'कहानी'

by Shivangi Agarwal

फीचर्स डेस्क। परसों साँझ को एक तोहफ़े ने घर पर दस्तक दी ।लिफ़ाफा खोलते ही कुरकुरी, करारी महकदार पन्नों की फड़कन ने मुस्कान खींच दी चेहरे पर। वैसे भी दर्द से कराहते हुये किसी तोहफ़े को खोलना बत्तीसी निपोरने की वज़ह बन जाता है।  यह पुस्तक जिसका नाम "इक क़तरा ख़्वाब का" ,जिसे अपने अनुभवों की स्लेट पर ,भावनाओं की खड़ Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by manish shukla

फीचर्स डेस्क। बार बार बेटे और बहू को देखकर सुषमा जी की आँखें छलछला जा रही थी ,आज दोपहर घन्टी बजने पर जब उन्होंने दरवाजा खोला ,तो उन्हें अपनी आँखो पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। आने वालों ने अपना सामान अन्दर लाकर रखा। तभी शर्मा जी अपना चश्मा साफ करते हुये बाहर आ गये। वो भी हैरानी की इन्तहा पर थे। तभी सुषमा जी चहकते हुये बोल Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। आज सुभि की पहली रसोई की रस्म थी ।और उसे बीते हुए कुछ दिन याद आ रहे थे। सुभि के सभी घर वाले बहुत खुश थे ।और होते भी क्यों ना आखिर इतने अच्छे घर में रिश्ता हुआ था सुभि का ,पर सुभि जितनी तेजी से सपनों को संजो रही थी ,डर उससे कहीं ज्यादा तेजी से उसके अन्दर घर करता जा रहा था ,पापा की राजकुमारी को पापा ने कभी रस Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by manish shukla

फीचर्स डेस्क। इस चारदीवारी में वह दोनों ही थी। पहली ने दूसरी से पूछा, "कहो, कैसे आ पहुँची?" दूसरी ने संशय से पहली को देखा और एक कोने में संकुचित हो दीवार से पीठ सटा कर बैठ गई। सिर घुटनों में फँसा था और दोनों हाथ कानों पर! अलसुबह सूर्य की सुनहरी किरणों के धरा को उजियारा करने से पूर्व ही वह उठ जाती। पशुओं की सान Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Focus24 team

फीचर्स डेस्क। आज हाथ में नियुक्ति पत्र लेकर, आँखों में खुशी के अश्रु लिए संदीप आत्मचिंतन में डूबा हुआ था। संघर्षमय जीवन के क्षण चलचित्र के समान सजीव हो उठे थे। उन घटनाओं से सीख लेकर उसने यह संकल्प लिया कि अर्जित धनका दस प्रतिशत वह स्वयं के लिए सुरक्षित रखेगा। वह उन्हें अपने अन्य कर्त्तव्यों के नाम पर या स्व-सम्बन्धों के Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh

by Vineet dubey

फीचर्स डेस्क. इस एकांत कक्ष में निर्णायक मंडल के जज और  चार सदस्यों में मीटिंग चल रही थी. आज यहाँ दो महीने पहले घोषित ‘भारतीय संस्कृति बचाओ’ विषय पर राष्ट्र-स्तरीय काव्य प्रतियोगिता का अंतिम निर्णय होना था. सदस्यों ने पूरे देश से आई हुई प्रविष्टियों का गहन अध्ययन करके उत्कृष्ट रचनाओं के रचनाकारों  Read more...

h h h h h h h h h hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh h h h h h h h h h h hhhhhhhhhh