'कहानी'

by Focus24 team

कानपुर सिटी। एक बार एक बिज़नेसमैन जो कल तक एक सफल उद्धोगपति था अचानक किसी परेशानी से उसका बिज़नेस डूब गया और उस पर बैंक का कर्ज़ा भी हो गया और अब उसके पास कोई चारा नहीं बचा था। बैंक और सारे लेनदार उसे लगातार पैसे की भरपाई के लिए बोल रहे थे। अब तो उसे अपनी जिंदगी अंधेरे में नज़र आ रही थी।  एक बार सुबह पार्क में घूमत Read more...

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by Focus24 team

कानपुर सिटी। सिटी के फेमस जगह पर एक मोमोज की दुकान है। दरअसल, प्रतिष्ठा पर असर न पड़े इसलिए नाम बताना ठीक नहीं है। अक्सर हम भी भूख मिटाने के लिए यहाँ जाते हैं। कुछ समय पहले मेरी एक दोस्त ने बताया कि मोमज वाले अंकल का व्यवहार सामान्य नहीं है। उनके बात करने का तरीक़ा, ग्राहकों से व्यवहार में यूं तो मृदुता है, लेकिन उनका लड़क Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर सिटी। आजकल एक सवाल जेहन में बार - बार पंच कर रहा है।  क्या सच में सोशल साइट्स पर टाइम स्पेंड करने से तन्हाई दूर कि जा सकती है।  कई लोगो से इस बारें में बात किया पर सही जवाब के तलाश अभी भी है।  इसी को लेकर सोशल साईट के एक्सपर्ट सारिका कोठारी ने एक स्टोरी सुनाई जिसको पढ़कर आपको कुछ हद तक बात समझ में आ जाएगी।  दरअसल, राजेश भाटिया (बदल हुआ नाम ) Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर सिटी। एक मौसम के रंग हजार, लोगों के अपने चश्मे, अपनी नजर और हर मौसम की अलग तासीर। थोडा सा आलस्य देती गर्मियों की दुपहरी, रिमझिम फुहारों से तन-मन को सुकून देती बारिश और अब सर्दियों का मौसम…। वैसे तो बदलाव प्रकृति का नियम है और हर मौसम की अपनी खूबियां हैं। सर्दियों में धूप में बैठकर बुनाई, चाय की चुस्कियों के साथ गपशप और शाम ढलने पर अला Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर। नौकर सेठ जी से पूछ रहा था कि आपके पास इतनी दौलत है, मेरे पास नहीं आख़िर इसकी क्या वज़ह है?  सेठ जी समझा रहे थे कि पैसा पैसे को खींचता है। रात में सेठ जी सो गए तो नौकर अपनी सालों की कमाई का एक चांदी का सिक्का लेकर सेठ जी की तिजोरी वाले कमरे पास गया और बाहर दरवाजे की दरार के पास अपने सिक्के को रख कर बैठ गया। वो मन ही मन सोच रहा Read more...

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by Renu mishra

कानपुर सिटी। नदी के किनारे एक पेड़ पर बंदर और बंदरिया रहते थे। पेड़ फलों से लदा था। दोनों दिन भर फल खाते, इस डाल से उस डाल पर झूलते। पर दोनों दुखी थे। दोनों आपस में बातें करते कि बहुत साल पहले महान वैज्ञानिक डॉर्विन के ज़माने में कई बंदर आदमी बन गए। पता नहीं उन लोगों ने किस पेड़ का फल खाया कि वो बंदर जन्म से आज़ाद हो गए। बंदरिया भी सोचती कि सचमुच उ Read more...

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