'प्रवचन-सत्संग'

by मन तो चंचल है,  मन का क्या : साध्वी अंजू

खामगांव, महाराष्टï। मन के जाने राम हैं, मन हैं तो काम हैं। मन ही उपद्रव हैं ,मन ही चंचल हैं । मन ही बदमाश हैं ,मन ही सयाना हैं। मन ही चालक हैं ,मन ही शैतान हैं। मन ही संगीत हैं, मन ही सम्राट हैं। मन ही नृत्य हैं, मन ही ध्यान हैं। मन ही हार हैं मन ही जीत हैं । मन हैं तो संसार हैं मन नहीँ तो हर सुख मिट्टी हैं। मन नहीं तो कुछ नहीं ,मन ही अति हैं Read more...

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by "विरह क्या हैं ?"

खामगांव। विरह के बारे में क्या कहा जा सकता हैं ।विरह को अनुभव किया जाता हैं । विरह कहाँ कोई उपदेश हैं ,विरह कहाँ कोई शब्दों का माया जाल हैं , विरह कहाँ कोई कोई लिखा जीवन का सार हैं ।विरह कहाँ कभी बोलता हैं ,विरह क्या किसी की सुनता हैं । विरह तो आँसुओं का समंदर ,विरह अकेला रोता हैं और अकेले में ही जागता हैं । विरह को वही जान सकता हैं जो प्रेम क Read more...

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by परमेश्वर से प्रार्थना मौन होकर करें : साध्व अंजू 

खामगांव। प्रार्थना मौन रह कर कि जाती हैं । प्रार्थना जितनी मौन होगी उतनी ही गहरी भी होगी। कहा गया हैं बँद मु_ी लाख की खुल गई तो खाक की । बोलने से बात उथली हो जाती हैं। उसका मर्म खत्म हो जाता हैं । मौनी की बात कीमती होती हैं और बोलते से ही दो कौड़ी की हो जाती हैं । प्रार्थना बताई नहीँ जानी चाहिये ।बताने से ईश्वर पर प्रभाव खत्म हो जाता हैं। Read more...

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