more...

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by Shivangi Agarwal

बीकानेर। कल करवा चौथ का त्योहार था। सुहागिनों के सुहाग का दिन। मेरा मन न जाने कहाँ - कहाँ भ्रमण कर रहा था। कभी किसी टूटे सपने में उलझ जाता तो कभी किसी चाँद के दूर जाने की कल्पना में खो जाता। क्यों? आखिर क्यों ऐसा होता है? कभी अपने आप से प्रश्न करती तो कभी चाँद से पूछने की इच्छा होती, पर न जाने क्यों मन की बातें मन में ह Read more...

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