सिंगल मदर होना मतलब इतनी सारी जिमेदारियां, अभी पढ़े एक्सपर्ट के सुझाव !

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4th April, 2019, Edited by Shikha singh

फीचर्स डेस्क। किसी भी फिमेल के लिए सिंगल मदर होना बहुत टफ काम है।  “लिव इन रिलेशन” या कभी-कभी मां बनने से पहले हसबैंड से अलग हो जाना अगर ऐसा होता है तो ऐसे में मानसिक, आर्थिक समस्याओं के साथ छोटे बच्चे को अकेले पालना कठिन काम है। ऐसे में इस सब्जेक्ट पर सुझाव देने के लिए हमारे साथ हैं लखनऊ सिटी की डॉ. अमृता जैन गायनोलाजी...  

गोद में उठाना

आपका बच्चा छोटा है तो नाजुक भी होगा, ऐसे में आप कभी-कभी बच्चे को छूने या गोद में उठाने से घबराती हैं पर ऐसा कुछ नहीं है। थोड़ा गर्दन की पेशियां कमजोर होती हैं,  इसलिए उसे गोद में उठाते समय उस की गरदन को सहारा दें।  अपने कंधे पर उस का सिर टिकाएं और दूसरे हाथ से गोद में पकड़ें।  

दूध पिलाना

सबसे अहम् बात आती है बच्चे को दूध पिलाना। इससे बच्चे का विकास तो होता ही है साथ में उसका मा के साथ रिश्ता मजबूत होता चला जाता है। ऐसे में यदि आप पहली बार माँ बनी हैं और आपको कुछ खास जानकारी नहीं है तो दोस्तों से बात कीजये खासकर उनसे जीनको नर्सिंग का अनुभव हो।  

मालिश पर खास ध्यान

बच्चा नाजुक है उसको थकान बार-बार लग सकती है। ऐसे में आप उसको मालिश करेगीं तो बच्चे को थोड़ा आराम मिलेगा। साथ ही जब उसको आराम मिलता है तो उसको अच्छी नींद आती है, वह शांत रहता है।  

बाथिंग के टाइम अलर्ट रहें

आपको बच्चे को नहलाना भी पड़ेगा। तो ऐसे में आपको अलर्ट रहना होगा की नहलाते टाइम उसके कान या मुह में पानी ना चला जाय। क्योकि बच्चों को नहलाना थोड़ा मुश्किल काम है। उसे नहलाने का तरीका सीखें। नहलाना शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजें तैयार कर लें ताकि बच्चे को अकेला छोड़ यहां वहां न भागना पड़े।

इस सुझाव पर भी नजर डालें

जन्म के पहले 3 से 5 दिनों के अंदर पीडिएट्रिशियन से मिलें। इस के बाद जब वह 2 सप्ताह का हो जाए तो उसे एक बार फिर से डाक्टर के पास ले जाएं।   जन्म के पहले सप्ताह में बच्चे का वजन 5 से 10 फीसदी कम हो जाता है, पर 2 सप्ताह की उम्र तक वजन फिर से बढ़ कर उतना ही हो जाता है। ध्यान रखें कि बच्चा बहुत लंबे समय तक एक ही स्थिति में न लेटा रहे।