Valentine Special 2019: लेट और लव मैरेज को स्वीकारने लगे हैं सोसायटी के लोग

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6th February, 2019, Edited by Neeraj tripathi

फीचर्स डेस्क। आज से 2 दशक पीछे तक की बात करें तो 16 साल के आस पास लड़कियों के हाथ पीले कर दिए जाते थे। उसके पहले तो और कम उम्र में। लेकिन आज हमारी सोसायटी में बड़ी उम‘ की कुंवारी लड़कियां अपने लाइफ को अपने तरीके से जीती दिखाई देती हैं, आज उनके सामने समाज का दबाव धीरे-धीरे ही सही पर कम होते दिखाई पड़ रहा है। हलाकि 60 साल या इसके उपर के बड़े-बुज़ुर्गों के सामने से गुजरती हैं तो उनके चेहरे पर बरबस ही आश्‍चर्य की लकीरें खिंच आती हैं। बात अलग है कि की वे मुंह से कुछ न कहें। पर वाकई यह एक बड़ा बदलाव है। इसी सोसायटी में अब 25-30 वर्ष की बिन ब्याही लड़कियां आत्मसम्मान के साथ जी रही हैं।  

कुछ ही समय पहले हुए एक सर्वे के अनुसार, शहरी लड़कियों को अब शादी की कोई जल्दी नहीं है।  आज की ये लड़कियां अपने करियर को लेकर एक्टिव हैं अपने पैरों पर खड़ीं होना चाहती हैं। अब पैरेंट्स की बात करें तो जरुर कही न कही “लकीरे चिंता की” दिखाई पड़ती हैं पर ये लड़कियां इस बात को लेकर न तो इस बात से चिंतित हैं, न ही किसी प्रकार का अपराधबोध महसूस करती हैं, बल्कि अपने कुंवारेपन को ख़ूब एंजॉय करती हैं और शादी के मंडप में क़दम रखने से पहले विवाहित जीवन के हर पहलू पर भलीभांति विचार करना चाहती हैं। उनके लिए नारी जीवन का एकमात्र लक्ष्य शादी नहीं है।

दरअसल, आज पढाई और करियर की सोच को लेकर जीने वाली लड़कियों को जाने-अनजाने ही सही पर पैरेंट्स का भी साथ मिल रहा है। कल तक सामने नजर झुकाए खड़ी रहने वाली लड़कियां आज पिता के साथ मिलकर उनका सहयोग तो कर ही रहीं हैं साथ में अपनी बात धडल्ले से बोल पा रहीं हैं। और ये बदलाव की बात करें सोशल एक्सपर्ट मानते हैं कि लड़कियों के दृष्टिकोण पर ध्यान दिया जाए तो उनमें विवाह की जल्दी न होने के कई ठोस कारण हैं, जैसे- शिक्षा सबसे प्रमुख कारण है लड़कियों का शिक्षित होना।  शिक्षा ने न स़िर्फ लड़कियों को, बल्कि समाज की सोच को भी परिवर्तनशील व व्यापक नज़रिया प्रदान किया है।  आत्मनिर्भरता शिक्षा के कारण लड़कियों की विचारशक्ति व सोच में बदलाव आया है, उनमें आत्मविश्‍वास बढ़ा है।  

वहीँ यह समाज अब प्रेम विवाह को धीरे-धीरे स्वीकारने लगा है। आज बच्चों की खुशी देखी जा रही है।  कभी इसे अपराध के श्रेणी माना जाता रहा। लेकिन वक्त के साथ लोगो का नजरिया भी बदल रहा है।  शायद इसे तरक्की, आत्मनिर्भता और विश्वास का नमूना कहा जा सकता है।