'कहानी'

by Renu mishra

कानपुर सिटी। फिल्म शुरू हो गई थी। सितारों के नाम चल रहे थे, बत्ती बंद हो चुकी थी। मैंने देखा कि एक लड़की अपने बूढ़े मां-बाप के साथ हॉल में घुसी। मां को चलने में तकलीफ थी। वो बेटी का सहारा लेकर अंधेरे में आगे बढ़ रही थीं। सिनेमा हॉल में बैठे सभी दर्शकों का ध्यान फिल्म की ओर था। एक भी सीन मिस न हो जाए। अंधेरे में अ Read more...

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by Focus24 team

कानपुर सिटी। दो फ़कीर थे। उनकी आपस में गहरी दोस्ती थी पर दोनों की शक्ल-सूरत और खान-पान में बड़ा अन्तर था। एक मोटा-मुस्टंड़ा था व दिन में कई-कई बार खाने पर हाथ साफ़ करता था। पर दूसरा कई-कई दिन उपवास करता था, इसलिए वह दुबला-पतला था। एक बार राजा के लोगों को इन फ़कीरों पर शक हुआ कि शायद ये किसी दुश्मन के जासूस हैं। बस, फिर क्या था ? दोनों को Read more...

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by Priyanka Shukla

कानपुर सिटी। गाँव का जीवन शहर की चमक- धमक की तुलना में फीका और नीरस लगने लगा था यहाँ बाज़ार थे , सिनेमा हॉल थे ,हेयर सलून थे ,यहाँ बड़े वस्त्रागार और टेलर थे जो बंबई ( मुम्बई ) के फैशन की हु बहू नकल कर दिया करते थे और सबसे बड़ी बात यहाँ फैशन के प्रति सजक नर –नारी थे । कॉलेज में मेरी कक्षा में एक अघोषित अलीट फैशन ग्रुप था इसकी सदस्यता हर ऐरे Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर सिटी। आजकल एक सवाल जेहन में बार - बार पंच कर रहा है।  क्या सच में सोशल साइट्स पर टाइम स्पेंड करने से तन्हाई दूर कि जा सकती है।  कई लोगो से इस बारें में बात किया पर सही जवाब के तलाश अभी भी है।  इसी को लेकर सोशल साईट के एक्सपर्ट सारिका कोठारी ने एक स्टोरी सुनाई जिसको पढ़कर आपको कुछ हद तक बात समझ में आ जाएगी।  दरअसल, राजेश भाटिया (बदल हुआ नाम ) Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर सिटी। एक मौसम के रंग हजार, लोगों के अपने चश्मे, अपनी नजर और हर मौसम की अलग तासीर। थोडा सा आलस्य देती गर्मियों की दुपहरी, रिमझिम फुहारों से तन-मन को सुकून देती बारिश और अब सर्दियों का मौसम…। वैसे तो बदलाव प्रकृति का नियम है और हर मौसम की अपनी खूबियां हैं। सर्दियों में धूप में बैठकर बुनाई, चाय की चुस्कियों के साथ गपशप और शाम ढलने पर अला Read more...

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by Neeraj tripathi

कानपुर। नौकर सेठ जी से पूछ रहा था कि आपके पास इतनी दौलत है, मेरे पास नहीं आख़िर इसकी क्या वज़ह है?  सेठ जी समझा रहे थे कि पैसा पैसे को खींचता है। रात में सेठ जी सो गए तो नौकर अपनी सालों की कमाई का एक चांदी का सिक्का लेकर सेठ जी की तिजोरी वाले कमरे पास गया और बाहर दरवाजे की दरार के पास अपने सिक्के को रख कर बैठ गया। वो मन ही मन सोच रहा Read more...

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